दादरा-नगर हवेली उपचुनाव में लगी शिवसेना की लाटरी, कलाबेन 51, 269 मतों से विजेता

उपचुनाव घोषित होने पर शिवसेना ने डेलकर की पत्नी कलाबेन डेलकर को उम्मीदवार बनाया था। कलाबेन 118035 वोट लेकर 51269 मतों से विजयी रहीं। डेलकर के निधन से उपजी सहानुभूति की लहर भी कलाबेन के ही पक्ष में थी। ऐसे में वह लोस में एक सीट बढ़ाने में सफल रहीं।

Vijay KumarTue, 02 Nov 2021 09:35 PM (IST)
हालांकि कलाबेन भी शिवसेना उम्मीदवार बनकर अपने उद्देश्य तक पहुंचने में सफल रही है।

 ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई : केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली में शिवसेना उम्मीदवार कलाबेन जीत शिवसेना के लिए लाटरी मानी जा रही है। इससे लोकसभा में उसे अपनी एक सीट बढ़ाने का मौका मिल गया है।दादरा एवं नगर हवेली में वहां के निर्दलीय सांसद मोहन डेलकर के निधन से खाली हुई सीट पर उपचुनाव हुए थे। मोहन डेलकर ने इसी वर्ष 22 फरवरी को मुंबई के एक होटल में आत्महत्या कर ली थी। उनके निधन से खाली हुई सीट पर उपचुनाव घोषित होने पर शिवसेना ने डेलकर की पत्नी कलाबेन डेलकर को शिवसेना की उम्मीदवारी देने का प्रस्ताव रखा था।

मोहन डेलकर सात बार चुनकर लोकसभा में जा चुके थे

कलाबेन ने यह प्रस्ताव मानकर शिवसेना के टिकट पर चुनाव लड़ा। 30 अक्तूबर को हुए मतदान में कलाबेन 1,18,035 वोट लेकर 51,269 मतों से विजयी रहीं। भाजपा उम्मीदवार महेश गावित 66,766 मतों के साथ दूसरे एवं कांग्रेस उम्मीदवार महेश ढोडी 6,150 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। बता दें कि कलाबेन के पति मोहन डेलकर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित इसी सीट से सात बार चुनकर लोकसभा में जा चुके थे।

डेलकर के निधन से उपजी सहानुभूति लहर भी साथ थी

दादरा एवं नगर हवेली की इस सीट पर कलाबेन की जीत शिवसेना के लिए लाटरी जैसी मानी जा रही है। क्योंकि डेलकर के निधन से उपजी सहानुभूति लहर भी कलाबेन के ही पक्ष में थी। ऐसे में शिवसेना ने बड़ी चतुराई से उन्हें शिवसेना की उम्मीदवारी प्रस्तावित कर लोकसभा में अपनी एक सीट बढ़ाने में सफलता पाई।

जांच मुंबई पुलिस से करवाने का दबाव डाला जा रहा था

बता दें कि मुंबई में मोहन डेलकर की आत्महत्या के बाद शिवसेना ने उनकी मौत को मुद्दा बनाते हुए भाजपा को घेरने की कोशिश की थी। मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने अपने एक पत्र में खुलासा किया है कि उन पर इस मामले की जांच मुंबई पुलिस से करवाने का दबाव डाला जा रहा था। शिवसेना ऐसा करके भाजपा पर दबाव के साथ - साथ दादरा एवं नगर हवेली की जनता में अपनी पैठ बढ़ाना चाहती थी। कलाबेन द्वारा शिवसेना की उम्मीदवारी स्वीकार ने से वह काफी हद तक अपने उद्देश्य में सफल रही है।

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