दुनिया में सबसे खतरनाक मानी जाने वाली सड़कों में से एक है ये किश्‍तवाड़ की सड़क

बलबीर सिंह जम्वाल, किश्तवाड़। जम्मू स्थित किश्तवाड़ में पहाड़ों का सीना चीर कर बीकन (सैन्य विंग) पर्यटकों के लिए रास्ता तैयार करने के बाद उसे पक्का कर रही है। काम पूरा होने पर पाडर इलाके में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। 118 आरसीसी बीकन कई वषों से गुलाबगढ़ से संसारी नाला तक सड़क बनाने में जुटी है। इलाके में सड़क बनाने की बड़ी चुनौती को स्वीकार करते हुए बीकन ने गुलाबगढ़ से संसारी नाला तक पहाड़ों का सीना चीर कर कच्ची सड़क बनाने का काम पूरा कर दिया है। अब इसे पक्का करने का काम किया जा रहा है।सड़क इतनी चौड़ी बनाई गई है कि एक साथ दो गाड़ियां आसानी से एक दूसरे को पार कर सकती हैं। 118 आरसीसी बीकन के लिए सबसे बड़ी चुनौती गांव तैयारी से लेकर शबाश तक की सड़क रही।

यह 11 किलोमीटर की सड़क दुनिया में सबसे खतरनाक मानी जाने वाली सड़कों में से एक है। हालांकि इस रास्ते से गर्मियों के सीजन में बहुत सारे पर्यटक रोमांच के लिए इस खतरनाक सड़क को देखने और वाहन चलाने के लिए आते हैं। 12 फुट चौड़ी यह सड़क चिनाब से करीब एक हजार फुट से ज्यादा ऊंचाई पर है। ऐसे में यहां से जब वाहन गुजरते हैं तो यात्री आंखें बंद कर लेते हैं। अब बीकन ने इस सड़क को छोड़ कर शबाश से सीधा तैयारी तक डबल सड़क बना दी है, जिसका काम अगले तीन चार महीनों में पूरा हो जाएगा। कुल्लू-मनाली से होगा सीधा संपर्क: सड़क बनने से हिमाचल के कुल्लू-मनाली इलाके का संपर्क नजदीक होगा और जो पर्यटक बाया किश्तवाड़ गुलाबगढ़ कैलाड़ पांगी से होकर लेह और लद्दाख जाना चाहता है, उनके लिए भी आसानी होगी।

हिमाचल से कश्मीर वाया किश्तवाड़-संथनटॉप से होकर भी जाने में आसानी होगी। इस सड़क को आप सकरुलर रोड का भी नाम दे सकते हैं क्योंकि जम्मू से वाया पुंछ मुगल रोड होते हुए अनंतनाग वाया संथनटॉप-किश्तवाड़-गुलाबगढ़-कैलाड़ पांगी-लाहौल स्पीति से होते हुए चंडीगढ़ और चंडीगढ़ से आप देश के किसी भी कोने में जा सकते हैं।

पर्यटकों की बढ़ेगी आमद 
118 आरसीसी बीकन के ओसी लेफ्टिनेंट कर्नल शिव बहादुर सिंह का कहना है कि इस सड़क को बनाने के लिए बीकन ने काफी मेहनत की है। जिस दिन संसारी नाला तक सड़क दोहरीकरण हो जाएगी। उस दिन के बाद इलाके में पर्यटकों की चहल-पहल बढ़ जाएगी और इस इलाके की कीमत लोगों को पता चलेगी। उन्होंने बताया कि तैयारी से शबास तक सड़क दोहरीकरण हो चुकी है और उससे आगे चार किलोमीटर का हिस्सा पहले से ही खुला है, जिस पर जल्द ही तारकोल बिछ जाएगी। उससे आगे संसारी नाला की सड़क के तीखे मोड़ों को भी जल्द ही खत्म कर वैकल्पिक रास्ता निकाला जाएगा। इसके लिए हर साल 10 करोड़ से ज्यादा का बजट लग रहा है। गुलाबगढ़ से लेकर संसारी तक हमारी 20 बड़ी मशीनें काम कर रही हैं। ग्रेफ के 50 स्थायी कर्मचारी और करीब 200 श्रमिक रोजाना इस सड़क पर काम कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि दो साल के अंदर गुलाबगढ़ से संसारी नाला तक सड़क दोहरीकरण होने के बाद पूरी तरह ब्लैक टॉप हो जाए।

दुनिया की खतरनाक सड़कें 

अटलांटिक रोड, नॉर्वे
नॉर्वे एक ऐसा देश है, जहां दिन में सूरज दिखे न दिखे लेकिन आधी रात में जरूर नजर आता है। वहीं नॉर्वे के अटलांटिक रोड से गुजरना किसी खतरनाक सफर से कम नहीं है। यह बेहद खतरनाक सड़क है जो 1986 में शुरू हुई थी। इसका निर्माण 64 कंट्री रोड के रूप में किया गया था। अटलांटिक रोड नॉर्वे के समुद्र में कई आइलैंड्स को जोड़ता है, जिसकी लंबाई 5.2 मील है।

गुओलियांग टनल रोड, चीन
यह सुरंगदार हार्इवे यह के ग्रामिणों द्वारा बनाया गया है, जिसे 5 साल में तैयार किया गया। यह सुरंगरूपी सड़क 1,200 मीटर लंबी 13 फुट चौडार्इ और16 फीट ऊंचाई है। तैहांग माउंटेन पर माैजूद इस टनल में जरा सी चूक भारी पड़ सकती है।

व्हाइट रिम ट्रेल
सड़कों के मामले में सबसे अव्वल अमेरिका है। कैननलैंड्स नेशनल पार्क से होकर गुजरने वाली इस खतरनाक 100 मील लंबा रास्ता है। सही मौसम के वक्त इस रास्ते को पार करने में फोर व्हीलर से दो-से तीन दिन का समय लगता है। ग्रीन नदी में उफान के दौरान यहां जाना खतरे से खाली नहीं है।

कोल दे तूरिनी, फ्रांस
इस जगह पर आपको 19 मील लंबी सड़क का सफर तैय करना होगा। इस रोड को लगभग 1 कि.मी ऊंचा रोड भी कहा जाता है। इसमें आपको लगभग 34 खतरनाक मोड़ मिलते हैं, जहां सफर करते समय जान हथेली पर रखनी पड़ती है।

भारत की खतरनाक सड़कें 

पतरातू घाटी रोड
भारतीय राज्य झारखंड में यूं तो पहाड़ी पर बहुत सारे घुमावदार रास्ते मिल जाएंगे लेकिन रामगढ़ से रांची के बीच की 35 किलोमीटर लंबी पतरातू घाटी का घुमावदार मोड़ जानलेवा है। हरे-भरे पेड़ों से घिरी घाटी की इस सड़क से नीचे उतरते हुए दो दर्जन से ज्यादा खतरनाक, घुमावदार मोड़ आते हैं। इस घाटी रास्ते में हरियाली के लिए लगाए गए लगभग 39 हजार पेड़ हैं।

गंगटोक-नाथुला रोड 
नाथुला दर्रा भारत के सिक्किम में डोगेक्या श्रेणी में स्थित है। यह दर्रा हिमालय के अंतर्गत पड़ता है। नाथूला दर्रा भारत के सिक्किम राज्य और दक्षिण तिब्बत में चुम्बी घाटी को जोड़ता है। यह 14 हजार 200 फीट की ऊंचाई पर है। इसी रास्ते से होकर कैलाश मानसरोवर जाया जा सकता है। हाल ही में चीन ने इसका रास्ता खोल दिया है। यह दर्रा प्राचीन रेशम मार्ग (सिल्क रूट) का भी एक ‍हिस्सा है। यह दर्रा गंगटोक के पूर्व की ओर 54 किमी. की दूरी पर स्थित है। गंगटोक से नाथुला दर्रा तक जो रोड जाती है वह विश्‍व की खतरनाक सड़कों में से एक है।

मसूरी रोड 
देहरादून से मसूरी तक का रास्ता ऊंची ऊंची पहाड़ियों से होकर गुजरता है। लगभग 333 किलोमीटर का यह खतरनाक रास्ता हरे भरे वृक्षों से लदा हुआ है। रोमांच की चाह रखने वालों के लिए यह बहुत ही शानदार सफर है।

रोहतांग पास 
हिमाचल प्रदेश में स्थित रोहतांग पास बहुत ही खतरनाक रोड है। यहां किसी भी प्रकार का वाहन चलाना आसान नहीं है। यहां आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती है। पहले रोहतांग को भृगु तुंग कहते थे। मनाली से रोहतांग पास जाना बहुत ही खतरों और रोमांच से भरा है। यहां रोहतांग दर्रा है जो उत्तर में मनाली, दक्षिण में कुल्लू शहर से 51 किलोमीटर दूर यह स्थान मनाली-लेह के मुख्यमार्ग में पड़ता है। पूरा वर्ष यहां बर्फ की चादर बिछी रहती है। यह सड़क मई से नवंबर तक आम तौर पर खुला है। रोहतांग दर्रा समुद्री तल से 4111 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। यह हिमालय का एक प्रमुख दर्रा है।

किलाड़-किश्तवाड़ रोड 
भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर में स्थित किलाड़ से किश्तवाड़ के बीच की सड़क दुनिया की सबसे खतरनाक सड़कों से एक है। यहां कार से जाने का मतलब सीधे-सीधे आत्महत्या करने जैसा है। हिमाचल और जम्मू एवं कश्मीर में स्थित पांगी घाटी में स्थित है यह घाटी मार्ग।

तिरुपति मंदिर रोड़ 
तिरुपति तीर्थ स्थल आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में है। यहां समुद्र तल से 3200 फीट ऊंचाई पर स्थित तिरुमला की पहाड़ियों पर बना श्री वैंकटेश्‍वर मंदिर दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां तक पहुंचने के लिए पहाड़ियों की ओर चढ़ती हुई कई घुमावदार और खतरनाक सड़कों को पार करना होता है तब जाकर कहीं भगवान के दर्शन होते हैं, लेकिन यदि आप जरा भी ध्यान चूके तो सीधे भगवान के पास पहुंच जाएंगे। यहां दुर्घटनाओं का खतरा हर दम बना रहता है।

मुन्नार रोड़ 
मुन्नार को कोच्चि से जोड़ने वाला दर्रा है मुन्नार रोड़, जो लगभग 130 किलोमीटर का है। समुद्र तल से 1700 मीटर के ऊंचाई पर स्थित मुन्नार केरल का एक हिल स्टेशन हैं। यहां रास्ता घुमावदार, सकड़ा और कई जगहों से खड़ा है। नीचे खाई नजर आती है जहां शाम ढलते ही अंधेरा और धुंध छाने लगती है। अगर आपके वाहन में फॉग लाइट नहीं हो तो आप इस सड़क पर नहीं चल सकते हैं। 

माउंट आबू रोड 
माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र पहाड़ी नगर है। समुद्र तल से यह 1220 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहा पहाड़ आरावली पहाड़ियों की श्रंखला का सर्वोच्च शिखर है। यहां जैन और हिन्दू धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थान है।

खारदोंग ला दर्रा 
इस संकीर्ण सड़क के एक किनारे विशालकाय पहाड़ है तो दूसरी तरफ गहरी खाई है। इस सड़क पर सफर करने के पहले एक बार सोच जरूर लें और अपने वाहन को चेक जरूर कर लें, क्योंकि अक्सर यहां बर्फ जमी रहती है, जिससे वाहन चालकों की गाड़ी फिसलती रहती है।

चैंग ला दर्रा 
134 किलोमीटर लंबी इस सड़क को दुनिया की तीसरी सबसे ऊंचाई पर स्थित सड़क का दर्जा प्राप्त है। यह दर्रा लद्दाख में स्थित है, जोकि समुद्र तल से 5360 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां की जलवायु काफी ठंड होती हैं और ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां ऑक्सीजन की कमी होती हैं।

जोजिला दर्रा  
श्रीनगर और लेह हाईवे के बीच में भारत के सबसे खतरनाक मार्गों में से एक ज़ोजिला दर्रा समुद्री तल से 3538 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। यह सड़क बहुत संकरी है और यहां भारी बर्फबारी, जानलेवा हवाएं और लगातार भूस्थलन होता रहता है। थोड़ी बहुत बारिश से ही इस पर कीचड़ जमा हो जाती हैं, जिसके कारण सड़क पर फिसलन बढ़ जाती हैं।

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