बाल विज्ञानियों की प्रतिभा को तराशेगी फ्रांस की कंपनी, बिलासपुर का नाम पहले नंबर पर

नीति आयोग के मापदंड पर खरा उतरने वाली शीर्ष 10 अटल टिंकरिंग लैब की सूची तैयार की गई है। इसमें पहली रैंकिंग छत्तीसगढ़ की सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल बिलासपुर की अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) को मिला है। सभी को मिलेगी ट्रेनिंग।

Pooja SinghSat, 24 Jul 2021 05:43 AM (IST)
बाल विज्ञानियों की प्रतिभा को तराशेगी फ्रांस की कंपनी, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर का नाम पहले नंबर पर

बिलासपुर, जेएनएन।  नीति आयोग के मापदंड पर खरा उतरने वाली शीर्ष 10 अटल टिंकरिंग लैब की सूची  तैयार की गई है। इसमें पहली रैंकिंग छत्तीसगढ़ की सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल बिलासपुर की अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) को मिला है। वहीं दूसरे नंबर पर प्रयागराज के सरकारी स्कूल की एटीएल है। रिपोर्ट के मुताबिक,नवाचार करने वाले टाप-10 एटीएल में बाल विज्ञानियों की प्रतिभा को फ्रांस की कंपनी द साल्ट सिस्टम फाउंडेशन इंडिया अगले एक वर्ष तक तराशेगी।

आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने की दी जाएगी ट्रेनिंग

उनकी ओर से बाल विज्ञानियों को आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कंपनी मांग के अनुसार नवाचार के लिए भी प्रेरित करेगी। नीति आयोग ने एटीएल प्रभारियों और प्राचार्य को इस संबंध में सूचित किया है।

सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल की एटीएल प्रभारी डा. धनंजय पांडेय ने बताया कि नवाचार करने वाले बाल विज्ञानियों की प्रतिभा को निखारने के लिए नीति आयोग ने द साल्ट सिस्टम फाउंडेशन को जिम्मेदारी सौंपी है। खास बात यह है कि फाउंडेशन एक वर्ष तक देशभर के टाप 10 एटीएल के बाल विज्ञानियों के अलावा एटीएल प्रभारी व मेंटर को भी तकनीकी रूप से समृद्ध करेंगे। साथ ही नवाचार के संबंध में उच्च तकनीक को भी विकसित करेंगे।

फाउंडेशन के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा बाल विज्ञानियों को नवाचार के संबंध में उच्च तकनीक के अलावा मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार विषय वस्तु भी तय करेंगे। नीति आयोग के मापदंडों को पूरा करते हुए जरूरी विषयों को समाहित भी करेंगे। फाउंडेशन के विशेषज्ञों द्वारा बाल विज्ञानियों, एटीएल प्रभारी व मेंटरों की वर्चुअल वर्कशाप का आयोजन होगा। नीति आयोग द्वारा दिए गए लक्ष्य की पूर्ति के लिए समय सीमा का निर्धारण भी करेंगे।

एटीएल के बाल विज्ञानियों ने सात ऐसे नवाचार किए हैं, जिनकी धूम देश और दुनिया में मची है। अटल कृषि यंत्र के पेटेंट की प्रक्रिया नीति आयोग के माध्यम से की जा रही है, जो अंतिम चरण में है। डेल कंपनी ने कृषि यंत्र भी बना लिया है। इसका परीक्षण चल रहा है। इस यंत्र को बनाने वाले बाल विज्ञानियों को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पुरस्कृत किया था। चिता की राख को परिष्कृत कर मोक्षा मशीन के जरिए जैविक खाद भी बाल विज्ञानी बना रहे हैं।

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