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Children Day 2019: भारत में हर घंटे निमोनिया छीन लेती है 14 बच्चों की सांसें

नई दिल्ली, [जागरण स्पेशल]। गुरुवार को बाल दिवस है। इस दिन हम अपने नौनिहालों की हर दिक्कत-दुश्वारी को दूर करके उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेरने का संकल्प लेते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की संयुक्त रूप से आई एक रिपोर्ट बताती है कि 2018 के दौरान भारत में पांच साल से कम आयु के 14 से अधिक बच्चों ने हर घंटे दम तोड़ा। फाइटिंग फॉर ब्रेथ इन इंडिया नामक इस अध्ययन में सेव द चिल्ड्रेन, यूनिसेफ और एवरी ब्रेथ काउंट्स ने संयुक्त रूप से देश-दुनिया की इस बदरंग तस्वीर को दिखाया है।

2018 में 1.27 लाख बच्चे निमोनिया के चलते देश भर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौतें हुई हैं। वहीं, पूरे विश्व में 8.0 लाख बच्चों की निमोनिया के चलते मौतें हुईं हैं।

सेव द चिल्ड्रेन के डिप्टी डायरेक्टर ऑफ हेल्थ एंड न्यूट्रिशन डॉ राजेश खन्ना ने बताया कि भारत में हर चार मिनट पर एक बच्चे (पांच साल से कम आयु के) की निमोनिया दम घोंट देती है। कुपोषण और प्रदूषण इसके दो प्रमुख कारण हैं। निमोनिया से होने वाली आधी मौतें तो सिर्फ विकट कुपोषण के चलते होती हैं जबकि इनडोर प्रदूषण की 22 फीसद और आउटडोर वायु प्रदूषण की हिस्सेदारी 27 फीसद है।

यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक हेनरिएट्टा ने बताया कि हर दिन दुनिया भर में दो हजार से ज्यादा बच्चे निमोनिया का शिकार बनते हैं। इस रोग को रोका जा सकता है। इसका इलाज संभव है। वैश्विक दृढ़ इच्छाशक्ति और निवेश बढ़ाकर इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई जीती जा सकती है।

शीर्ष पांच में भारत

दुनिया में निमोनिया से मरने वाले बच्चों की कुल संख्या में पांच देशों की आधी हिस्सेदारी है। दुर्योग से भारत इन पांच में शीर्ष दूसरा देश है। यहां प्रत्येक एक हजार बच्चों के जन्म पर पांच की मौत निमोनिया के चलते पांच साल के भीतर हो जाती है। 2017 में निमोनिया के चलते काल-कवलित होने वाले बच्चों का फीसद 14 था। यह बच्चों के मरने की दूसरी सबसे बड़ी वजह रही। भारत सरकार प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य के मद में 1153 रुपये (16 डॉलर) खर्च करती है।

देश, निमोनिया से मौतें (2018)

नाइजीरिया, 1.62 लाख

भारत, 1.27 लाख

पाकिस्तान, 58 हजार

कांगो, 40 हजार

इथियोपिया, 32 हजार

अंधेरे में भविष्य

जिन नौनिहालों को दुनिया का भविष्य कहा जाता है, उनका खुद का भविष्य घने अंधेरे में है। बच्चों में संक्रमण के चलते होने वाली मौतों में भी निमोनिया अव्वल है। हर साल विश्व में पांच साल से कम आयु के आठ लाख बच्चे इस रोग के चलते काल के गाल में समाने को विवश हैं। यानी हर रोज 2000 बच्चे। 2018 में किसी अन्य कारक की तुलना में निमोनिया से सर्वाधिक बच्चे मारे गए। 4.37 लाख बच्चे डायरिया के शिकार हुए तो 2.72 लाख मलेरिया से मारे गए।

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