वर्दी भत्ता मामले में कैग ने की रक्षा मंत्रालय की आलोचना, जानें क्या कहा

राज्यसभा में रखी गई रिपोर्ट में कैग ने कहा कि अधिकारी रैंक से नीचे के कर्मियों को बेसिक यूनिफार्म के स्थान पर वर्दी भत्ता प्रदान करने की सातवें वेतन आयोग की सिफारिश स्वीकार करने के बाद रक्षा मंत्रालय ने इस मामले में स्पष्टीकरण जारी करने में कई महीने लगा दिए।

Monika MinalWed, 01 Dec 2021 01:14 AM (IST)
वर्दी भत्ता मामले में कैग ने की रक्षा मंत्रालय की आलोचना

नई दिल्ली, प्रेट्र।: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने बेसिक यूनिफार्म (वर्दी) के स्थान पर सशस्त्र बल कर्मियों को वर्दी भत्ता प्रदान करने का फैसला लागू करने में योजना के अभाव के लिए रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) की आलोचना की है। राज्यसभा में मंगलवार को रखी गई रिपोर्ट में कैग ने कहा कि अधिकारी रैंक से नीचे के कर्मियों (पीबीओआर) को बेसिक यूनिफार्म के स्थान पर वर्दी भत्ता प्रदान करने की सातवें वेतन आयोग की सिफारिश स्वीकार करने के बाद रक्षा मंत्रालय ने इस मामले में स्पष्टीकरण जारी करने में कई महीने लगा दिए।

रक्षा मंत्रालय ने लगा दिए कई महीने - कैग 

कैग की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने सशस्त्र बलों को फैसले की सूचना देने में तीन महीने (नवंबर, 2017) लगा दिए और बेसिक एवं स्पेशल यूनिफार्म पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करने में सात और महीने (जून, 2018) लगा दिए। मंत्रालय ने वर्दी के स्टाक को निपटाने या फैसले को स्थगित करने का विकल्प तलाशने के लिए भी कोई योजना नहीं बनाई।

कैग ने इन बातों के लिए सेना की कर दी आलोचना 

कैग ने सोलर फोटो वोल्टिक पावर प्रोजेक्ट्स की स्थापना में देरी के लिए सेना की आलोचना की है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने 2016 में रक्षा मंत्रालय के विभिन्न प्रतिष्ठानों में सोलर फोटो वोल्टिक प्लांट्स स्थापित करने की एक योजना को स्वीकृति दी थी। इसमें सेना ने मार्च, 2019 तक 72 स्थानों पर 97 मेगावाट की परियोजनाओं के क्रियान्वयन की योजना बनाई थी। लेकिन सेना दिसंबर, 2019 तक सिर्फ 38 स्थानों पर 48.079 मेगावाट की परियोजनाएं ही लगा पाई। कैग ने आर्मी बेस वर्कशाप्स के आधुनिकीकरण में प्रशासनिक अक्षमता और आधुनिकीकरण परियोजना के क्रियान्वयन के फैसले में देरी के लिए भी सेना की आलोचना की है।

इसके अलावा लोकसभा में भी कैग सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और दूरसंचार मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाली इकाइयों के खातों में कई अनियमितताओं को उजागर किया है। इसमें NICSI द्वारा नियमों का उल्लंघन कर 890 करोड़ रुपये मूल्य के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की खरीद का मामला भी शामिल है।

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