झीरम घाटी हमला प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट में छत्तीसगढ़ सरकार की अपील खारिज

25 मई, 2013 में नक्सलियों ने झीरम घाटी में कांग्रेसी नेताओं के काफिले पर हमला किया था।
Publish Date:Wed, 30 Sep 2020 06:30 AM (IST) Author: Dhyanendra Singh

नई दिल्ली, प्रेट्र। झीरम घाटी नक्सली हमले की जांच कर रहे आयोग द्वारा अतिरिक्त गवाहों से पूछताछ से इन्कार करने के खिलाफ दायर छत्तीसगढ़ सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दी है। 2013 को हुए इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोग मारे गए थे।

मंगलवार को जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने कहा कि सरकार जांच आयोग का कार्यकाल बढ़ा सकती थी, लेकिन उसकी कार्यवाही पूरी हो चुकी है। पीठ ने कहा कि आप चाहते हैं कि इस मामले में कुछ विशेषज्ञ गवाहों से भी पूछताछ हो, लेकिन आयोग इसके लिए तैयार नहीं है। इस पीठ में जस्टिस आर.एस.रेड्डी और एम.आर.शाह भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भी इस मामले में राज्य सरकार की याचिका ठुकरा चुकी है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती है।

उल्लेखनीय है 25 मई, 2013 में नक्सलियों ने बस्तर के दरबा क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेसी नेताओं के काफिले पर हमला किया था। हमले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, नेता विपक्ष महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्या चरण शुक्ल समेत 29 लोग मारे गए थे।

नई सरकार बनने तक 67 लोगों के लिए गए बयान

सुप्रीम कोर्ट में छत्तीसगढ़ सरकार के स्थायी वकील समीर सोढ़ी के साथ अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ के समक्ष कहा कि घटना के बाद गठित जांच आयोग ने 2018 में नई सरकार बनने तक 67 लोगों के बयान लिए। आयोग को संदर्भ की अतिरिक्त शर्ते बताई गई लेकिन सात माह तक आयोग ने कुछ नहीं किया। गत अक्टूबर में दो लोगों की गवाही हुई, लेकिन राज्य सरकार जिन छह और गवाहों की गवाही चाहती थी आयोग ने उन्हें नहीं बुलाया।

इस पर पीठ ने कहा कि जांच आयोग ने पिछले सितंबर को ही कह दिया था कि वह एक अक्टूबर के बाद किसी से पूछताछ नहीं करेगा। पीठ ने कहा कि आयोग ने गवाही के इच्छुक लोगों से हलफनामा मांगा था लेकिन उन्होंने नहीं दिया।


जांच खिंचने पर कई बार आयोग का कार्यकाल बढ़ाया गया

उल्लेखनीय है राज्य सरकार ने पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि आयोग ने इस मामले में छह अहम गवाहों का पक्ष जानने के बजाय जांच ही बंद कर दी। ऐसे में आयोग का गठन जिस उद्देश्य से हुआ था वह कैसे पूरा होगा।

उल्लेखनीय है इस घटना की जांच के लिए तत्कालीन रमन सिंह सरकार ने 28 मई, 2013 को हाई कोर्ट के जज प्रशांत कुमार मिश्र की अध्यक्षता में आयोग गठित किया था। इसे तीन माह में रिपोर्ट देनी थी। जांच खिंचने पर कई बार आयोग का कार्यकाल बढ़ाया गया। अंतिम बार 21 जनवरी, 2019 को भूपेश बघेल की सरकार ने आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर, 2019 तक बढ़ाया था।

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