कोविड-19 के इलाज के लिए निजी अस्पतालों के लिए श्रेणी बनाकर दरें तय कीं महाराष्ट्र सरकार ने

कोविड की जांच के लिए अस्पताल निर्धारित दरें अलग से ले सकेंगे। इसी प्रकार बड़ी जांचों के शुल्क भी रोगी को अदा करने होंगे। इन नियमों के पालन न करने पर अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

Vijay KumarTue, 01 Jun 2021 11:36 PM (IST)
कोविड की जांच के लिए अस्पताल दरें अलग से ले सकेंगे। जांच शुल्क भी रोगी को अदा करना होगा।

 राज्य ब्यूरो, मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने कोविड-19 के इलाज के लिए तीन अलग-अलग श्रेणियां बनाकर निजी अस्पतालों की दरें तय कर दी हैं। इससे ग्रामीण एवं छोटे शहरों के कोरोना रोगियों को बड़े शहरों एवं महानगरों की तुलना में कम शुल्क अदा करना पड़ेगा। मंगलवार को एक अधिसूचना जारी कर महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के अस्पतालों को क्षेत्र के आधार पर तीन श्रेणियों में वर्गीकृत कर दिया है।

ए-श्रेणी के शहरों में मुंबई एवं बृहन्मुंबई महानगरपालिका क्षेत्र (भिवंडी एवं वसई-विरार छोड़कर), पुणे एवं पुणे मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र, नागपुर (नागपुर महानगरपालिका, दिगदोह एवं वाड़ी) को रखा गया है। इस श्रेणी में सामान्य वार्ड के लिए प्रतिदिन एक बिस्तर का शुल्क 4000 रुपए, वेंटीलेटर एवं आइसोलेशन सुविधा के साथ आईसीयू बिस्तर का शुल्क प्रतिदिन 9000 रुपए तथा सिर्फ आइसोलेशन सुविधा के साथ आईसीयू बिस्तर का शुल्क 7500 रुपए होगा।

बी-श्रेणी के शहरों में नासिक, औरंगाबाद, अमरावती, भिवंडी, सोलापुर, कोल्हापुर, वसई-विरार, मालेगांव, नांदेड़ एवं सांगली आदि शहरों को रखा गया है। इस श्रेणी में ए-श्रेणी के अनुसार ही बिस्तरों के शुल्क क्रमशः 3000 रुपए, 6700 रुपए एवं 5500 रुपए होंगे।

सी-श्रेणी में ए और बी श्रेणी के शहरों को छोड़कर अन्य सभी जिला मुख्यालयों के निजी अस्पतालों को रखा गया है। जहां शुल्क उपरोक्त क्रमानुसार ही क्रमशः 2400, 5400 एवं 4500 निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इन दरों का पालन करवाएं, एवं फ्लाइंग स्क्वायड के जरिए पता करवाएं कि अस्पतालों में इन नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं। सरकार की ओर से जारी सामान्य वार्ड की दरों में बिस्तर के शुल्क के अलावा, नर्सिंग, दवाइयां, सामान्य जांच एवं भोजन भी शामिल होगा।

कोविड की जांच के लिए अस्पताल निर्धारित दरें अलग से ले सकेंगे। इसी प्रकार बड़ी जांचों के शुल्क भी रोगी को अदा करने होंगे। इन नियमों के पालन न करने पर अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। बता दें कोरोना काल के दौरान निजी अस्पतालों के 80 फीसद बेड कोरोना रोगियों के लिए आरक्षित रखने की सीमा सोमवार को समाप्त हो गई थी। सरकार की ओर से ये अधिसूचना उसके बाद जारी की गई है।

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