Milk Adulterants: मप्र में शुद्ध के लिए युद्ध, फिर भी मिलावटखोरों के हौसले चुस्त

वरुण शर्मा, ग्वालियर। Milk Adulterants दूध में मिलावट को लेकर बीते सप्ताह आई भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) की रिपोर्ट में पैकेट दूध के 37.7 फीसद और खुले दूध के 47 फीसद सैंपल फेल हो गए। जिन तीन राज्यों में दूध की गुणवत्ता सबसे खराब पाई गई उनमें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश शामिल हैं। देश का दिल कहा जाने वाला मध्य प्रदेश दूध व अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट के लिए पहले से ही कुख्यात रहा है। इस रिपोर्ट ने प्रदेश सरकार की चिंता और बढ़ा दी है। ऐसा नहीं है कि सरकार सख्ती नहीं कर रही है। यहां ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और मिलावटखोरों पर कार्रवाई भी जारी है। इन सबके बावजूद इस पर लगाम लगाना मुश्किल साबित हो रहा है। त्योहार के सीजन में ये चुनौति और भी बढ़ गई है। जानते हैं अब तक मिलावटखारों पर क्या कार्रवाई की गई और उसके क्या परिणाम सामने आए..

.मध्य प्रदेश में कई महीनों से दूध में ‘उबाल’ जारी है। यह दूध को कीटाणुरहित करने के लिए नहीं, बल्कि मिलावटखोरों पर की जा रही सख्ती का ‘उबाल’ है। मप्र में दूध में मिलावट के लिए कुख्यात ग्वालियर-चंबल अंचल में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई, लेकिन मिलावट रुकने का नाम नहीं ले रही है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) के देश के 1103 शहरों में किए गए सर्वे में सबसे कम गुणवत्ता के दूध वाले शीर्ष तीन प्रदेशों में मध्य प्रदेश शामिल है। इस सर्वे ने प्रदेश में अशुद्ध, मिलावटी व अमानक दूध की आपूर्ति पर मुहर लगा दी है। मप्र में यह स्थिति तब है जब गत 19 जुलाई से खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ अभियान चला रहा है। इसमें गत 16 अक्टूबर तक 31 कारोबारियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई करते हुए जेल भेजा जा चुका है।

मिलावटी खाद्य पदार्थ निर्माण और विक्रय करने वाले कारोबारियों के खिलाफ 89 एफआइआर दर्ज की गई हैं। दूध में मिलावट के धंधे में प्रदेश ही नहीं, देशभर में ग्वालियर- चंबल संभाग शीर्ष पर है। दूध में डिटर्जेंट- यूरिया की मिलावट तो आम बात हो गई है। ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ अभियान के तहत भिंड, मुरैना और ग्वालियर में सफेद दूध के काले कारोबार को बंद करने का प्रयास तो किया गया, लेकिन मिलावटखोरों के तगड़े नेटवर्क को खत्म करना अब भी चुनौती है। यदि ग्वालियर-चंबल अंचल की बात करें तो इस अभियान में अब तक लगभग 1000 सैंपल, चार पर रासुका और 18 मिलावटखोरों पर एफआइआर दर्ज की गई है। इसके बाद भी मिलावटखोर बाज नहीं आ रहे हैं।

मुरैना में 425 सैंपल लिए, तीन पर रासुका व 18 पर एफआइआर

19 जुलाई से लेकर अभी तक मुरैना में दूध व दुग्ध पदार्थों के 425 नमूने लिए गए हैं। इनमें से चार मिलावटखोरों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत जेल भेजा गया। साथ ही 18 मिलावटखोरों पर थानों में एफआइआर दर्ज कराई गई। हाल यह है कि सिंथेटिक दूध बनाने वाले मिलावटखोरों ने अपने ठिकाने बदल लिए हैं और वे अब ग्रामीण क्षेत्रों में इस काम को कर रहे हैं। अंबाह में वनखंडेश्वर डेयरी पर 19 जुलाई को एसटीएफ व खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसरों ने पहली बड़ी कार्रवाई की थी। कार्रवाई में डेयरी पर सिंथेटिक दूध बनाने का केमिकल व सामग्री मिली थी। प्रशासन ने एक दर्जन से अधिक स्थानों पर छापामार कार्रवाई कर करीब पौने तीन करोड़ का केमिकल, सिंथेटिक दूध बनाने की सामग्री को भी जब्त किया।

भिंड में तीन पर रासुका के प्रस्ताव, 143 नमूने लिए गए

यहां अभी तक खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने 143 सैंपल लिए हैं। इनमें से सिर्फ 16 की रिपोर्ट आई है, जिसमें 13 फेल हो गए यानी 16 में से 13 नमूनों में मिलावट, अशुद्धता पाई गई। 11 स्थानों पर कार्रवाई के दौरान दूध और मावा बनाने में इस्तेमाल करने के लिए रखे घातक केमिकल और डिटर्जेंट पाउडर आदि जब्त किए गए। जिले में नकली दूध का कारोबार करने वालों पर कुल चार एफआइआर दर्ज की गई हैं। एसटीएफ ने लहार में जिन तीन कारोबारियों पर कार्रवाई की थी, उन तीनों के खिलाफ एसपी ने रासुका के लिए प्रस्ताव कलेक्टर को भेजा है, जो अभी लंबित है।

ग्वालियर में 425 सैंपल, एक पर रासुका, सात पर मुकदमे दर्ज

ग्वालियर में जुलाई से अब तक कई मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई हो गई है, लेकिन मिलावटखोरी धड़ल्ले से जारी है। 21 जुलाई से अब तक ग्वालियर में 425 सैंपल लिए जा चुके हैं, जिनमें करीब 80 की रिपोर्ट आ चुकी है। इनमें करीब 40 फीसद दूध मिलावटी, अमानक पाया गया है। मोहना में उम्मेद सिंह नामक आरोपित नकली दूध की फैक्ट्री चलाता पकड़ा गया जिस पर रासुका के तहत कार्रवाई की गई। सात कारोबारियों पर एफआइआर दर्ज कराई है। यहां करीब 35 लाख रुपये का जुर्माना मिलावटखोरों पर किया जा चुका है।

उठ रहा भरोसा

सिंथेटिक दूध की फैक्ट्री, डिटर्जेंट-यूरिया का मावा, चींटियों से लिपटे हुए छैना इस तरह के उदाहरण मिलावटखोंरों के खिलाफ कार्रवाई में सामने आए हैं। इनसे हर कोई शर्मसार हुआ है। आम जनता का भरोसा ही पूरी तरह टूट चुका है। लोगों के पास दुग्ध उत्पादों के विकल्प तो अभी नहीं हैं, लेकिन इस तरह के माहौल में वे हर दूध को शक की दृष्टि से देखने लग गए हैं।

इतने खतरनाक केमिकल मिलाए जा रहे

दूध को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सोडियम पराक्साइड, लाइम स्टोन का पाउडर आदि मिलाने के मामले भी सामने आए हैं। नकली दूध बनाने के मामलों में कास्टिक सोडा, यूरिया, सस्ते डिटर्जेंट मिलाने के मामले भी उजागर हुए हैं। डिटर्जेंट से मिलावटी दूध में झाग बनता है। यही नहीं, मिलावट करने वाले कार्रवाई के दौरान यह तर्क देते हैं कि यह केमिकल वे सफाई के लिए रखते हैं। यह कल्पना ही भयावह है कि जिस केमिकल से वे फर्श व परिसर की सफाई की बात कह रहे हैं, वह दूध में मिलाया जाता है। मावा बनाने में इसी तरह के कई खतरनाक केमिकल उपयोग किए जाते हैं। जाहिर है यह सब भारी मुनाफे के लिए किया जा रहा है।

मिलावट के खिलाफ प्रदेशभर में कार्रवाई जारी है। ग्वालियर जिले में अभी तक की गई कार्रवाई में करीब 425 सैंपल लिए जा चुके हैं। जुर्माना लगाया जा रहा है। दूध और दूध के उत्पाद से लेकर हर तरह के खाद्य पदार्थ में इस तरह की मिलावट की जाती है कि जांच टीम तक हैरत में पड़ जाती है। सेहत से इस तरह का खिलवाड़ भी हो सकता है, विश्वास नहीं होता है।

- पुष्पा पुषाम, अभिहीत अधिकारी, खाद्य

सुरक्षा विभाग, ग्वालियर

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