भारत में ही नहीं बल्कि 16 अन्य देशों में भी हो रहा आयुर्वेद से इलाज

लोकसभा में इस बाबत लिखित जानकारी आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दी। मंत्री ने बताया है कि हंगरी स्विट्जरलैंड क्यूबा ब्राजील नेपाल श्रीलंका पाकिस्तान बांग्लादेश यूएई ओमान सऊदी अरब बहरीन मलेशिया मारीशस सर्बिया और तंजानिया में आयुर्वेद के जरिये चिकित्सा की जा रही है।

Pooja SinghSat, 31 Jul 2021 01:03 AM (IST)
भारत में ही नहीं बल्कि 16 अन्य देशों में भी हो रहा आयुर्वेद से इलाज

नई दिल्ली, प्रेट्र। आयुर्वेद के जरिये केवल भारत में ही बीमारों का इलाज नहीं हो रहा बल्कि 16 अन्य देशों में यह प्राचीन चिकित्सा प्रणाली लोगों को लाभ पहुंचा रही है। लोकसभा में इस बाबत लिखित जानकारी आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दी। मंत्री ने बताया है कि हंगरी, स्विट्जरलैंड, क्यूबा, ब्राजील, नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश, यूएई, ओमान, सऊदी अरब, बहरीन, मलेशिया, मारीशस, सर्बिया और तंजानिया में आयुर्वेद के जरिये चिकित्सा की जा रही है।

यहां पर इस चिकित्सा पद्धति को निरंतर बढ़ावा मिल रहा

इसके अतिरिक्त यूरोपीय यूनियन के सदस्य देश रोमानिया, लातविया और स्लोवेनिया में इस चिकित्सा पद्धति को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है। जल्द ही वहां की सरकारें आयुर्वेद को औपचारिक चिकित्सा पद्धति के रूप में मान्यता दे देंगी। आयुर्वेद से मिलती-जुलती चिकित्सा पद्धति सोवा रिग्पा को भूटान और मंगोलिया में मान्यता मिली हुई है। इस प्रकार से आयुर्वेदिक चिकित्सा का निरंतर विकास हो रहा है।

सरकार ने जैविक डाटा साझा करने के ढांचे को लेकर दिशानिर्देश जारी किए

वहीं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को देश में अनुसंधान समूहों द्वारा तैयार की गई जैविक जानकारी और डाटा को साझा करने की सुविधा के लिए एक सुपरिभाषित ढांटा और मार्गदर्शक सिद्धांत प्रदान करने को लेकर दिशानिर्देश जारी किए।

एक बयान में कहा गया है, 'बायोटेक-प्राइड (डाटा के आदान-प्रदान के माध्यम से अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना) दिशानिर्देश देश भर में विभिन्न शोध समूहों में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाएंगे।' सिंह ने इंडियन बायोलाजिकल डाटा सेंटर (आइबीडीसी) की वेबसाइट भी शुरू की।बयान में कहा गया है, 'दिशानिर्देशों का उद्देश्य जैविक ज्ञान, सूचना और डाटा के आदान-प्रदान को सुविधाजनक और सक्षम बनाने के लिए एक सुपरिभाषित ढांचा और मार्गदर्शक सिद्धांत प्रदान करना है।

बता दें कि कोरोना महामारी के कारण बच्चे लंबे समय से स्कूलों से दूर हैं। उनकी जिंदगी घर की चारदीवारी व मोबाइल स्क्रीन तक सिमट गई है। तीसरी लहर की आशंका भी बनी हुई है। अच्छी बात यह है कि बच्चों पर कोवैक्सीन के ट्रायल के लिए दूसरी डोज देने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। इससे बच्चों के लिए टीका जल्द आने की उम्मीद बढ़ गई है।

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