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सीआइएस देशों तक कारोबार में भारत के लिए चाबहार पोर्ट होगा बेहद मददगार

नई दिल्ली, प्रेट्र। ईरान में रणनीतिक चाबहार पोर्ट के विकास से भारत को सीआइएस देशों तक पहुंचने में बड़ी मदद मिलेगी। शिपिंग मंत्रालय संभाल रहे केंद्रीय मंत्री मनसुख लाल मांडविया ने कहा कि इस पोर्ट के माध्यम से सीआइएस देशों तक पहुंचने में भारत को ढुलाई खर्च में 20 प्रतिशत तक की बचत होगी। यह पोर्ट ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित है और भारत अपने पश्चिमी तट से आसानी से वहां पहुंच सकता है। इसके लिए पाकिस्तान से रास्ता लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

सीआइएस (कॉमनवेल्थ एंड इंडिपेंडेंट स्टेट्स) देशों में अर्मेनिया, अजरबैजान, बेलारूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, रूस व उज्बेकिस्तान शामिल हैं। मांडविया ने कहा कि रणनीतिक विकास के तहत चाबहार पोर्ट से कार्गो की लोडिंग और अनलोडिंग का काम शुरू हो चुका है। इससे पहले सीआइएस देशों तक कार्गो सिर्फ चीन या यूरोप के रास्ते पहुंचाया जा सकता था। लेकिन अब अफगानिस्तान के रास्ते इन देशों तक आसानी से सामान पहुंचाया जा सकता है। मांडविया ने बताया कि चाबहार पोर्ट पर परिचालन तेजी से बढ़ रहा है और कई कंपनियों की गतिविधियां वहां तेज हुई हैं।

'ईरान की हर दुर्घटना में इजरायल का हाथ नहीं'

ईरान के नतांज परमाणु केंद्र में हुए धमाके को लेकर इजरायल ने सफाई दी है। उसका कहना है कि ईरान में होने वाली हर रहस्यमय घटना के लिए उसे दोषी ठहराना ठीक नहीं है। ईरानी अधिकारियों का कहना था कि यह धमाका एक साइबर हमले का नतीजा था। गुरुवार को इस भूमिगत यूरेनियम संव‌र्द्धन केंद्र के एक हिस्से में धमाके के बाद आग लग गई थी। 

इजरायली रेडियो पर एक सवाल के जवाब में रक्षा मंत्री बेनी गेट्ज ने कहा, 'ईरान में होने वाली हर घटना के पीछे हमारा हाथ हो, यह जरूरी नहीं। एटमी टेक्नोलॉजी की अपनी जटिलताएं हैं और उनके सुरक्षा मानकों में भारी कमी है। मैं यह भी पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि वे इसे ठीक से संचालित करने में सक्षम हैं।'

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