अगर नया वैरिएंट नहीं सामने आया तो तीसरी लहर दूसरी की तरह भयानक नहीं होगी : गगनदीप कांग

कोरोना संक्रमण का कोई नया वैरिएंट सामने नहीं आता है तो महामारी की तीसरी लहर दूसरी लहर की तरह भयानक नहीं होगी। शीर्ष वैक्सीनोलाजिस्ट गगनदीप कांग ने शुक्रवार को यह बात कही। उन्होंने बेहतर टीकों को विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया जो नए वैरिएंट्स से निपट सकते हैं।

TaniskFri, 17 Sep 2021 08:54 PM (IST)
कोरोना के वैरिएंट पर तीसरी वेव निर्भर।

नई दिल्ली, पीटीआइ। कोरोना संक्रमण का कोई नया वैरिएंट सामने नहीं आता है, तो महामारी की तीसरी लहर दूसरी लहर की तरह भयानक नहीं होगी। शीर्ष वैक्सीनोलाजिस्ट गगनदीप कांग ने शुक्रवार को यह बात कही। उन्होंने बेहतर टीकों को विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया जो नए वैरिएंट्स से निपट सकते हैं, और नियामक तंत्र को मजबूत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई नया वैरिएंट नहीं सामने आता है तो दूसरी लहर की जितनी बड़ी और भयानक तीसरी लहर नहीं होगी। हम कुछ जगहों पर मामलों में बढ़ोतरी देखेंगे, जहां असुरक्षित आबादी है और जहां वायरस पहले नहीं रहा है। 

मार्च और मई के बीच देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने हजारों लोगों की जान ले ली और लाखों लोगों को संक्रमित किया, जिससे स्वास्थ्य का बुनियादी ढांचा चरमरा गया था। वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कालेज की प्रोफेसर कांग ने सीआइआइ लाइफसाइंसेज कान्क्लेव में वर्चुअली बोलते हुए कहा, ' क्या कोविड खत्म हो गया? नहीं ऐसा नहीं हुआ है। क्या कोरोना खत्म होने जा रहा है? निकट भविष्य में अभी नहीं।

मामलों में वृद्धि का अनुमान लगाने के लिए विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय टीम में शामिल आइआइटी कानपुर के एक वैज्ञानिक मनिंद्र अग्रवाल ने पिछले महीने कहा था कि अगर सितंबर में कोई संक्रामक वैरिएंट सामने आता है देश में अक्टूबर-नवंबर के बीच तीसरी लहर चरम पर पहुंच सकती है। कांग ने कहा कि भारतीय वैक्सीन उद्योग महामारी से निपटने में 'बिल्कुल अभूतपूर्व' रहा है, लेकिन इसे अभी लंबा रास्ता तय करना है।

कांग ने कहा, ' मैं वही बात नहीं कह सकती (नियामक प्रणाली के बारे में) जैसा कि लोग हमारे नियामक प्रणालियों के बारे में जानते हैं, लेकिन यह कुछ ऐसा है जिसे हमें भविष्य के लिए एक सबक के रूप में उपयोग करना चाहिए, क्योंकि हमें वास्तव में मजबूत नियामकों की आवश्यकता है, जो उद्योगों के साथ काम करें ताकि यह दिखाया जा सके कि क्या आवश्यक है।'

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