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ट्रेनों की लेटलतीफी में हो रहा है सुधार, मगर धीरे-धीरे; आरटीआइ से सामने आई स्थिति

नई दिल्ली, प्रेट्र। ट्रेनों को समय से संचालित करने के लिए भारतीय रेलवे लगातार में कोशिश में है। चालू वित्त वर्ष में अब तक इन कोशिशों का थोड़ा-थोड़ा असर दिखा है। सूचना का अधिकार (आरटीआइ) के जरिये मिली जानकारी में यह बात सामने आई है।

गरीब रथ और सुविधा एक्सप्रेस की स्थिति ज्यादा चिंताजनक

जानकारी के मुताबिक, इस साल अब तक 18 फीसद राजधानी और नौ फीसद शताब्दी ट्रेनें लेट हुई हैं। पिछले वित्त वर्ष में 23 फीसद राजधानी और 13 फीसद शताब्दी ट्रेनें लेट हुई थीं। गरीब रथ और सुविधा एक्सप्रेस के मामले में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। इस वित्त वर्ष में अब तक (अप्रैल-सितंबर) 44 फीसद गरीब रथ और 53 फीसद सुविधा एक्सप्रेस लेट हुई हैं। आरटीआइ में बताया गया है कि चालू वित्त वर्ष में 74 फीसद मेल एक्सप्रेस और 71 फीसद पैसेंजर ट्रेनें समय पर चलीं। पिछले वित्त वर्ष में 69.23 फीसद मेल एक्सप्रेस और 68 फीसद पैसेंजर ट्रेनें समय पर चली थीं। भोपाल के आरटीआइ कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौर ने ट्रेनों की समयबद्धता पर सवाल पूछा था।

रेलवे की योजना में गंभीर खामियों के कारण ट्रेनें लेट- कैग

नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने पिछले साल अपनी रिपोर्ट में कहा था कि स्टेशनों के पुनर्विकास की एक लाख करोड़ की रेलवे की योजना में गंभीर खामियों के कारण ट्रेनें लेट हो रही हैं। कैग ने स्टेशनों पर ट्रेनों के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने और आधारभूत ढांचे में कमी पर भी सवाल उठाया था। रेलवे ने ट्रेनों के संचालन पर नजर रखने के लिए हाल में उन्हें इसरो के एक सेटेलाइट नेटवर्क से जोड़ने वाला सिस्टम लांच किया है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सभी जोनल रेलवे को निर्देश दिया है कि ट्रेनों को उनकी अधिकतम तय गति सीमा तक चलाया जाए। इसके अलावा ट्रेनों की लेटलतीफी का कारण बनने वाले अन्य कारकों को भी रेलवे दुरुस्त करने में लगा है।

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