विश्वस्तरीय रैंकिंग के लिए शोध जरूरी हुआ तो विश्वविद्यालयों में मची होड़; जानें कैसे बढ़ा पीएचडी में नामांकन

शोध के क्षेत्र में विश्वविद्यालयों का यह रुझान इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि विश्वस्तरीय रैंकिंग में जगह बनाने के लिए जो तय मानक है उनमें शोध सबसे अहम है। अभी तक भारतीय विश्वविद्यालयों का प्रदर्शन इस क्षेत्र में काफी कमजोर रहता था।

Arun Kumar SinghWed, 16 Jun 2021 08:29 PM (IST)
पीएचडी के ही नामांकन में ही पांच सालों में साठ फीसद से ज्यादा की बढ़त

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने की मुहिम का असर दिखने लगा है। विश्वविद्यालयों के बीच अब इसके मानकों को पूरा करने की प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। खासकर शोध के क्षेत्र में पिछले पांच सालों में इन संस्थानों के बीच भारी उत्साह देखने को मिला है। इस दौरान अकेले पीएचडी के ही नामांकन में ही पांच सालों में साठ फीसद से ज्यादा की बढ़त दर्ज हुई है। इनमें भी सबसे बड़ी छलांग राज्य के विश्वविद्यालयों ने दिखाई है, जहां इन सालों में तीन गुना ज्यादा नामांकन हुआ है।

पिछले पांच सालों में अकेले पीएचडी में ही 60 फीसद से ज्यादा नामांकन

शोध के क्षेत्र में विश्वविद्यालयों का यह रुझान इसलिए भी बढ़ा है, क्योंकि विश्वस्तरीय रैंकिंग में जगह बनाने के लिए जो तय मानक है, उनमें शोध सबसे अहम है। अभी तक भारतीय विश्वविद्यालयों का प्रदर्शन इस क्षेत्र में काफी कमजोर रहता था। ऐसे में वह रैंकिंग में जगह नहीं बना पाते थे। हालांकि पिछले पांच सालों में सरकार ने शोध को बढ़ावा देने के लिए जिस तरह से मुहिम चलाई है, उसका ही असर था, कि हाल ही में आयी भारतीय

उच्च शिक्षण सर्वेक्षण की वर्ष 2019-20 की रिपोर्ट में पीएचडी के नामांकन में संस्थानों ने लंबी छंलाग लगाई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2014-15 में देश भर में विश्वविद्यालयों में पीएचडी के लिए कुल नामांकन 1.17 लाख थे, जो वर्ष 2019-20 में बढ़कर 2.03 लाख हो गया है। इनमें भी राज्य विश्वविद्यालयों ने बड़ी बढ़त ली है।

राजस्थान, बंगाल, यूपी सहित नार्थ-ईस्ट में पीएचडी नामांकन में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

इन संस्थानों में पिछले पांच सालों के मुकाबले तीन गुना से ज्यादा पीएचडी का नामांकन हुआ है। खास बात यह है कि विश्वविद्यालयों ने शोध के क्षेत्र में यह बढ़ोतरी एक क्रमबद्ध तरीके से की है। शिक्षा मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक शोध के लिए अब संस्थानों को अलग से फंड दिया जा रहा है। वहीं शोध को बढ़ावा देने के लिए बजट में नेशनल रिसर्च फाउंडेशन का भी गठन करने का भी एलान किया है। जो शोध और अनुसंधान पर अगले पांच सालों में पचास हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी।

माना जा रहा है कि इस पहल से शोध के लिए संस्थानों को और पैसा मिलेगा। फिलहाल सर्वेक्षण रिपोर्ट में जिन राज्यों में पीएचडी के सबसे ज्यादा नामांकन हुए हैं, उनमें राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, सिक्किम, नगालैंड, पंजाब जैसे राज्य शामिल है। विश्वविद्यालय इसके साथ ही विश्वस्तरीय रैंकिंग से जु़ड़े दूसरे मानकों पर भी तेजी से काम कर रहे हैं, जिसमें शिक्षकों के खाली पदों को भरना, इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना शामिल है।

 

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