लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच भारतीय कमांडरों की बैठक, रणनीति पर मंथन

चीन के साथ सीमा पर तनातनी के बीच भारतीय सेना ने सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के नेतृत्व में कमांडरों की एक अहम बैठक हुई है। जानें गुरुवार से शुरू इस दो दिवसीय बैठक का क्‍या है मकसद...

Krishna Bihari SinghThu, 17 Jun 2021 09:11 PM (IST)
चीन के साथ सीमा पर तनातनी के बीच भारतीय सेना के कमांडरों की एक अहम बैठक हुई है।

नई दिल्ली, आइएएनएस। चीन के साथ सीमा पर तनातनी के बीच भारतीय सेना ने सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के नेतृत्व में कमांडरों की एक अहम बैठक हुई है। गुरुवार से शुरू इस दो दिवसीय बैठक का मकसद सीमा पर चीन और पाकिस्तान के खतरों का आकलन करना है ताकि सीमा पर इन देशों के साथ अभियान संबंधी स्थिति को सुधारा जा सके और अहम नीतिगत फैसले लिए जा सकें।

कमांडरों की इस कांफ्रेंस में सेना प्रमुख के अलावा सेना के उप प्रमुख, सभी कमांडर, सेना मुख्यालय के पीएसओ और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सेना के सर्वोच्च अधिकारी चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी की एलएसी में पूर्वी लद्दाख के विवादित स्थलों गोगरा, हाट स्पि्रंग्स, डेमचोक और डेपसांग की स्थितियों को लेकर विचार-विमर्श होना है। चीन ने सैन्य बलों, गोला बारूद और हथियारों की तैनाती पश्चिमी लद्दाख के चीन सेक्टरों में बढ़ा दी है।

वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से लगे पश्चिमी (लद्दाख), मध्य (उत्तराखंड, हिमाचल) और पूर्वी (सिक्किम, अरुणाचल) सेक्टरों में चीनी दखल बढ़ा है। पूर्वी लद्दाख की गलवन घाटी में चीनी सैनिकों से हुए भीषण संघर्ष के एक साल बाद चीन अब भी एलएसी पर पैर जमाकर बैठा हुआ है। इसीलिए भारत ने भी भविष्य में किसी भी कड़े फैसले के लिए तैयारी जारी रखी है। विवादों को सुलझाने के लिए भारत और चीन के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है।

वहीं चीन को अप्रत्यक्ष रूप से संदेश देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत विश्व शांति का पुजारी है, लेकिन वह किसी भी आक्रामण का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है और सीमावर्ती इलाकों में शांति को किसी तरह के गंभीर खतरे के प्रतिकूल प्रभाव होंगे। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा निर्मित 12 सामरिक रूप से अहम सड़कों को देश को समर्पित करते हुए राजनाथ ने कहा, 'हम विश्व शांति चाहते हैं, लेकिन कोई अगर हमें आक्रामक रुख दिखाता है तो हम जवाब देंगे।'

रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि नई सड़कों के निर्माण से न सिर्फ कनेक्टिविटी में सुधार होगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सैनिकों के तेजी से मूवमेंट में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इन सड़कों का निर्माण आत्मनिर्भर भारत के मंत्र को रेखांकित करता है और ये प्रधानमंत्री मोदी की एक्ट ईस्ट पालिसी का हिस्सा हैं। रक्षा मंत्री ने बताया कि 2013 से बीआरओ के बजट में कई गुना वृद्धि हुई है और आज यह 11 हजार करोड़ रुपये है। 2014 से बीआरओ ने सीमा पर रिकार्ड 4,800 किलोमीटर सड़कें विकसित की हैं।

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.