देश में सहकारी विवि की जरूरत, कंप्यूटरीकरण को सरकार लाएगी विशेष योजना : अमित शाह

cooperative universities केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि सहाकारी क्षेत्र में रुचि रखने वाली कोई संस्था इस तरह के विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए आगे आती है तो उस पर विचार किया जा सकता है।

Monika MinalTue, 07 Dec 2021 11:58 PM (IST)
देश में सहकारी विवि की जरूरत, कंप्यूटरीकरण को सरकार लाएगी विशेष योजना : अमित शाह

नई दिल्ली, प्रेट्र।  केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने मंगलवार को संसद (Parliament) को बताया कि देश में एक सहकारी विश्वविद्यालय की जरूरत है। शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि यदि सहकारी क्षेत्र में रुचि रखने वाली कोई संस्था इस तरह के विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए आगे आती है, तो उस पर विचार किया जा सकता है। मंत्री ने आगे कहा कि सरकार को पुणे स्थित वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान को एक सहकारी विश्वविद्यालय में परिवर्तित करने सहित सहकारी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए अनुरोध मिले हैं।

नौ राज्यों में 44 ऋण सहकारी समितियां बंद करने का आदेश

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में सूचित किया कि सरकार ने नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 44 मल्टी स्टेट ऋण सहकारी समितियों को बंद करने के लिए कार्रवाई की है। शाह ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि कुछ मल्टी स्टेट ऋण सहकारी समितियों के खिलाफ धन की अदायगी न करने की शिकायतें मिली हैं। 

उल्लेखनीय है कि आज लोकसभा में कांग्रेस नेता व सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा राज्यसभा से 12 सांसदों को अलोकतांत्रिक तरीके से निलंबित करने के बाद अब उन पर माफी मांगने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन, ये सांसद किसी भी सूरत में माफी नहीं मांगेंगे। चौधरी मंगलवार को जंतर-मंतर पर दिल्ली में महंगाई हटाओ रैली करने की अनुमति न मिलने पर प्रदेश कांग्रेस द्वारा द्वारा आयोजित विरोध-प्रदर्शन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संसद और सड़क पर जनता के दुख एवं उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ती है, बढ़ती महंगाई के खिलाफ आवाज उठाती है तो भाजपा सरकार हर मोर्चे पर उसे दबाने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जनता के हितों-अधिकारों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर संसद में चर्चा करने को तैयार नहीं और यदि कुछ सांसद अधिकारों के लिए अपनी बात कहते हैं तो उन्हें संसद से निलंबित कर दिया जाता है। 

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