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चीन की चालबाजी देख लद्दाख में सेना की एक और डिवीजन तैनात, जवानों को चौकस रहने का निर्देश

नई दिल्ली, जेएनएन। शांति और वार्ता चलने की बातें चाहे जितनी हो रही हों लेकिन चालबाज चीन की तैयारियों के मद्देनजर भारत ने भी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपनी तैयारियां काफी तेज कर दी हैं। मोर्चाबंदी मजबूत करने के लिए सेना ने जहां अपनी एक और डिवीजन तैनात कर दी है वहीं वायुसेना के विमानों से भारीभरकम सैन्य साजोसामान पहुंचाने का काम काफी तेजी से चल रहा है। इसके अलावा लड़ाकू विमानों एसयू-30-एमकेआइ और मिग-29 ने भी शनिवार को कई उड़ानें भर कर सर्द वादियों में सरगर्मी बढ़ा दी है।

अभी तक थीं तीन ड‍िवीजन

पूर्वी लद्दाख में अभी तक तीन डिवीजन थीं। इस चौथी डिवीजन से सेना की ताकत और बढ़ जाएगी। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीमू (लेह) दौरे के दौरान ही डिवीजन के कई अफसरों और जवानों ने नई जिम्मेदारी संभाल ली। सेना की सभी डिवीजन ऑपरेशनल तैयारियों को निरंतर गति दे रही हैं। बता दें कि एक डिवीजन में 10 हजार सैनिक होते हैं।

किसमें कितने जवान

एक सेक्शन 10 जवान और एक प्लाटून में 30 जवान एक कंपनी तीन प्लाटून और लगभग 100 जवान एक बटालियन में करीब 1000 जवान एक ब्रिगेड में तीन बटालियन और 3000 से 3500 जवान एक डिवीजन में तीन ब्रिगेड और 10 से 12 हजार जवान

उत्तर प्रदेश में तैनात थी चौथी डिवीजन

सूत्रों के अनुसार यह चौथी डिवीजन कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश में तैनात थी। डिवीजन के अधिकांश जवान व अधिकारी लेह पहुंच चुके हैं। इनमें से कई स्थानीय मौसम की अनुकूलन प्रक्रिया से गुजर कर पूर्वी लद्दाख में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इस डिवीजन का तोपखाना भी चंद दिनों में लद्दाख पहुंच रहा है। यह पूरी डिवीजन पूर्वी लद्दाख में चीन के सामने मोर्चे पर तैनात रहेगी।

आमतौर पर एक ही डिवीजन रहती है

पांच मई से पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सैन्य तनाव जारी है। गलवन घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प में कर्नल समेत 20 सैन्यकर्मी वीरगति को प्राप्त हुए थे। सूत्रों ने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में पूर्वी लद्दाख में एक ही डिवीजन रहती है, क्योंकि इस क्षेत्र में चीन के साथ 1962 के बाद कभी युद्ध जैसी स्थिति पैदा नहीं हुई थी। कभी कभार दोनों तरफ के सैन्य गश्ती दलों में गतिरोध जरूर पैदा होता रहा है जिसे स्थानीय स्तर पर बातचीत से ही हल किया जाता रहा है।

वायुसेना की भी गतिविधियां तेज

वायुसेना के अग्रिम एयरबेस पर गहमागहमी काफी बढ़ गई है। बेस पर अमेरिकी सी-17 और सी-130जे के साथ वहां रूसी इल्युशिन-76 और एंटोनोव-32 परिवहन विमान जब-तब उड़ान भरते देखे जा रहे हैं। इन परिवहन विमानों का इस्तेमाल दूरस्थ स्थानों से जवानों और उपकरणों को लाकर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तैनाती के लिए किया जा रहा है। रूसी एमआइ-17वी 5 हेलिकॉप्टरों के जरिये सेना और आइटीबीपी के जवानों को अग्रिम इलाकों में पहुंचाया जा रहा है।

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