Maharashtra Politics: केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर भाजपा ने अमानवीय चेहरा दिखायाः शिवसेना

Maharashtra Politics सामना ने संपादकीय में कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकार के अधिकारों का हनन कर रही है। राज्यों को काम नहीं करने देना चाहती। खासकर जिन राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री नहीं हैं वहां तो केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा निरंकुश आतंक फैलाया जा रहा है।

Sachin Kumar MishraMon, 18 Oct 2021 08:42 PM (IST)
संजय राउत और उद्धव ठाकरे। फाइल फोटो

मुंबई, राज्य ब्यूरो। शिवसेना ने कहा है कि केंद्रीय एजेंसियों द्वारा महाविकास अघाड़ी सरकार के नेताओं को निशाना बनाया जाना तो समझ में आता है, लेकिन उनके रिश्तेदारों को परेशान करके भाजपा ने अपना अमानवीय चेहरा दिखा दिया है। शिवसेना ने यह बात अपने मुखपत्र सामना में संपादकीय के जरिए कही है। सोमवार को प्रकाशित संपादकीय में सामना ने कहा है कि केंद्र सरकार राज्य सरकार के अधिकारों का हनन कर रही है। राज्यों को काम नहीं करने देना चाहती। खासकर जिन राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री नहीं हैं, वहां तो केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा निरंकुश आतंक फैलाया जा रहा है। भाजपा द्वारा सीबीआइ, ईडी, आइटी व एनसीबी का इस्तेमाल अपनी दुकान की तर्ज पर किया जा रहा है। ईडी, सीबीआइ की आड़ में ‘शिखंडी’ की तरह जो राजनीति ये लोग कर रहे हैं, इस बार दशहरे की रैली में उसका बुर्का ही उद्धव ठाकरे ने फाड़ दिया है। ठाकरे ने आह्वान किया है कि ‘हिम्मत हो तो मर्द की तरह सामने आओ’। अब भाजपा को इस आह्वान को स्वीकार करने की मर्दानगी दिखानी चाहिए।

शिवसेना की भाजपा को सलाह

सामना लिखता है कि महाविकास अघाड़ी के मंत्रियों पर, नेताओं पर हमला करना समझ में आता है। परंतु उनके परिजनों को भी प्रताड़ित करके भाजपा वाले अपना अमानवीय चेहरा दिखा रहे हैं। ‘पल्लू’ की आड़ में नई गंदी राजनीति चल रही है। पर्दे के पीछे पहले बहुत कुछ होता था। अब परदे की बजाय ‘पल्लू’ का इस्तेमाल भाजपा ने शुरू किया है। हमारे देश में ये नई परंपरा भाजपा ने शुरू की है। शिवसेना के अनुसार, भाजपा को महाराष्ट्र की सत्ता गंवाए दो साल बीत गए हैं। अब उस सदमे से उन्हें उबरना चाहिए। सामना ने भाजपा को सलाह दी है कि जो हुआ है, उसे स्वीकार करके आगे बढ़ना चाहिए।

जनता का विश्वास खो चुका है विपक्षः सामना

सामना के अनुसार, आमतौर पर किसी सरकार के बारे में कहा जाता है कि वह जनता का विश्वास खो चुकी है, लेकिन यहां तो विपक्ष ही जनता का विश्वास खो चुका है। महाराष्ट्र में विपक्ष के नेताओं की अच्छी परंपरा रही है। श्रीपाद अमृत डांगे, उद्धव राव पाटिल, दत्ता पाटिल, मनोहर जोशी, गोपीनाथ मुंडे, एकनाथ खडसे, शरद पवार भी विपक्ष के नेता थे। सिर्फ निरंकुश और बेबुनियाद आरोप लगाना और सरकार को गिराने की तारीखों का एलान करना विपक्ष के नेताओं का काम नहीं होता है। सरकार की जितनी मियाद है, उतनी मियाद सरकार को मिलेगी ही। सरकार के जीवन की डोर तुम्हारे हाथ में नहीं है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर आरोप लगाते हुए सामना लिखता है कि केंद्र के भाजपा प्रमुखों को ‘विपक्ष’, ‘विरोधी सुर’, संसदीय लोकतंत्र की संकल्पना ही स्वीकार नहीं है। परंतु महाराष्ट्र में लोकतंत्र की परंपरा है। इसलिए विपक्ष को अपना कार्य निडर होकर करते रहना चाहिए, ऐसी हमारी सोच है।

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