Archaeologist: इतिहास से है गहरा लगाव तो यहां संवारे अपना करियर, 12वीं के बाद ढ़ेरों कोर्स

नई दिल्ली, जेएनएन। रामजन्म भूमि विवाद पर आए सुप्रीम कोर्ट के हालिया ऐतिहासिक फैसले में एएसआइ यानी भारतीय पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट का अहम योगदान रहा। पांच जजों की बेंच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचने में यह रिपोर्ट निर्णायक साबित हुई। ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्व के स्थलों की खोज, उपलब्ध-प्राप्त साक्ष्यों के जरिए उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाना पुरातत्वविदों का मुख्य काम होता है। इसके लिए इस क्षेत्र में रुचि और विशेषज्ञता की जरूरत होती है। अगर आप भी इस फील्ड में करियर बनाने के इच्छुक हैं, तो पुरातत्व विज्ञान में हायर स्टडी करके अपने कदम बढ़ा सकते हैं...

क्या है आर्कियोलॉजी?

अयोध्या रामजन्म भूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआइ) फिर खबरों में है। केस के निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए सर्वोच्च अदालत ने एएसआइ की विवादित स्थल की उत्खनन रिपोर्ट को अहम सबूत माना। आर्कियोलॉजी को हिंदी में पुरातत्व विज्ञान कहते हैं, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है प्राचीन स्मारकों, अवशेषों का ज्ञान। इसी के तहत प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की वैज्ञानिक नजरिए से जांच-परख की जाती है। इस विधा के जानकारों को आर्कियोलॉजिस्ट यानी पुरातत्वविज्ञानी कहा जाता है। 

ऐसे काम करते हैं आर्कियोलॉजीस्ट

आर्कियोलॉजिस्ट का काम इतिहास को खोजना और संरक्षित करना होता है। साथ ही, ये विशेषज्ञ ऐतिहासिक वस्तुओं और सभ्यताओं की खोज से लेकर संग्रहालयों के संरक्षण का काम भी करते हैं। ताजमहल, लाल किला, अजंता-एलोरा और खजुराहो जैसे ऐतिहासिक स्थल, जिसे देखने के लिए हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं, उन्हें सहेजने का काम भी आर्कियोलॉजिस्ट ही करते हैं। ऐतिहासिक-सांस्कृतिक धरोहरों की खोज और संरक्षण, म्यूजियम्स, आर्ट गैलरीज के बढ़ते ट्रेंड को देखते हुए आर्कियोलॉजी के क्षेत्र में आपके लिए भी करियर की बहुत संभावनाएं हैं। अगर आपकी रुचि अतीत यानी प्राचीन कला या वास्तुशास्त्र को जानने में है, तो आर्कियोलॉजी/हेरिटेज से संबंधित कोर्स करके आकर्षक करियर बना सकते हैं।

बढ़ती संभावनाएं

भारत में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। देशभर में स्थित ऐतिहासिक धरोहरों को देखने के लिए घरेलू सैलानियों के अलावा हर साल लाखों विदेशी पर्यटक आते हैं। केंद्र सरकार घरेलू पर्यटन उद्योग को लगातार बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। यूनेस्को की ओर से देश की 37 धरोहरों को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स का दर्जा मिला हुआ है। जाहिर है देश के ये ऐतिहासिक-सांस्कृतिक धरोहर विदेशी मुद्रा भंडार का एक बड़ा जरिया हैं। इसलिए सरकारें-पुरातत्व विभाग स्मारकों, किलों, महलों और मंदिरों के अलावा म्यूजियम्स में बेशकीमती पांडुलिपियों, मूर्तियों, सिक्कों व पेंटिंग्स के रखरखाव पर काफी जोर दे रही हैं। यही कारण है कि हाल के वर्षों में आर्ट रेस्टोरर, हेरिटेज कंजर्वेटर और हेरिटेज मैनेजर्स की मांग भी काफी बढ़ी है। दरअसल, आर्कियोलॉजी एक बहुआयामी फील्ड है, इसलिए खोज और पुरातत्व उत्खनन से लेकर सांस्कृतिक/ऐतिहासिक महत्व के धरोहरों को सहजने तक में इनकी जरूरत देखी जा रही है। इनकी भूमिका कमोबेश डॉक्टर की तरह ही है, जो म्यूजियम ऑब्जेक्ट्स की समस्या को मालूम कर अपनी विशेषज्ञता और स्किल के आधार पर उसका ट्रीटमेंट करते हैं, ताकि ये आगे भी सुरक्षित बने रहें।

कोर्स एवं योग्यता

आर्कियोलॉजी में ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी स्तर के कोर्स संचालित किए जाते हैं। बारहवीं में इतिहास की पढ़ाई करने वाले ग्रेजुएशन में आर्कियोलॉजी पढ़ सकते हैं। इतिहास विषय में ग्रेजुएशन और पीजी करके भी इस फील्ड में एंट्री पाई जा सकती है। स्नातक स्तर पर कई संस्थानों और कॉलेजों में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा इन आर्कियोलॉजी, म्यूजियोलॉजी के रूप में भी कोर्स ऑफर हो रहे हैं, जिसे किसी भी बैकग्राउंड के ग्रेजुएट कर सकते हैं।

करियर के बेहतरीन मौके

आर्कियोलॉजी/हेरिटेज मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद मुख्य रूप से शिक्षण, अनुसंधान, उत्खनन और संग्राहलय के क्षेत्र में करियर के अच्छे मौके उपलब्ध हैं। यह कोर्स करके आप नई दिल्ली स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआइ) और राज्यों में स्थित इनके क्षेत्रीय केंद्रों में आर्कियोलॉजिस्ट या सहायक आर्कियोलॉजिस्ट के रूप में नौकरी हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा, आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम्स, नेशनल और स्टेट लेवल के म्यूजियम्स, आर्ट गैलरीज, कंजर्वेशन लैब्स जैसी जगहों पर भी अपने लिए जॉब तलाश सकते हैं। 50 हजार रुपये तक असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट या ऑर्ट रेस्टोरर को इस फील्ड में सैलरी मिलती है।

इस पृष्ठभूमि के पेशेवर लोगों को विदेश मंत्रालय के हिस्टॉरिकल डिवीजन, शिक्षा मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार, इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टॉरिकल रिसर्च और प्लानिंग कमीशन की नियुक्तियों में भी प्राथमिकता दी जाती है। यूनेस्को और यूनिसेफ जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी काफी अच्छी संभावनाएं हैं। वर्तमान में इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट ऐंड कल्चर, इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट, कल्चर ऐंड हेरिटेज आदि में बड़ी संख्या में ऐसे प्रोफेशनल्स अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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