गलवन झड़प के एक साल बाद भी नहीं बदला चीन का अड़ियल रुख, जानें जवाब देने के लिए कैसी है भारत की तैयारी

भारत ने जहां इस क्षेत्र में 50 से 60 हजार जवान तैनात कर रखे हैं वहीं उसने अपना आधारभूत ढांचा भी बेहतर किया है। सेना के सुगम आवागमन के लिए आल वेदर सड़कों का जाल बिछाया गया है।

Neel RajputTue, 15 Jun 2021 08:21 AM (IST)
गलवन में 20 भारतीय सैनिकों ने पाई थी वीरगति, चीन ने अपने चार सैनिक मारे जाने की बात स्वीकारी

नई दिल्ली, आइएएनएस। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गलवन घाटी में चीनी सैनिकों के साथ भारतीय जवानों की खूनी झड़प का एक साल पूरा होने के बावजूद भारत और चीन के बीच सैन्य विवाद का निपटारा नहीं हो पाया है। अड़ियल चीन अभी भी नियंत्रण रेखा पर कब्जा जमाए बैठा है। दोनों देशों के बीच 11 दौर की सैन्य वार्ता हो चुकी है लेकिन सीमा पर शांति कायम होने के आसार दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे। संतोष की बात बस यही है कि दोनों देशों ने इस मसले का हल शांतिपूर्ण तरीके से निकालने पर सहमति जताई है।

भारत के 50-60 हजार जवान तैनात

एक साल से अधिक समय से जारी विवाद के दौरान भारत की कोशिश यही रही कि वह अपने प्रतिद्वंद्वी का सामना बेहतर तैयारी के साथ करे। भारत ने जहां इस क्षेत्र में 50 से 60 हजार जवान तैनात कर रखे हैं वहीं उसने अपना आधारभूत ढांचा भी बेहतर किया है। सेना के सुगम आवागमन के लिए आल वेदर सड़कों का जाल बिछाया है। सर्दियों में जब यहां का तापमान शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस तक नीचे पहुंच जाता है तब भी जवानों की संख्या में कोई कटौती न कर उन्हें हर हालात से निपटने के लिए तैयार रखा है।

चीनी फौज की गतिविधियों पर पैनी नजर

पिछले महीने इस क्षेत्र के दौरे पर आए सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने कहा था कि हमारे जवान एलएसी पर चीनी फौज (पीएलए) की गतिविधियों पर सतर्कता से नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने चीन को स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देशों के मनमाफिक सेनाओं के पीछे हटने पर ही सीमा पर सैन्य तनाव कम होने की बात मानी जाएगी। उन्होंने कहा कि पैंगोंग झील के पास से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटने के बाद भी हमारी निगरानी में कोई कमी नहीं आई है। हम अप्रैल 2020 की पूर्व स्थिति बहाल होने की बात चाहते हैं।

दोनों देशों में भरोसे के कमी

सेना प्रमुख ने कहा कि चीन ने इस क्षेत्र में अपने 50 से 60 हजार सैनिक तैनात कर रखे हैं। भारत ने भी जवाब में अपने इतने ही जवान तैनात (मिरर डेप्लायमेंट) कर रखे हैं। उन्होंने कहा कि पैंगोंग झील इलाके से दोनों सेनाओं के पीछे हटने और 11 दौर की सैन्य वार्ताओं के बाद भी दोनों देशों के किसी समाधान पर पहुंचने के आसार नहीं दिख रहे हैं। फिर भी हम हाट स्प्रिंग, गोगरा और देपसांग के टकराव वाले बिंदुओं के लिए रास्ता निकालने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसे की बहुत कमी है लेकिन यह बात कोई रास्ता निकालने में आड़े नहीं आनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल गलवन घाटी में 15 जून को दोनों देशों के सैनिकों में हुए खूनी झड़प में कमांडिंग आफिसर कर्नल संतोष बाबू समेत 20 भारतीय सैनिकों ने वीरगति पाई थी। इस घटना में चीन ने भी अपने चार सैनिक मारे जाने की बात काफी बाद में स्वीकार की थी। हालांकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने इस झड़प में करीब 40 चीनी सैनिकों के मारे जाने की बात कही थी। इस मुठभेड़ के बाद युद्ध जैसी स्थिति बनने पर पैट्रोल प्वाइंट 14 को नो पैट्रोल प्वाइंट घोषित कर दिया गया। दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे से 1.5 किमी पीछे हट गईं और यहां एक बफर जोन बनाया गया। इसी तरह अगस्त महीने में एक बार फिर पैंगोंग झील पर युद्ध जैसी स्थिति बन गई जब भारतीय सैनिकों ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कुछ पहाड़ियों पर कब्जा कर चीनी सैनिकों पर बढ़त हासिल कर ली।

मौजूदा समय में दोनों सेनाएं पूरी तैयारी के साथ मोर्चे पर मुस्तैद हैं। चीन ने मानव रहित विमानों (यूएवी) से क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी है

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