गौरी लंकेश हत्या मामले में हाई कोर्ट के आदेश का एक हिस्सा हो सकता है रद

गौरी लंकेश की पांच सितंबर 2017 की रात बेंगलुरु के राजराजेश्वरी नगर में उनके घर के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने पत्रकार गौरी लंकेश की बहन कविता लंकेश की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह संकेत दिया

Monika MinalWed, 22 Sep 2021 02:09 AM (IST)
गौरी लंकेश हत्या मामले में हाई कोर्ट के आदेश का एक हिस्सा हो सकता है रद

नई दिल्ली, प्रेट्र।  सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पत्रकार गौरी लंकेश (Gauri Lankesh) की हत्या में संलिप्त एक आरोपित के खिलाफ आरोपपत्र को खारिज करने संबंधी हाई कोर्ट के आदेश के एक हिस्से को रद करने का संकेत दिया है। आरोपित के खिलाफ कर्नाटक संगठित अपराध नियंत्रण कानून (केसीओसीए) के प्रविधानों के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

बता दें कि पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि आरोपी मोहन नायक के खिलाफ केसीओसीए (KCOCA) के तहत मामला चलाया जाए या नहीं। कोर्ट ने गौरी लंकेश की बहन और फिल्म निर्माता कविता लंकेश द्वारा दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है।  आरोपी मोहन नायक के खिलाफ कर्नाटक संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (केसीओसीए) के तहत आरोपों को खारिज करने के फैसले को चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की बेंच की ओर से पक्षकारों को तीन दिनों का समय दिया गया और लिखित दलीलें दाखिल करने का आदेश दिया गया है।  इससे पहले सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने गौरी लंकेश की बहन कविता लंकेश की याचिका पर नोटिस जारी किया था और सभी पक्षों से जवाब देने को कहा था।  कविता ने कर्नाटक हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने पत्रकार गौरी लंकेश हत्या मामले में आरोपी मोहन नायक के खिलाफ कर्नाटक संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (केसीओसीए) के तहत आरोपों को खारिज कर दिया था। 

बता दें कि लंकेश की पांच सितंबर, 2017 की रात बेंगलुरु के राजराजेश्वरी नगर में उनके घर के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने पत्रकार गौरी लंकेश की बहन कविता लंकेश की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह संकेत दिया। याचिकाकर्ता ने इस साल 22 अप्रैल को हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।

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