Maharashtra: कोरोना मरीजों की जीनोम सीक्वेंसिंग कराएगा महाराष्ट्र

कोरोना मरीजों की जीनोम सीक्वेंसिंग कराएगा महाराष्ट्र। फाइल फोटो

Maharashtra कोरोना मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए महाविकास अघाड़ी सरकार ने राज्य में कोरोना वायरस की प्रकृति का अध्ययन करने के लिए इसकी जीनोम सीक्वेंसिंग कराने का फैसला किया है। प्रदेश में नित नए मामले सामने आ रहे हैं।

Sachin Kumar MishraFri, 30 Apr 2021 11:09 PM (IST)

राज्य ब्यूरो, मुंबई। Maharashtra: महाराष्ट्र में कोरोना मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए महाविकास अघाड़ी सरकार ने राज्य में कोरोना वायरस की प्रकृति का अध्ययन करने के लिए इसकी जीनोम सीक्वेंसिंग कराने का फैसला किया है। सरकार ने इसके लिए काउंसिल आफ साइंटिफिक एंड इंडस्टि्रयल रिसर्च (सीएसआइआर) के इंस्टीट्यूट आफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलाजी (आइजीईबी) के साथ एक करार किया है। करीब तीन महीने चलने वाली इस प्रक्रिया पर 1.62 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जीनोम सीक्वेंसिंग में महाराष्ट्र के प्रत्येक जिले से हर सप्ताह 25 यानी हर महीने 100 नमूने लिए जाएंगे। फिर इन्हें पुणे स्थित नेशनल सेंटर फार सेल साइंस (एनसीसीएस) एवं फरीदाबाद स्थित सीएसआइआर-आइजीईबी भेजा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का संयोजन महाराष्ट्र सरकार का स्वास्थ्य शिक्षा एवं शोध निदेशालय (डीएमईआर) करेगा।

इस शोध में विभिन्न मरीजों में कोरोना वायरस की प्रकृति एवं उन्हें दी जा रही दवाओं के असर पर अध्ययन किया जाएगा, ताकि कोविड के बदलते स्वरूप के अनुसार तैयारियां की जा सकें। बता दें कि कोरोना की पहली लहर कमजोर पड़ने के दौरान फरवरी के प्रथम सप्ताह तक महाराष्ट्र में जहां सिर्फ दो-ढाई हजार पाजिटिव केस ही सामने आ रहे थे, वहीं अब इनकी संख्या 60 हजार से ऊपर पहुंच गई है। जुलाई से महाराष्ट्र में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका भी जताई जाने लगी है। इसलिए राज्य सरकार इस शोध के जरिये कोरोना की बदलती प्रकृति के अनुसार ही उससे लड़ने की तैयारी करना चाहती है।

इस प्रकार का शोध महाराष्ट्र से पहले केरल भी करवा चुका है। केरल उन राज्यों में से है, जहां कोरोना की पहली लहर कमजोर पड़ने के बावजूद पाजिटिव मामलों की संख्या कम होती नहीं देखी गई। केरल सरकार ने अपने यहां इस वर्ष की शुरुआत में ही कराए गए जीनोम सीक्वेंसिग की रिपोर्ट महाराष्ट्र को भी भेजी थी। यह रिपोर्ट मिलने के बाद 26 मार्च, 2021 को ही एक बैठक में महाराष्ट्र में भी ऐसा शोध करवाने का विचार किया गया था। इस बैठक के करीब एक माह बाद सरकार ने महाराष्ट्र में भी यह शोध करवाने का फैसला किया है।

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