आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई, इस्लामिक संगठन पीएफआइ को टैक्स छूट में मिली अनुमति रद

आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इस्लामिक संगठन पीएफआइ को एक धर्मार्थ संगठन के रूप में दी गई टैक्स छूट को रद कर दिया है। विभाग का मानना है कि संगठन गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त है। इस आदेश को संगठन उच्चाधिकार प्राधिकार और कोर्ट में चुनौती दे सकता है।

Arun Kumar SinghTue, 15 Jun 2021 10:33 PM (IST)
इस्लामिक संगठन पीएफआइ को एक धर्मार्थ संगठन के रूप में दी गई टैक्स छूट को रद कर दिया है।

नई दिल्ली, प्रेट्र। आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इस्लामिक संगठन पीएफआइ को एक धर्मार्थ संगठन के रूप में दी गई टैक्स छूट को रद कर दिया है। विभाग का मानना है कि संगठन गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त है। आयकर विभाग ने हाल में पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआइ) का आयकर कानून 1961 के अनुच्छेद 12एए (3) के दिया गया रजिस्ट्रेशन रद कर दिया है। यह आदेश मार्च माह में जारी किया गया था।

आतंकी और मनी लांड्रिंग गतिविधियों में संलिप्तता के हैं आरोप

आदेश के मुताबिक, तत्काल प्रभाव से पीएफआइ को दी जा रही कर लाभ की अनुमति को असेसमेंट ईयर 2016-17 से रद किया जा रहा है। इसका तात्पर्य यह हुआ कि संगठन को अब आयकर अदा करना पडे़गा और जो लोग संगठन को दान देते हैं उनको आयकर में छूट नहीं मिलेगी। विभाग के इस आदेश को संगठन उच्चाधिकार प्राधिकार और कोर्ट में चुनौती दे सकता है।

पीएफआइ का 2006 में केरल में गठन किया गया था और इसका मुख्यालय दिल्ली में है। यह संगठन काफी दिनों से इसके कई सदस्यों के आतंकी गतिविधियों एवं मनी लांड्रिंग के अपराध में संलिप्तता के कारण प्रवर्तन निदेशालय के अलावा केंद्रीय एवं राज्यों की विभिन्न जांच एजेंसियों के रडार पर था।

धर्मार्थ संगठन का दर्जा छिना

विभाग ने आयकर कानून के अनुच्छेद 12एए के 12 ए और उसी कानून के अनुच्छेद 80 जी के तहत धर्मार्थ संगठन का दर्जा रद कर दिया है। विभाग ने कहा है कि संगठन अपने मेमोरेंडम आफ एसोसिएशन (एमओए) के उद्देश्यों पर काम नहीं कर रहा था और अनुच्छेद 13 (1)बी के प्रविधानों का उल्लंघन कर रहा था। आदेश में कहा गया कि उसकी गतिविधियां समाज और जाति विरोधी थीं। यह एक खास धाíमक समुदाय को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रहा था।

क्या है इनकम टैक्स का अनुच्छेद 80जी

आयकर के 80जी के तहत यदि आपने किसी किसी धर्मार्थ संस्था को दान किया तो आपको पूरी या आंशिक टैक्स छूट मिलती है। इसके लिए संस्था को इनकम टैक्स विभाग से 80जी प्रमाणपत्र लेना पड़ता है। इससे संस्था को दान में मिलने वाली राशि बढ़ जाती है, क्योंकि टैक्स में छूट के लिए लोग काफी दान देते हैं।

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