सीडीएस जनरल रावत की चीन को दो-टूक, सीमा पर यथास्थिति को बदलने से रोकने के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा भारत

बिपिन रावत ने कहा है कि भारत अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

सीडीएस जनरल बिपिन रावत (CDS Gen Bipin Rawat) ने पूर्वी लद्दाख में चीन से जारी गतिरोध का जिक्र करते हुए कहा कि भारत उत्तरी सीमाओं पर यथास्थिति को बदलने के प्रयासों को रोकने के लिए मजबूती के साथ खड़ा रहेगा।

Krishna Bihari SinghThu, 15 Apr 2021 07:39 PM (IST)

नई दिल्ली, पीटीआइ। नई दिल्ली, पीटीआइ। चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध का जिक्र करते हुए गुरुवार को कहा कि भारत उत्तरी सीमाओं पर यथास्थिति बदलने के प्रयासों को रोकने के लिए मजबूती से खड़ा रहा और साबित कर दिया कि वह किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। जनरल रावत ने यहां 'रायसीना संवाद' में अपने संबोधन में कहा, चीन ने सोचा कि वह थोड़ी सी ताकत दिखाकर अपनी मांगें मनवाने के लिए राष्ट्रों को विवश करने में सफल रहेगा क्योंकि उसके पास प्रौद्योगिकीय लाभ की वजह से श्रेष्ठ सशस्त्र बल है। 

नहीं झुकेगा भारत 

उन्होंने कहा, 'लेकिन मुझे लगता है कि भारत उत्तरी सीमाओं पर मजबूती से खड़ा रहा और हमने साबित कर दिया कि हम झुकेंगे नहीं।' सीडीएस ने कहा कि क्षेत्र में यथास्थिति बदलने के प्रयासों को रोकने में मजबूती से खड़े होकर भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन प्राप्त करने में सफल रहा। रावत ने कहा, 'उन्होंने (चीन) यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि वे शक्ति का इस्तेमाल किए बिना विध्वंसक प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल कर यथास्थिति को बदल देंगे.. उन्होंने सोचा कि भारत, एक राष्ट्र के रूप में, उनके द्वारा बनाए जा रहे दबाव के आगे झुक जाएगा क्योंकि उनके पास प्रौद्योगिकीय लाभ हैं।' 

अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का हो पालन 

जनरल रावत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह कहने के लिए भारत का समर्थन करने आगे आया, 'हां, एक अंतरराष्ट्रीय नियम आधारित व्यवस्था है जिसका हर देश को पालन करना चाहिए। यह वह चीज है जो हम हासिल करने में सफल रहे।' उन्होंने कहा, 'विध्वंसक प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करके संघर्ष के अपरंपरागत तरीके अपनाए जा रहे हैं जो व्यवस्था को ध्वस्त करके नेटव‌र्क्स को पंगु बना सकते हैं, मसलन- बैंकिंग, पावर ग्रिड्स, ट्रांसपोर्टेशन और कम्युनिकेशन।'

जापान-आस्ट्रेलिया ने भी साधा चीन पर निशाना

वहीं कांफ्रेंस में जापान के चीफ आफ स्टाफ जनरल कोजी यामाजाकी ने कहा कि चीन एकतरफा रूप से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बदलने की कोशिश कर रहा है और ग्रे-जोन की रणनीति व विध्वंसक प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में समान विचारधारा वाले देशों के बीच सहयोग बेहद जरूरी है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र सामरिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र 

आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्काट मारिसन ने भी कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र सामरिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन गया है और विभिन्न चुनौतियों के समक्ष अपने साझा हितों की रक्षा करने के लिए समान विचारधारा वाले देशों को अधिक निरंतरता और एकजुटता से काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उदारवादी नियमों व मानकों पर हमला हो रहा है और सत्तावादी शासन व उदारवादी लोकतंत्रों के बीच ध्रुवीकरण हो रहा है। वहीं, चीफ आफ डिफेंस फोर्स आस्ट्रेलिया के जनरल एंगस कैंपबेल ने कहा कि ग्रे जोन रणनीति क्षेत्र से दूर रखने का तरीका है और हम दक्षिण चीन सागर में इसे देख चुके हैं।

मालदीव ने की भारत की सराहना

दुनिया के विभिन्न देशों को कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध कराने के भारत की सराहना करते हुए मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने कहा कि यह इस बात का उदाहरण है कि कैसे बहुपक्षवाद और वैश्विक गांव की विचारधारा को काम करना चाहिए।

जलवायु परिवर्तन पर मिलकर काम करें भारत-अमेरिका : कैरी

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के विशेष जलवायु दूत जान केरी ने गुरुवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने में नए ईंधन और नई प्रौद्योगिकियां ढूंढ़ने के लिए भारत और अमेरिका मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि पूरे भारत में 2030 तक 450 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता की गति तेज करने के लिए दोनों देश एक भागीदारी करेंगे। 'रायसीना डायलाग' में केरी ने कहा कि पेरिस समझौते से जुड़ी जिम्मेदारियों और इससे भी अधिक दायित्व निभाने के काम करने के लिए भारत में एक जोश है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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