पति की संपत्ति की कानूनी संरक्षक बनना चाहती हैं रानी रत्ना सिंह, मुंबई उच्चन्यायालय ने दी सलाह

पूर्व विदेश मंत्री राजा दिनेश सिंह की पुत्री रत्ना सिंह की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए मुंबई उच्चन्यायालय ने उन्हें सुझाव दिया कि वे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर करें। इस अनुच्छेद के तहत कोर्ट अधिक राहत दे सकती है।

Neel RajputTue, 12 Jan 2021 08:49 PM (IST)
कोर्ट ने दी सलाह- संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर करें

मुंबई,जेएनएन। कांग्रेस की पूर्व सांसद एवं प्रतापगढ़ राजघराने की रानी रत्ना सिंह अपने पति जय सिंह सिसोदिया की संपत्ति की कानूनी संरक्षक बनना चाहती हैं। उन्होंने इसके लिए मुंबई उच्चन्यायालय में एक याचिका दायर की थी। लेकिन उच्चन्यायालय ने उन्हें नए सिरे से एक अन्य अनुच्छेद के तहत याचिका दायर करने की सलाह दी है।

पूर्व विदेश मंत्री राजा दिनेश सिंह की पुत्री रत्ना सिंह की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए मुंबई उच्चन्यायालय ने उन्हें सुझाव दिया कि वे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर करें। इस अनुच्छेद के तहत कोर्ट अधिक राहत दे सकती है। बता दें कि रत्ना सिंह ने अपनी पिछली याचिका गार्जियन एंड वार्डन एक्ट के तहत दायर की थी, जो नाबालिग बच्चों के संदर्भ में ही लागू होती है। सरकारी वकील द्वारा इस पर आपत्ति जताई गई थी। तब रत्नासिंह ने उच्चन्यायालय की सलाह पर पुरानी याचिका वापस लेकर अनुच्छेद 226 के तहत नई याचिका दायर करने की योजना बनाई है। आज उनके वकील ने न्यायमूर्ति एन.जे.जमादार की अदालत में पुरानी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। अदालत ने उन्हें यह अनुमति देते हुए नई याचिका दायर करने की स्वीकृति दे दी है।

बता दें कि रानी रत्ना सिंह के 69 वर्षीय पति जय सिंह सिसोदिया इन दिनों काफी बीमार है। मुंबई के निकट वसई के एक पुनर्वास केंद्र में उनका इलाज चल रहा है। रानी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उनके पति को नशे की लत है। वह अपने आप चल-फिर भी नहीं सकते। उन्हें डायबिटीज की बीमारी है। कैंसर से भी पीड़ित हैं। कैंसर का पता चलने के बाद वह और ज्यादा नशा करने लगे हैं। रानी द्वारा दायर याचिका के अनुसार उनके पति राजस्थान के एक राजघराने से ताल्लुक रखते हैं। वे राणाप्रताप के वंशज हैं। मेरे ससुर का 2017 में निधन हो चुका है। सास ब्रिटिश नागरिक हैं और ब्रिटेन में ही रहती हैं। उनकी उम्र भी काफी हो गई है। मेरे पति ड्रग्स एवं शराब खरीदने के लिए घर की कई कीमतें वस्तुएं बेच चुके हैं। उनकी देश व विदेश में कई चल-अचल संपत्तियां हैं। मेरे पति भी म्यूचुअल फंड, शेयर, गहने, पेंटिंग व कई अन्य कीमती संपत्तियां छोड़ गए हैं।

रत्ना सिंह ने कोर्ट से अपील की है कि इन संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें ही इन सारी चल-अचल संपत्तियों का कानूनी संरक्षक बनाया जाए। क्योंकि मेरे पति अपनी ड्रग्स से जुड़ी जरूरतें पूरी करने के लिए इन संपत्तियों को नष्ट करते जा रहे हैं। रानी का कहना है कि मेरे पास अपनी भी संपत्ति काफी है। लेकिन अब पति के इलाज पर भी काफी खर्च हो रहा है। मुझे खुद का एवं अपने दो बच्चों का ध्यान रखने के लिए पति की देखरेख एवं उनकी संपत्ति का कानूनी संरक्षण मेरे पास रहना चाहिए।

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