लद्दाख में सिंधु केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने से जुड़ा विधेयक लोकसभा में पेश, कांग्रेस नेता ने इसे असंवैधानिक बताया

आर्टिकल 370 को 2 साल पूरे हो गए है इस मौके पर लोकसभा में गुरुवार को लद्दाख में केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2021 पेश किया गया। इस विधेयक के तहत केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रविधान है।

Avinash RaiThu, 05 Aug 2021 09:25 PM (IST)
लद्दाख में सिंधु केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने से जुड़ा विधेयक लोकसभा में पेश

 नई दिल्ली, प्रेट्र। आर्टिकल 370 को 2 साल पूरे हो गए है, इस मौके पर लोकसभा में गुरुवार को लद्दाख में केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2021 पेश किया गया। इस विधेयक के तहत केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रविधान है। लद्दाख के सिंधु केंद्रीय विश्वविद्यालय का नाम का सिंधु नदी के नाम पर रखा गया है। सिंधु नदी भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में बहती है।

लोकसभा में विपक्षी दलों के नेताओं के शोर-शराबे के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सदन में केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक- 2021 पेश किया। रिवाल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) नेता एनके प्रेमचंद्रन और कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने हंगामे के बीच विधेयक पेश किए जाने का विरोध किया। प्रेमचंद्रन ने कहा कि सदन में व्यवस्था बनने पर ही विधेयक पेश होना चाहिए। तो वहीं तिवारी ने कहा कि अव्यवस्था के बीच विधेयक पेश किया जाना असंवैधानिक है।

केंद्रीय विश्वविद्यालय के पहले चरण को चार सालों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2021 में कहा गया है कि लद्दाख में एक भी केंद्रीय विश्वविद्यालय नहीं है, इसलिए सरकार ने वहां एक केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का फैसला किया है। इससे क्षेत्र में उच्च शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकेगा। विधेयक के उद्देश्यों व कारणों में कहा गया है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम-2009 विभिन्न राज्यों में शिक्षा और अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालयों की स्थापना करने, उन्हें निगमित करने तथा उससे संबंधित विषयों को अधिनियमित करने का उपबंध करने के लिए बनाया गया था।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कुछ दिन पहले ही लद्दाख में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसकी लागत 750 करोड़ रुपये है। सूत्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय के लिए करीब 110 एकड़ जमीन दी गई है जो लेह और करगिल के बीच स्थित एक गांव खाल्टसी में है।

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