भारत बायोटेक ने दो ब्राजीली कंपनियों के साथ करार रद किया, जानें वजह

भारत बायोटेक ने अपनी कोरोना रोधी वैक्सीन कोवैक्सीन के लिए ब्राजील की दो कंपनियों के साथ हुए समझौते को रद कर दिया है। ब्राजील में कोवैक्सीन की सप्लाई के लिए भारत बायोटेक ने वहां की प्रेसिसा मेडिकैमेंटोस और एनविक्सिया फर्माश्यूटिकल्स के साथ करार किया था।

Pooja SinghSat, 24 Jul 2021 12:54 AM (IST)
भारत बायोटेक ने दो ब्राजीली कंपनियों के साथ करार रद किया, जानें वजह

नई दिल्ली, एएनआइ। भारत बायोटेक ने अपनी कोरोना रोधी वैक्सीन कोवैक्सीन के लिए ब्राजील की दो कंपनियों के साथ हुए समझौते को रद कर दिया है। ब्राजील में कोवैक्सीन की सप्लाई के लिए भारत बायोटेक ने वहां की प्रेसिसा मेडिकैमेंटोस और एनविक्सिया फर्माश्यूटिकल्स के साथ करार किया था।

भारत बायोटेक ने एक बयान में कहा है कि ब्राजीली कंपनियों के साथ हुए करार को तत्काल प्रभाव से रद किया जाता है। हालांकि, कंपनी ब्राजील के दवा नियामक अनविसा के साथ मिलकर काम करती रहेगी, ताकि कोवैक्सीन की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी हो सके।

हैदराबाद स्थित कंपनी ने ब्राजील सरकार को 15 डालर प्रति डोज (लगभग 1100 रुपये) के हिसाब कोवैक्सीन देने का प्रस्ताव किया था। ब्राजील में इस सौदे में गड़बड़ी के आरोप लगे और जांच शुरू हुई थी। इसके बाद कोवैक्सीन की आपूर्ति पर रोक लगा दी गई थी। हालांकि, भारत बायोटेक ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इन्कार किया था।

बता दें कि हाल ही खबर आई थी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) कोवैक्सीन को आपातकालीन उपयोग की सूची (ईयूएल) में शामिल करने के लिए भारत बायोटेक के डोजियर की समीक्षा कर रहा है। डब्ल्यूएचओ की दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डा. पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि तकनीकी विशेषज्ञ समिति डोजियर की समीक्षा कर रही है। डा. सिंह ने यह भी बताया कि डब्ल्यूएचओ के कोविड-19 वैक्सीन ग्लोबल एक्सेस (कोवैक्स) कार्यक्रम के जरिये भारत को माडर्ना वैक्सीन की 7.5 करोड़ डोज देने की पेशकश की गई है।

क्षेत्रीय निदेशक ने बताया था कि डब्ल्यूएचओ से अब तक फाइजर, एस्ट्राजेनेका, माडर्ना, जानसन एंड जानसन, सिनोवैक और सिनोफार्म की वैक्सीन को ईयूएल मंजूरी मिल चुकी है। भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन को ईयूएल में शामिल करने के लिए डब्ल्यूएचओ के यहां आवेदन किया है। हाल ही में कंपनी ने बताया था कि ईयूएल के लिए जरूरी सभी दस्तावेज और आंकड़े डब्ल्यूएचओ को उपलब्ध करा दिए गए हैं। माना जा रहा है कि अगस्त के अंत तक डब्ल्यूएचओ इस पर फैसला करेगा।

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