पहले भी भीषण हेलीकाप्टर हादसों ने देश को दिए हैं गहरे जख्म, जानें कब कब हुई दुर्घटनाएं

वायुसेना ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत के हेेलीकाप्‍टर दुर्घटना के कारणों की पड़ताल के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए हैं। इससे पहले भी चाहें तकनीकी खामी रही हो या मौसम की खराबी इस तरह के हादसों ने देश को गहरे जख्म दिए हैं।

Krishna Bihari SinghPublish:Wed, 08 Dec 2021 09:08 PM (IST) Updated:Thu, 09 Dec 2021 12:35 AM (IST)
पहले भी भीषण हेलीकाप्टर हादसों ने देश को दिए हैं गहरे जख्म,  जानें कब कब हुई दुर्घटनाएं
पहले भी भीषण हेलीकाप्टर हादसों ने देश को दिए हैं गहरे जख्म, जानें कब कब हुई दुर्घटनाएं

नई दिल्ली, पीटीआइ। तमिलानाडु में कुन्नूर के समीप बुधवार को अत्‍याधुनिक एमआई-17वी5 हेलीकाप्टर क्रैश हो गया जिससे इसमें सवार प्रमुख रक्षा अध्यक्ष यानी सीडीएस जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्‍नी मधुलिका रावत और 11 अन्य लोगों की मृत्यु हो गई। हेलीकाप्टर पर कुल 14 लोग सवार थे। हादसे में ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह घायल हैं जिनका सैन्य अस्पताल (वेलिंगटन) में इलाज चल रहा है। वायुसेना ने दुर्घटना के कारणों की पड़ताल के लिए 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' के आदेश दिए हैं। इससे पहले भी चाहें तकनीकी खामी रही हो या मौसम की खराबी इस तरह के हादसों ने देश को गहरे जख्म दिए हैं।

22 नवंबर, 1963- जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के पास चीता हेलीकाप्टर गिरा, जिसमे लेफ्टिनेंट जनरल दौलत सिंह, एयर वाइस मार्शल ईडब्ल्यू पिंटू, लेफ्टिेनेंट जनरल बिक्रम सिंह, मेजर जनरल केएनडी नानावती, ब्रिगेडियर एसआर ओबेराय और फ्लाइट लेफ्टिनेंट एसएस सोढी मारे गए थे।

14 नवंबर, 1997- रक्षा राज्यमंत्री एनवीएन सोमू की अरुणाचल प्रदेश में बर्फ से ढकी पहाड़ी पर वायु सेना के हेलीकाप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से मौत हो गई।

आठ मई, 2001- अरुणाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री डेरा नातुंग पवन हंस हेलीकाप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से मारे गए।

तीन मार्च, 2002- लोकसभा स्पीकर जीएमसी बालयोगी की आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के कैकलुर के पास हेलीकाप्टर हादसे में जान गई।

22 सितंबर, 2004- मेघालय के ग्रामीण विकास मंत्री साइप्रियन संगमा और नौ अन्य लोगों की शिलांग के पास पवन हंस हेलीकाप्टर हादसे में मौत।

31 मार्च, 2005- हरियाणा के कृषि मंत्री सुरेंदर सिंह और बिजली मंत्री ओपी जिंदल की उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के पास हेलीकाप्टर दुर्घटना में जान गई।

दो सितंबर, 2009- आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी और चार अन्य लोगों की कुर्नूल के पास हेलीकाप्टर हादसे में मौत हुई।

30 अप्रैल, 2011- अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू की राज्य के वेस्ट कमेंग जिले में हेलीकाप्टर हादसे में निधन।

एमआइ17वी5 हेलीकाप्टरों ने भी दिए गहरे जख्‍म

यद्यपि एमआइ17वी5 हेलीकाप्टरों को बहुत भरोसेमंद माना जाता है लेकिन पिछले कुछ वर्षो में इनसे कई हादसे भी हो चुके हैं। इसी साल 8 नवंबर को पूर्वी अरुणाचल प्रदेश में वायुसेना का हेलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने से दो पायलटों और चालक दल के तीन सदस्यों को मामूली चोटें आईं। 03 अप्रैल, 2018 को केदारनाथ मंदिर के पास एक एमआइ17वी5 हेलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि उसमें सवार छह लोग बाल-बाल बच गए। 07 अक्टूबर, 2017 को अरुणाचल प्रदेश के तवांग में चीन सीमा के पास एक अन्य एमआइ17वी5 हेलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने से उसमें सवार सशस्त्र बलों के सभी सात जवान मारे गए। 15 जून 2013 को उत्तराखंड में केदारनाथ से लौटते समय एक दुर्घटना में चालक दल के पांच सदस्यों समेत कुल आठ लोगों की मौत हो गई। 30 अगस्त 2012 को गुजरात में जामनगर एयरबेस से करीब 10 किलोमीटर दूर हवा में दो हेलीकाप्टरों की टक्कर में वायुसेना के नौ जवानों की मौत हो गई थी। 19 नवंबर, 2010 को अरुणाचल प्रदेश के तवांग के पास एक अन्य एमआइ17वी5 हेलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने से 12 रक्षा कर्मियों की मौत हो गई थी।

बेहद खास था सीडीएस को ले जा रहा हे‍लीकाप्‍टर

सीडीएस जनरल बिपिन रावत को ले जा रहा वायुसेना का एमआई-17वी5 हेलीकाप्टर एक उन्नत सैन्य चौपर है। यह साल 2012 से वायुसेना के बेड़े में शामिल है। बताया जाता है कि रशियन कंपनी 'कजान' द्वारा निर्मित एमआई-17वी5 हेलीकाप्टर मौसम रडार के साथ ही नवीनतम पीढ़ी के 'नाइट विजन' उपकरणों से लैस है।