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चायनीज एप बैन होने के बाद बौखलाये चीन ने WTO जाने की धमकी दी, भारत ने दिया करारा जवाब

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। चीन की कंपनियों के खिलाफ भारत में जिस तरह का माहौल बनने लगा है और जिस तरह से भारत सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा लेकर लगातार आक्रामक रणनीति अपना रही है उससे चीन बौखलाया हुआ है। पिछले एक हफ्ते के दौरान भारत की तरफ से 59 चीनी मोबाइल एप पर प्रतिबंध लगाने और चीन निर्मित उत्पादों पर रोक लगाने के लिए नए नियम लागू किये जाने पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और यह धमकी भी दी है कि वह भारत के खिलाफ भेद-भाव पूर्ण वाणिज्यिक नीति अपनाने पर विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) में शिकायत दर्ज कराएगा। चीन के इस शिकायत पर भारत ने खास तवज्जो नहीं दी है और यह संकेत दे दिया है कि वह अपने रुख पर अटल रहेगा। विदेश मंत्रालय ने उल्टा यह कहा है कि भारत में विदेशी कंपनियों के लिए जितना खुली नीति है उतनी शायद ही कहीं हो।

कंट्री ऑफ ऑरिजन संबंधी नियम से भड़का चीन

चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता जीओ फेंग ने कहा है कि, ''चीन ने तो किसी भी भारतीय कंपनी के उत्पादों या उनकी सेवाओं पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। लेकिन भारत चीन के उत्पादों व सेवाओं के खिलाफ कदम उठा रहा है जो डब्लूटीओ प्रावधानों का सीधा सीधा उल्लंघन है।'' जानकारों का मानना है कि चीन की बौखलाहट के पीछे सबसे बड़ी वजह पिछले हफ्ते लागू की गई कंट्री ऑफ ऑरिजन संबंधी नियम हैं। यह लंबी अवधि में चीन से मंगवाये गये सभी उत्पादों का पहचान करने का एक जरिया होगा। अभी तक चीन की कंपनियों के बने उत्पादों को आम आदमी के लिए पहचानना मुश्किल होता था। अब यह आसान हो जाएगा। भारत ने जिस आधार पर चीनी मोबाइल एप को बैन किया है उससे भी वहां चिंता है। भारत सरकार ने कहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हित व भारतीय मोबाइल ग्राहकों के हितों को ध्यान में रखते हुए एप प्रतिबंधित कर रही है। अब दूसरे देशों को भी इस आधार पर चीनी एप पर लगाम लगाने का रास्ता खुल सकता है।

इकोनॉमी के मामले में भारत के नियम  काफी उदारवादी

इस बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्ताव ने कहा है कि, ''विदेशी निवेश आकर्षित करने को लेकर भारत की नीतियां में दुनिया में सर्वाधिक उदारवादी हैं। पिछले कुछ महीनों में भारत सरकार ने अपने यहां निवेश माहौल को बेहतर बनाने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाये हैं। डिजिटल टेक्नोलोजी व इकोनॉमी के मामले में भी भारत के नियम बेहद उदारवादी हैं। विश्व के सबसे बड़ी इंटरनेट एप्लीकेशंस व सॉफ्टवेयर कंपनियां यहां हैं और काम कर रही हैं। भारत में काम करने वाली इन कंपनियों को यहां के घरेलू नियमों का पालन करना होगा और डाटा सिक्योरिटी व पर्सनल डाटा संबंधी नियमों का पालन तो करना ही होगा। भारत आगे भी तकनीकी व डिजिटल कंपनियों को आकर्षित करता रहेगा लेकिन उन्हें यहां के कानून व नियमों के दायरे में ही काम करना होगा।''

चीन के साथ व्यापार घाटे में और कमी 

दोनो देशों के बीच वाणिज्यिक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच यह सूचना आई है कि चीन के साथ भारत के व्यापार घाटे में और कमी आई है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2019-20 में व्यापार घाटा 48.6 अरब डॉलर रहा है जो इसके पिछले वित्त वर्ष में 53.56 अरब डॉलर रहा था। वर्ष 2017-18 में व्यापार घाटा 63 अरब डॉलर का रहा था। इस तरह से लगातार तीसरा वित्त वर्ष है जब व्यापार घाटे को पाटने में सफलता मिली है। इसी तरह से चीन से होने वाले विदेशी निवेश (एफडीआइ) में भी भारी गिरावट का रुख रहा है। वर्ष 2019-20 में चीन से 16.38 करोड़ डॉलर का निवेश आया है जो वर्ष 2018-19 में यह 22.9 करोड़ डॉलर का था। पिछले दो दशकों में (अप्रैल, 2000 से मार्च, 2020) चीन ने भारत में कुल 2.38 अरब डॉलर का निवेश किया है।

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