विदेश मंत्री जयशंकर बोले- भारत ने महामारी के दौरान 150 देशों को चिकित्सा आपूर्ति दी

विदेश मंत्री जयशंकर बोले- भारत ने महामारी के दौरान 150 देशों को चिकित्सा आपूर्ति दी

इसरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन संस्थान के 14 वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए ईएएम ने कहा भले ही हमने अपने देश में बड़े पैमाने पर टीकाकरण शुरू कर दिया है साथ ही हमने अपने पड़ोसियों को भी तत्काल भारतीय टीका आपूर्ति शुरू की।

Nitin AroraThu, 28 Jan 2021 08:18 AM (IST)

नई दिल्ली, एएनआइ। विदेश मंत्री (ईएएम) एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि भारत ने COVID-19 महामारी के दौरान 150 से अधिक देशों को चिकित्सा आपूर्ति और उपकरण प्रदान किए। इसरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन संस्थान के 14 वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए, ईएएम ने कहा, 'भले ही हमने अपने देश में बड़े पैमाने पर टीकाकरण शुरू कर दिया है, साथ ही हमने अपने पड़ोसियों को भी तत्काल भारतीय टीका आपूर्ति शुरू की। आने वाले समय में अन्य साथी देशों को भी भारत वैक्सीन देगा।'

जयशंकर ने कहा कि महामारी का मुकाबला स्वाभाविक रूप से आने वाले दिनों में वैश्विक एजेंडे पर हावी हो जाएगा। उन्होंने कहा कि एक देश के रूप में जो इस महामारी चिकित्सा आपूर्ति और उपकरण 150 से अधिक देशों को प्रदान करता है, वे उन देशों से समन्वय को बेहतर बनाने का भी समर्थन करता है।

नए अमेरिकी प्रशासन (राष्ट्रपति जो बाइडन) के बारे में बात करते हुए विदेश मंत्री ने कहा, जैसे ही अमेरिका में नया प्रशासन कार्यभार संभालता है, यह स्वाभाविक है कि दुनिया इससे होने वाले बदलावों पर ध्यान देगी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका सक्रिय रूप से और लगातार दो दशकों से विदेश नीतियों में प्रतिबद्धताओं में लगा हुआ है।

उन्होंने कहा कि दुनिया के बाकी हिस्सों की तरह, अमेरिका भी वैश्विक शक्ति वितरण के पुनर्संतुलन को स्वीकार कर रहा है। यह पिछले एक दशक में तेजी से हुआ और शायद आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जाहिर है, अमेरिकी प्रशासन उस परिदृश्य पर गौर करेगा जो उसे विरासत में मिला है और समकालीन जरूरतों को पूरा करेगा।

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर, EAM ने कहा, 'जहां जलवायु परिवर्तन की बात है, वैश्विक प्रतिबद्धताओं को कायम रखने के लिए अमेरिकी वापसी का व्यापक रूप से स्वागत किया जाएगा।' उन्होंने कहा कि भारत आज अपने स्वयं के विश्वासों और दुनिया की राय दोनों को मानता है क्योंकि यह नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करता है और इसके वन आवरण का विस्तार करता है। इतना ही नहीं, यह जैव-विविधता को बढ़ाता है और प्रभावी जल उपयोग पर ध्यान केंद्रित करता है।

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