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...और एक दिन कोरोना भी खत्म होगा, कुछ आदतों को बनाना होगा जीवन का अंग

डॉ देब प्रसाद चट्टोपाध्याय। लॉकडाउन के चौथे चरण के समापन पर हैं, हमें अपनी आदतों में बदलाव कर लेना चाहिए। कारण यह है कि जिंदगी आगे बढ़ेगी और हो सकता है कि हमें कोरोना के साथसाथ कदम बढ़ाने पड़ें। कोरोना का संक्रमण मुंह व नाक के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश करता है। इसलिए मॉस्क को हम अपनी आदत बना लें और शारीरिक दूरी का शत-प्रतिशत पालन करें। मॉस्काका प्रयोग हमें तब करना है जब आसपास कोई दूसरा व्यक्ति मौजूद हो। कई बार देखा गया है कि कार में अकेले होने के बावजूद लोग मॉस्क पहने रहते हैं। इसके चलते कुछ लोगों को मास्क से दिक्कत भी हो रही है। यदि हम ऑफिस के कमरे में अकेले बैठे हैं तो हमें मास्क लगाने की जरूरत नहीं, लेकिन अगर हमसे मिलने के लिए कोई व्यक्ति आ रहा है तो हम जरूर मास्क लगाएं।

कोरोना वायरस बातचीत के दौरान मुंह से निकलने वाले फ्लूड से फैलता है। जब कभी आप किसी अन्य व्यक्ति के समीप हों या बातचीत करें तो मास्क का अवश्य प्रयोग करें। अगर हम यह सोचते हैं कि सामने वाले को किसी तरह के लक्षण नहीं और वह स्वस्थ है, लेकिन अगर कहीं वह एसिम्प्टोमेटिक हुआ तो..। यह लापरवाही हम पर भारी पड़ सकती है। यदि हम अपने परिवार के बीच में हैं और जानते हैं कि हर व्यक्ति स्वस्थ है तो हमें वहां मास्क की कोई आवश्यकता नहीं।

लॉकडाउन में अब कुछ ढील दी जा चुकी है ऐसे में लोग ट्रेवल भी कर रहे हैं, अपने काम पर भी आ जा रहे हैं। इसलिए इस समय हैंड हाइजीन का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। कोरोना वायरस बातचीत या छींकने खांसने पर मुख से बाहर आने वाले फ्लूड के साथ सतह पर गिर सकता है। इसलिए हर 2 घंटे पर साबुन से 20 सेकंड तक हाथ धोने की आदत हमें जारी रखनी होगी।

गर्मी के चलते तापमान अधिक है और धूप बहुत तेज। ऐसे में मुख से बातचीत के दौरान निकलने वाला फ्लूड ज्यादा देर तक वातावरण में नहीं रह सकता और वह जल्द सूख जाता है इसलिए कोरोना वायरस का भी जीवित रहना मुश्किल है। लेकिन फिर भी हर कदम पर एहतियात की जरूरत है। महत्वपूर्ण यह भी है कि संक्रमण के लिए कम से कम 100 पैथोजेन की संख्या जरूरी है। इससे कम होने पर वायरस बीमारी नहीं पैदा कर सकेगा और खत्म हो जाएगा। इसलिए छह फीट की दूरी का अनुपालन करना जरूरी है। इससे यदि ड्रॉपलेट के जरिए वायरस आएगा तो भी वह बीच में ही सूख के खत्म हो जाएगा।

यही वजह है कि यदि हम किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में दो-तीन मिनट के लिए आते भी हैं तो भी संक्रमण होने की आशंका बहुत कम होती है। लोगों को कोरोना के मरीजों की बढ़ती संख्या से भयभीत होने की जरूरत नहीं। दूसरे देशों के मुकाबले हमारे देश में मृत्यु दर काफी कम है। वहीं संक्रमण को मात देकर स्वस्थ होने वाले लोगों की तादाद भी अच्छी है। इसकी वजह हमारी मजबूत इम्युनिटी ,वैक्सीनेशन ,जलवायु व अन्य कारण हो सकते हैं। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं। जहां तक कुछ विशेषज्ञ यह दावा कर रहे हैं कि भारत में अभी पीक आना बाकी है।

दरअसल वह वायरोलॉजी के बारे में जानते नहीं। बतौर विशेषज्ञ वह अपनी राय दे रहे हैं। मेरा कहना है कि भारत में ना पीक आया है और ना आएगा। लॉकडाउन में ढील के बाद से यहां हर रोज 6 से 7 हजार के आसपास संक्रमण के मामले आ रहे हैं और अब यह स्थिर होने की ओर है। अगले माह तक इसमें अवश्य कमी आएगी। प्रकृति में कोई चीज स्थाई नहीं होती। इंसानी सभ्यता की शुरुआत से महामारियां आ रही हैं और खत्म भी हुई हैं। इसी तरह से कोरोना भी जल्द खत्म हो जाएगा।

(लेखक इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेडिशनल मेडिसिन, आइसीएमआर के निदेशक हैं)

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