देश की कानूनी प्रणाली का भारतीयकरण समय की जरूरत, सुलभ और प्रभावी बनाना महत्वपूर्ण : CJI रमना

चीफ जस्टिस आफ इंडिया एनवी रमना ने शनिवार को कहा कि देश की कानूनी प्रणाली का भारतीयकरण समय की जरूरत है और न्याय प्रणाली को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों को वादी-केंद्रित होने की आवश्यकता है।

TaniskSat, 18 Sep 2021 04:27 PM (IST)
चीफ जस्टिस आफ इंडिया एनवी रमना ।

बेंगलुरु, पीटीआइ। चीफ जस्टिस आफ इंडिया एनवी रमना ने शनिवार को कहा कि देश की कानूनी प्रणाली का भारतीयकरण समय की जरूरत है और न्याय प्रणाली को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों को वादी-केंद्रित होने की आवश्यकता है और न्याय देनी की व्यवस्था का सरल कैसे हो? यह हमारे लिए एक प्रमुख चिंता का विषय होनी चाहिए। 

जस्टिस रमना ने कहा, 'अक्सर हमारी न्याय व्यवस्था आम लोगों के लिए कई बाधाएं खड़ी करती है। अदालतों की कार्यप्रणाली और शैली भारत की जटिलताओं से मेल नहीं खाती। मूल रूप से औपनिवेशिक होने के कारण हमारी प्रणाली, कार्य और नियम भारतीय आबादी की जरूरतों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है।' सुप्रीम कोर्ट के दिवंगत जज जस्टिस मोहन एम शांतनगौदर को श्रद्धांजलि देने के लिए यहां आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 'हमारी कानूनी प्रणाली का भारतीयकरण' समय की मांग है।

जस्टिस रमना ने कहा,'जब मैं भारतीयकरण कहता हूं, तो मेरा मतलब है कि हमारे समाज की व्यावहारिक वास्तविकताओं के अनुकूल होने और हमारी न्या/ प्रणाली को स्थानीय बनाने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, पारिवारिक विवाद के कारण कोर्ट आने वाले ग्रामीण इलाकों के लोगों को अदालत में काफी परेशानी होती है। वे उन तर्कों या दलीलों को नहीं समझते हैं, जो ज्यादातर अंग्रेजी में होती हैं, उनके लिए ये एक विदेशी भाषा है।'

कोर्ट का फैसला आने में लंबा वक्त लगता है। इसे मद्देनजक मुख्य न्यायाधीश रमना ने कहा कि यह वादी की स्थिति को और जटिल करता है। उन्होंने कहा, 'पक्षकारों को फैसला समझने के लिए उन्हें अधिक पैसा खर्च करना पड़ता है। अदालतों को वादी-केंद्रित होने की आवश्यकता है, क्योंकि अंत में उन्हें ही लाभ मिलना है। न्याय देने की व्यवस्था को सरल बनाना हमारी प्रमुख चिंता का विषय होनी चाहिए। न्याय देने की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी बनाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रक्रिया संबंधी बाधाएं अक्सर न्याय तक पहुंच को कमजोर करती हैं।

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