कोरोना ने कमजोर की टीबी के खिलाफ जंग, डब्ल्यूएचओ ने साझा की चिंताजनक तस्वीर, बढ़ गए मौत के मामले

कोरोना महामारी के कारण टीबी यानी क्षय रोग के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट में कोरोना के कारण क्षय रोग यानी टीबी उन्मूलन के प्रयासों को हुए नुकसान की तस्वीर सामने रखी है। पढ़ें यह रिपोर्ट...

Krishna Bihari SinghFri, 15 Oct 2021 09:04 PM (IST)
डब्ल्यूएचओ ने कोरोना के कारण क्षय रोग उन्मूलन के प्रयासों को हुए नुकसान की तस्वीर सामने रखी है। (Photo- WHO)

नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। कोरोना महामारी के कारण अन्य कई गंभीर बीमारियों के इलाज में देरी और दिक्कत की खबरें आती रही हैं। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट में कोरोना के कारण क्षय रोग यानी टीबी उन्मूलन के प्रयासों को हुए नुकसान की तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 से 2020 के बीच बड़ी संख्या में टीबी के मरीज जांच और इलाज से वंचित रह गए। रिपोर्ट में कोरोना महामारी के दौरान 197 देशों में टीबी के मरीजों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

क्‍या कहते हैं आंकड़े

71 लाख नए मामले दुनियाभर में सामने आए थे 2019 में 58 लाख नए मामले दर्ज किए गए 2020 में 41 प्रतिशत की गिरावट भारत में आई नए मामलों में 14 प्रतिशत की गिरावट इंडोनेशिया में देखी गई 12 प्रतिशत की गिरावट फिलीपींस में दर्ज हुई 8 प्रतिशत कम मामले चीन में दर्ज किए गए

चिंताजनक तस्वीर

28 लाख लोगों को 2020 में टीबी का प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट मिल पाया, जो 2019 की तुलना में 21 प्रतिशत कम है। दवा प्रतिरोधी टीबी के लिए 2020 में 1.50 लाख लोगों को इलाज मिला। 2019 में इनकी संख्या 1.77 लाख रही थी। जरूरत के हिसाब से देखा जाए तो दवा प्रतिरोधी टीबी के तीन में से करीब एक मरीज को ही इलाज उपलब्ध हो पाया। टीबी की जांच और इलाज पर निवेश भी कम हुआ है। 2020 में इस क्षेत्र में 5.3 अरब डालर कर निवेश हुआ, जबकि 2022 तक सालाना 13 अरब डालर के निवेश का लक्ष्य है। 2015 से 2020 के बीच टीबी से होने वाली मौतों में मात्र 9.2 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि लक्ष्य 35 प्रतिशत की कमी का था। 2015 से 2020 के दौरान आबादी की तुलना में टीबी से ग्रस्त होने वालों में 11 प्रतिशत की कमी आई, जबकि लक्ष्य 20 प्रतिशत की कमी का था। 24.04 लाख नए मरीज मिले थे देश में 2019 में, जो 2018 की तुलना में 12 प्रतिशत ज्यादा था 18.02 लाख नए मामले दर्ज किए गए देश में 2020 में, जो 2019 में तुलना में 15 प्रतिशत कम था

लाकडाउन ने बढ़ाई मुश्किल

मार्च 2021 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया था कि जनवरी से दिसंबर, 2020 के दौरान देश में टीबी के नए मामलों में 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट की बड़ी वजह कोरोना के कारण लगा देशव्यापी लाकडाउन था। लाकडाउन के कारण लोगों को अस्पताल जाने और जांच कराने में मुश्किल का सामना करना पड़ा था।

लाखों लोग जांच से दूर

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में चिंताजनक बात यह है कि जांच से दूर रह गए टीबी मरीजों की संख्या बेतहाशा बढ़ी है। 2019 में डब्ल्यूएचओ का अनुमान था कि दुनियाभर में 29 लाख ऐसे लोग हैं, जो टीबी से ग्रस्त हैं लेकिन उनकी जांच नहीं हुई है या फिर उनका आंकड़ा सरकारों के पास नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब इस अनुमान को बढ़ाकर 41 लाख कर दिया है। इसका अर्थ है कि दुनियाभर में 41 लाख लोग टीबी के कारण खतरे की जद में हैं, लेकिन सरकारों को पता नहीं है।

बढ़ गए मौत के मामले

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि महामारी ने टीबी उन्मूलन के प्रयासों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। 2010 में टीबी के कारण करीब 15 लाख लोगों ने जान गंवा दी। 2019 के मुकाबले मरने वालों की संख्या बढ़ी है। एक दशक से ज्यादा समय में पहली बार टीबी से मरने वालों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।

टीबी उन्मूलन के प्रयासों को लग सकता है झटका

रिपोर्ट में यह चिंता भी जताई गई है कि 2021 और 2022 में टीबी के नए मरीजों और इससे जान गंवाने वालों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनम ने कहा, 'इस रिपोर्ट में हमारी चिंता को सही साबित किया है कि महामारी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में आई कमी से टीबी उन्मूलन के वर्षों के प्रयास को झटका लग सकता है।' 

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