सेहत बिगाड़ने के साथ जेब भी जला रहा प्रदूषण, इन राज्यों को हुआ लाखों करोड़ का नुकसान

हर विकासशील देश की तरह ही भारत में प्रदूषण बढ़ने से कई तरह के खतरे बढ़ रहे हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड इंवायरनमेंट के विवेक चट्टोपध्याय के मुताबिक प्रदूषण आपकी उत्पादकता को प्रभावित करता है क्योंकि अगर आप सेहतमंद नहीं होंगे तो कार्यक्षेत्र में बेहतर नहीं कर पाएंगे।

TilakrajMon, 29 Nov 2021 02:39 PM (IST)
घर के भीतर प्रदूषण कम हुआ है

नई दिल्ली, अनुराग मिश्र। अगर आप उत्तर प्रदेश या बिहार में रहते हैं तो प्रदूषण आपकी सेहत बिगाड़ने के साथ ही आपकी जेब भी ज्यादा जला रहा है। रिसर्च जर्नल लांसेट में छपी एक रिसर्च के मुताबिक प्रदूषण के चलते जीडीपी को होने वाला नुकसान राज्यों के हिसाब से बदलता रहता है। जैसे कम प्रति व्यक्ति जीडीपी वाले राज्य उत्तर प्रदेश (जीडीपी का 2.15 फीसद ) , बिहार (1.95 फीसद ), राजस्थान (1.70 फीसद ), मध्यप्रदेश (1.70 फीसद ) और छत्तीसगढ़ (1.55 फीसद ) में राज्य की जीडीपी को ज्यादा नुकसान हो रहा है।

ज्यादा प्रति व्यक्ति जीडीपी वाले राज्यों को कम नुकसान हुआ है। जैसे पंजाब को 1.52 फीसद और उत्तराखंड को 1.50 फीसद। राज्यों की जीडीपी को होने वाला यह नुकसान .67 से 2.15 फीसद के बीच है। वहीं दिल्ली (62 डॉलर) और हरियाणा (53.8 डॉलर) में प्रति व्यक्ति आर्थिक नुकसान ज्यादा है। । यह अध्ययन इंडियन स्टेट लेवल डिजीज बर्डन इनिसिएटिव की ओर से किया गया है।

देश में वायु प्रदूषण से हर साल 16.7 लाख लोगों की मौत होती है और अर्थव्यवस्था को करीब 2.6 लाख करोड़ रुपये (जीडीपी का 1.4 फीसद) का नुकसान होता है। यानी वायु प्रदूषण जीवन और जेब दोनों पर भारी पड़ रहा है।

पूरे देश की समस्या बना प्रदूषण

सेंटर फॉर साइंस एंड इंवायरनमेंट के विवेक चट्टोपध्याय के मुताबिक प्रदूषण आपकी उत्पादकता को प्रभावित करता है क्योंकि अगर आप सेहतमंद नहीं होंगे तो कार्यक्षेत्र में बेहतर नहीं कर पाएंगे। विवेक कहते हैं कि वायु प्रदूषण को घटाने के लिए सरकार अगर सही कदम उठाए और इसको नियंत्रित कर सकें तो इससे जीडीपी को होने वाले नुकसान को काफी कम किया जा सकता है।

जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ और इंटरनेशनल फोरम फार इंवायरमेंट सस्टेनेंबल एंड टेक्नोलॉजी के सीईओ चंद्र भूषण के मुताबिक दिल्ली में काफी प्रदूषण होता है। खासकर सर्दियों में लेकिन प्रदूषण पूरे देश की समस्या है। मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में भी काफी प्रदूषण रहता है। वहीं लखनऊ, आगरा, पटना और गंगा के मैदानी इलाकों के ज्यादातर शहरों में प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं। यहां तक की गांव में भी यह समस्या है। इसलिए बात अब इन सारी जगहों की होनी चाहिए न कि सिर्फ दिल्ली और शहरों की।

वायु प्रदूषण के चलते हुई इतनी बीमारियां

नेशनल हेल्थ एकाउंट डेटा के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 2019 में हेल्थकेयर पर होने वाला खर्च लगभग 103.7 बिलियन डॉलर का रहा। इसमें लोगों को होने वाली बीमारियों में वायु प्रदूषण के चलते होने वाली बीमारियां लगभग 11.5 फीसदी रहीं। इन पर होने वाला खर्च लगभग 11.9 बिलियन डॉलर रहा । मेडिकल जनरल लांसेट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में लगभग एक करोड़ साठ लाख लोगों को वायु प्रदूषण के चलते अपनी जान गंवानी पड़ी ।

97 फीसद आबादी चपेट में

हर विकासशील देश की तरह ही भारत में प्रदूषण बढ़ने से कई तरह के खतरे बढ़ रहे हैं। 2017 मे देश की 97 फीसद आबादी प्रदूषण (पीएम 2.5) की चपेट में थी।

घर के अंदर प्रदूषण कम हुआ है

घर के भीतर प्रदूषण कम हुआ है। रिपोर्ट कहती है कि 1990 से 2019 के बीच घर के भीतर प्रदूषण 64 प्रतिशत कम हुआ है लेकिन घर के बाहर का प्रदूषण 115 फीसद बढ़ गया है।

ये हैं समाधान

विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदूषण कम करना है तो ईंधन सेक्टर में कोयले के प्लांट कम करने होंगे और अक्षय ऊर्जा स्रोत (पवन और सौर ऊर्जा) को बढ़ावा देना होगा। वहीं परिवहन में भी बदलाव करते हुए बैटरी चालित वाहनों को बढ़ावा देना होगा। वहीं कृषि सेक्टर में जुताई की खेती को प्रोत्साहित करना होगा जिससे पराली जलाने की जरूरत ही न पड़े।

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