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Sushant Singh Rajput Case: सुशांत का परिवार ही सहयोग नहीं कर रहाः परमबीर सिंह

Sushant Singh Rajput Case: सुशांत का परिवार ही सहयोग नहीं कर रहाः परमबीर सिंह
Publish Date:Mon, 03 Aug 2020 08:41 PM (IST) Author: Sachin Kumar Mishra

राज्य ब्यूरो, मुंबई। Sushant Singh Rajput Case: मुंबई पुलिस के मुखिया परमबीर सिंह का कहना है कि सुशांत सिंह राजपूत का परिवार ही मुंबई पुलिस से अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहा है। मुंबई पुलिस पर लग रहे चौतरफा आरोपों के बीच सोमवार को पहली बार मुंबई पुलिस का कोई आला अधिकारी उनका जवाब देने के लिए मीडिया के सामने आया। रविवार को मुंबई पहुंचे पटना पुलिस के एसपी विनय तिवारी को मुंबई में क्वारंटाइन किए जाने के बाद से मुंबई पुलिस और मुंबई महानगरपालिका दोनों पर हमले तेज हो गए हैं। सुशांत के परिवार ने मुंबई पुलिस की जांच की दिशा सही न होने का आरोप लगाते हुए ही पटना के राजीव नगर थाने में रिया चक्रवर्ती सहित सात लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है।

सोमवार को इन्हीं आरोपों का जवाब देते हुए परमबीर सिंह ने कहा कि मुंबई पुलिस की जांच बिल्कुल सही दिशा में और प्रोफेशनल तरीके से चल रही है। उनके अनुसार 16 जून को मुंबई पुलिस ने उनकी तीनों बहनों सहित परिवार के अन्य लोगों का बयान दर्ज किया था। उसके बाद भी मुंबई में रहने वाली एक बहन को बयान देने के लिए बुलाया था, लेकिन वह दिल्ली चली गई थीं। उसके बाद भी मुंबई पुलिस उनसे बार-बार संपर्क करने की कोशिश करती रही, लेकिन उनकी तरफ कोई जानकारी नहीं मिल पाई कि वह कब आएंगी। सिंह के अनुसार, मुंबई पुलिस चाहती है कि सुशांत के परिवार के लोग मुंबई पुलिस के संपर्क में आएं और जो कुछ भी कहना हो, उसी से कहें।

परमबीर सिंह कहते हैं अब तक की छानबीन में पुलिस को पता चला है कि अपनी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की आत्महत्या के बाद उससे अपना नाम जोड़े जाने से सुशांत काफी असहज थे। जबकि दिशा से उनकी मुलाकात सिर्फ एक ही बार हुई थी। दिशा की मौत के बाद उन्होंने अपने एक वकील को मैसेज करके पूछा था कि ये दिशा कौन है ? परमबीर ने इस बात का भी खुलासा किया सुशांत सोशल मीडिया पर बार-बार देखा करते थे कि उनके बारे में क्या लिखा जा रहा है ? यही नहीं, गूगल सर्च पर ‘बाई पोलर डिसॉर्डर’ एवं ‘पेनलेस डेथ’ जैसी चीजों के बारे में बार-बार खोजा करते थे। सुशांत के खाते से पैसों के हस्तांतरण संबंधी सवाल पर परमबीर सिंह ने कहा कि खातों की जांच अभी भी चल रही है।

सुशांत के चार्टर्ड एकाउंटेंट का बयान दर्ज किया गया है। इससे पहले जो सुशांत के सीए थे, उनसे भी बात की गई है। लेकिन जितना अब तक दिखाई देता है, उसके अनुसार सुशांत के बैंक खाते में करीब 18 करोड़ रुपए आए थे। उसमें से चार-साढ़े चार करोड़ अभी भी खाते में है। सुशांत के खर्चों की भी जांच की जा रही है। लेकिन सुशांत के खाते से रिया के खातों में पैसों के जाने संबंधी कोई तथ्य अभी पुलिस को नहीं मिला है। फिर भी पुलिस आर्थिक विशेषज्ञों की मदद से इसकी जांच अभी कर रही है। एक सवाल का जवाब देते हुए सिंह ने कहा कि मुंबई पुलिस इस मामले से जुड़े कई पक्षों की जांच कर रही है। अब तक 56 लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। सुशांत के आर्थिक व मेडिकल रिकॉर्ड्स की जांच विशेषज्ञों से करवाई जा रही है। पुलिस ने मनोविज्ञानियों से भी बात की है।

सुशांत की मौत के बाद ही उनके फ्लैट को भी सील कर दिया गया था। 15 जून को फॉरेंसिक की टीम और कूपर अस्पताल से डॉक्टरों की टीम ने सुशांत के घर का मुआयना किया था। सारे साक्ष्य इकट्ठा करने के बाद ही फ्लैट से सील हटाया गया था। सिंह ने बताया कि सुशांत की आत्महत्या के एक दिन पहले से लेकर आत्महत्या के दिन तक का उनकी बिल्डिंग का सीसीटीवी फुटेज पुलिस के पास उपलब्ध है। जिसमें 13 जून को उनके फ्लैट में पार्टी होने का कोई सुबूत पुलिस को नहीं मिला है। सिंह ने इस बात से भी इन्कार किया कि आत्महत्या से पहले कोई नेता उनके घर आया था।

बिहार पुलिस के एसपी विनय तिवारी को क्वारंटाइन किए जाने के सवाल पर परमबीर ने कहा कि मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं है। क्योंकि क्वारंटाइन का अधिकार मुंबई महानगरपालिका का है। दूसरी महाराष्ट्र सरकार की ओर से आज एक बयान में कहा गया है कि एसएसपी पटना उपेंद्र कुमार शर्मा के निवेदन पर बिहार से आए एसपी विनय तिवारी के निवास का प्रबंध गोरेगांव की एसआरपीएफ सीनियर ऑफिसर्स मेस में किया गया था और उन्हें एक मारुति आर्टिगा कार भी उपलब्ध कराई गई है। लेकिन एसपी विनय तिवारी को

क्वारंटाइन किए जाने के मसले पर बीएमसी भाजपा नेताओं के निशाने पर भी है। महाराष्ट्र भाजपा के उपाध्यक्ष किरीट सोमैया ने बीएमसी आयुक्त को पत्र लिखकर पूछा कि अपने काम के सिलसिले में मुंबई से बाहर आ-जा रहे कितने मंत्रियों, आईपीएस अधिकारियों, व्यवसाइयों इत्यादि को क्वारंटाइन किया गया है। सोमैया के अनुसार, इस बीच कई बार तो आइसीएमआर की टीम भी मुंबई सहित महाराष्ट्र के कई शहरों में आकर गई है।

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