वित्‍त मंत्री सीतारमण ने दिया भरोसा- कोरोना महामारी काल में दिए गए प्रोत्साहन पैकेज जारी रहेंगे

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि कोरोना काल में दिए गए प्रोत्साहन पैकेज जारी रहेंगे और इसे वापस लेने की कोई जल्दबाजी नहीं है। इसके विपरीत अगर जरूरत पड़ी तो अर्थव्यवस्था की रिकवरी के लिए और सरकार अतिरिक्त वित्तीय मदद जारी रखने पर विचार कर सकती है।

Ramesh MishraMon, 18 Oct 2021 08:03 PM (IST)
वित्‍त मंत्री सीतारमण ने दिया भरोसा- कोरोना महामारी काल में दिए गए प्रोत्साहन पैकेज जारी रहेंगे।

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि कोरोना काल में दिए गए प्रोत्साहन पैकेज जारी रहेंगे और इसे वापस लेने की कोई जल्दबाजी नहीं है। इसके विपरीत अगर जरूरत पड़ी तो अर्थव्यवस्था की रिकवरी के लिए और सरकार अतिरिक्त वित्तीय मदद जारी रखने पर विचार कर सकती है। अमेरिका में दिए एक इंटरव्यू में वित्त मंत्री ने कहा कि कच्चे तेल की कीमत में हो रही बढ़ोतरी आर्थिक मोर्चे के लिए चुनौती है। वित्त मंत्रालय तेल की कीमतों पर लगातार नजर रख रहा है।

सीतारमण ने यह भी कहा कि देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआइसी) का प्रारंभिक पब्लिक आफर (आइपीओ) चालू वित्त वर्ष में ही लाने को सरकार प्रतिबद्ध है। कोरोना संक्रमण से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए वित्त मंत्री ने पिछले साल मई में आत्मनिर्भर भारत पैकेज का एलान किया था। इनमें मुख्य रूप से एमएसएमई के लिए बिना गारंटी वाले तीन लाख करोड़ रुपये के लोन, 80 करोड़ आबादी के लिए मुफ्त में अनाज, ग्रामीण रोजगार के लिए विशेष प्रविधान के साथ मनरेगा के फंड में बढ़ोतरी जैसे महत्वपूर्ण कदम शामिल थे। उसके बाद वित्त मंत्रालय ने 10 प्रमुख सेक्टर के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआइ) की भी घोषणा की थी।

वित्त मंत्री ने कहा कि कोरोना काल में अर्थव्यवस्था की रिकवरी के लिए जो भी वित्तीय प्रोत्साहन दिए गए थे, वे जारी रहेंगे। स्वास्थ्य संबंधी इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास जारी रहेगा। यही वजह है कि सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर समेत अन्य जरूरी मदों के खर्च को लगातार विस्तार दे रही है। सीतारमण ने कच्चे तेल की कीमतों को चुनौती करार देते हुए कहा कि वित्त मंत्रालय भी इस पर लगातार नजर रख रहा है। कच्चे तेल का दाम सरकार के लिए महत्वपूर्ण विषय है और इसकी अनिश्चितता से पैदा होने वाली परिस्थितियों पर सरकार की पैनी नजर है। उन्‍होंने कहा कि इससे महंगाई को हवा मिलती है और सरकार की खर्च योजना प्रभावित होती है।

शेयर बाजार में एलआइसी के सूचीबद्ध होने के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी प्रकार की राजनीतिक वजहों से एलआईसी के इनिशियल पब्लिक ऑफर (आईपीओ) में देर नहीं होगी। उन्होंने बताया कि शेयर बाजार में जाने के लिए एलआइसी का आंतरिक मूल्यांकन जरूरी है जिसका मूल्यांकन अभी पूरा नहीं हुआ है। बीते 65 वर्षो में कभी भी एलआइसी के मूल्यांकन नहीं किया गया। इसलिए समय लग रहा है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक एलआइसी का आइपीओ बाजार में आ जाएगा।

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