जानिए क्या होता है Anaemia, भारत के 4 में से एक पुरुष इस बीमारी से है पीड़ित

नेशनल डेस्क, नई दिल्ली। Anemia Symptoms and Causes:  ‘द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ’ में हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है कि भारत में 15 से 54 आयुवर्ग में चार में से एक पुरुष (एक लाख में 23.2 प्रतिशत) किसी न किसी रूप में एनीमिया का शिकार है। इस अध्ययन में छह लाख महिलाओं को भी शामिल किया गया है। उम्र के हिसाब से देखें तो 20 से 34 वर्ष की उम्र के पुरुषों में एनीमिया होने की बहुत कम संभावना रहती है, जबकि इसका प्रसार 50-54 वर्ष की आयुवर्ग में सबसे कम (7.8 प्रतिशत) होता है। युवा सबसे ज्यादा इसकी गिरफ्त में आते हैं।

एनीमिया का मतलब है हीमोग्लोबिन में कमी होना। थकान, ध्यान लगाने में परेशानी होना, सुस्ती बनी रहना आदि इसके लक्षण हैं। विभिन्न आयु वर्गों में इसकी स्थिति भी भिन्न-भिन्न है। कम आयु वर्ग में इसके मामले ज्यादा होते हैं। जब किसी देश की इतनी बड़ी युवा आबादी इस बीमारी से ग्रसित है तो स्वभाविक ही चिंता होने लगती है।

अध्ययन में पाया गया कि एनीमिया वाले पुरुषों में 21.7 प्रतिशत में मध्यम या गंभीर एनीमिया था, जबकि महिलाओं में 53.2 प्रतिशत में मध्यम या गंभीर एनीमिया था। राज्यों के हिसाब से देखें तो बिहार के पुरुषों में एनीमिया का प्रसार सबसे ज्यादा (32.9 प्रतिशत) है। इसके बाद बंगाल (30.46 प्रतिशत), झारखंड (30.30 प्रतिशत), मेघालय (29.13 प्रतिशत) और ओडिशा (28.45 प्रतिशत) का नंबर आता है। पुरुषों में एनीमिया के सबसे कम प्रसार वाले राज्यों में मणिपुर (9.19 प्रतिशत), मिजोरम (9.78 प्रतिशत), नगालैंड (10.23 प्रतिशत), गोवा (10.68 प्रतिशत) और केरल (11.77 प्रतिशत) हैं।

क्या होता है एनीमिया

एनिमिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें रक्त में लाल रक्त कणिकाओं के नष्ट होने की दर उनके निर्माण की दर से अधिक होती है। नतीजतन शरीर में खून की कमी होती है। पुरुषों में एनीमिया थकान, सुस्ती का कारण बनता है। ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है। पुरुषों में हीमोग्लोबिन का स्तर 13.5 और महिलाओं में 12 से कम होने पर शरीर में रक्त की कमी की स्थिति मानी जाती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अनियमित दिनचर्या और खाने में पौष्टिक आहार कम लेना इस बीमारी से ग्रसित होने का सबसे बड़ा कारण है।

यह है विश्व की स्थिति

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनियाभर में 2013 में 1.9 अरब लोग एनीमिया से ग्रसित थे, जो कि वैश्विक आबादी का 27 प्रतिशत है। रिपोर्ट में बताया गया था कि इनमें से 93 प्रतिशत मामले निम्न और मध्यम आय वाले देशों के थे।

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