जयशंकर-ब्लिंकन वार्ता में कोरोना ही रहा बड़ा मुद्दा, द्विपक्षीय रिश्तों से लेकर एशिया और प्रशांत क्षेत्र पर भी हुई बात

विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन आपस में बातचीत करते हुए

विदेश मंत्री एस जयशंकर की तरफ से भारत को अभी तत्काल किन उत्पादों की जरूरत है इसके बारे में विस्तार से ब्लिंकन को बताया गया है। इस आग्रह के आधार पर अमेरिका आने वाले दिनों में अपनी मदद का विस्तार करेगा।

Dhyanendra Singh ChauhanTue, 04 May 2021 09:02 PM (IST)

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर की अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ हुई पहली व्यक्तिगत मुलाकात में वैसे तो द्विपक्षीय रिश्तों से लेकर बहुपक्षीय व एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर भी बात हुई है, लेकिन कोविड की दूसरी लहर से उपजी चुनौतियां ही प्राथमिकता में रहीं। भारत के हालात को देखते हुए अमेरिका सबसे ज्यादा मदद करने वाला देश हो गया है। जयशंकर ने वैक्सीन से लेकर कोविड-19 महामारी से प्रभावित लोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति और बढ़ाने की मांग की है। जयशंकर की तरफ से भारत को अभी तत्काल किन उत्पादों की जरूरत है, इसके बारे में विस्तार से ब्लिंकन को बताया गया है। इस आग्रह के आधार पर अमेरिका आने वाले दिनों में अपनी मदद का विस्तार करेगा।

ब्लिंकन ने जयशंकर को आश्वस्त किया है कि अमेरिका से भारत को हरसंभव मदद दी जाएगी। विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत के लिए आक्सीजन आपूर्ति से जुड़े उपकरण को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है और अमेरिका को इस बारे में फिर से बताया गया है। अमेरिका अभी तक आक्सीजन आपूर्ति से जुड़े उपकरणों से लदे पांच विमान भारत भेज चुका है। इसमें रेमडेसिविर व दूसरी दवाइयां भी हैं। वैक्सीन निर्माण में सहयोग के कुछ पहलुओं पर भी बात हुई है। भारत में वैक्सीन निर्माण की क्षमता बढ़ाने को लेकर भी चर्चा हुई है। दोनों मंत्री यह स्वीकार करते हैं कि भारत की जरूरत के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया की जरूरत के लिए भी भारत में वैक्सीन निर्माण की क्षमता को बढ़ाना बहुत जरूरी है। दोनों देशों के बीच इस संदर्भ में क्वाड के तहत वैक्सीन निर्माण क्षमता बढ़ाने को लेकर संपर्क बना हुआ है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र का मुद्दा भी उठा

जयशंकर और ब्लिंकन के बीच वार्ता में हिंद-प्रशांत क्षेत्र का मुद्दा भी उठा, लेकिन दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों की तरफ से जो जानकारी दी गई है, उसमें चीन को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। यहां तक कि ¨हद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त व सभी के लिए समान अवसर वाला बनाने जैसी सामान्य कूटनीतिक भाषा से भी परहेज किया गया है। भारत की तरफ से कहा गया है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समान अवसर वाले मुद्दों पर बात हुई है। म्यांमार की स्थिति और वर्ष 2030 तक पर्यावरण की स्थिति और ऊर्जा सहयोग को लेकर भी दोनों ने अपनी बातें रखी हैं। इन विषयों पर आगे विस्तार से वार्ता होने की संभावना है।

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