गुजरात फर्म पर होगी सख्त कार्रवाई, अपने प्रोडक्ट को बताया था रेमडेसिविर से तीन गुना अधिक असरदार

सरकार के निर्देश पर गुजरात फर्म पर होगी सख्त कार्रवाई

युष मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र के बाद कार्रवाई के तहत गुजरात स्थित राजकोट के आयुर्वेदिक ड्रग्स निर्माता कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। दरअसल इस कंपनी ने अपने प्रोडक्ट आयुध एडवांस के लिए गलत दावे किए थे।

Monika MinalWed, 21 Apr 2021 10:58 AM (IST)

नई दिल्ली, एएनआइ। आयुष मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र के बाद कार्रवाई के तहत गुजरात स्थित राजकोट के आयुर्वेदिक ड्रग्स निर्माता कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। दरअसल इस कंपनी ने अपने प्रोडक्ट आयुध एडवांस के लिए गलत दावे किए थे। कंपनी ने दावा किया कि इसका कथित प्रोडक्ट कोविड-19 मैनेजमेंट व इलाज के लिए पहला क्लिनिकली टेस्ट दवा है।

लोगों को गुमराह करने वाला फर्जी दावा

सरकार द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार  कंपनी ने यह भी दावा किया कि यह दवा रेमडेसिविर से तीन गुना अधिक बेहतर है और जहां वैक्सीन काम करना बंद कर देता है वहां से आयुध एडवांस काम शुरू करता है। इस फर्जी और गुमराह करने वाले दावे आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले ड्रग पॉलिसी विभाग ने गुजरात की आयुर्वेदिक लाइसेंसिंग अथॉरिटी को निर्देश दिया है कि लोगों को गुमराह कर इस तरह के उत्पाद बेचने वाली कंपनी पर सख्त कार्रवाई की जाए। इस मामले में गुजरात के ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ फूड एंड ड्रग कंट्रोलर एडमिनिस्ट्रेशन ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।

आयुर्वेद के रूलबुक के खिलाफ

आयुष मंत्रालय ने ज्वाइंट कमिशनर ऑफ फूड एंड ड्रग कंट्रोलर एडमिनिस्ट्रेशन को इस पर कार्रवाई कर रिपोर्ट  मांगी है। बता देें कि राजकोट की शुक्ला अशर इंपेक्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने 'आयुध एडवांस' नाम से एक दवा बनाई और दावा किया कि  इस दवा को 21 अलग-अलग पौधों से तैयार किया गया और यह रेमडेसिविर से तीन गुना अधिक असरदार है। आयुष मंत्रालय ने ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ फूड एंड ड्रग कंट्रोलर एडमिनिस्ट्रेशन गुजरात को लिखे गए पत्र में निर्देश दिया है कि कंपनी अपने उत्पाद बेचने के लिए जो दावे कर रही है वह आयुर्वेद की रूल बुक के खिलाफ हैं। कंपनी के उत्पाद आयुर्वेदिक मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं। कंपनी के इस प्रोडक्ट को इंटरडिसिप्लिनरी ऑफ आयुष एंड टास्क फोर्स ऑफ कोविड और इंटरडिसिप्लिनरी टेक्निकल रिव्यू कमेटी पहले ही खारिज कर चुकी हैं। दोनों ही कमेटी का कहना था कि ये प्रोडक्ट आयुर्वेदिक मानक और उसके प्रोटोकाल पर खरे नहीं उतरते हैं। वहीं इसमें ऐसे पदार्थों का उपयोग किया गया, जो फर्स्ट शेड्यूल ऑफ ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के अनुसार नहीं हैं। 

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से जुड़ी प्रमुख जानकारियों और आंकड़ों के लिए क्लिक करें।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.