Maharashtra: फर्जी व्यापारिक संस्थाओं के जरिये कर का लाभ उठाने वाले चार लोग गिरफ्तार

Maharashtra डीजीजीआइ की नागपुर इकाई ने फर्जी व्यापारिक संस्थाएं बनाकर 10.79 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। सभी संस्थाओं ने जाली दस्तावेजों का एक ही सेट अपलोड कर रखा था।

Sachin Kumar MishraThu, 29 Jul 2021 07:56 PM (IST)
फर्जी व्यापारिक संस्थाओं के जरिये कर का लाभ उठाने वाले चार लोग गिरफ्तार। फाइल फोटो

नागपुर, प्रेट्र। जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआइ) की नागपुर इकाई ने फर्जी व्यापारिक संस्थाएं बनाकर 10.79 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का लाभ उठाने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। डीजीजीआइ के मुताबिक, नकली चालान और फर्जी संस्थाओं के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत नागपुर क्षेत्रीय इकाई के अधिकारियों ने नागपुर और उसके आसपास के कई इलाकों में तलाशी ली और इन लोगों को गिरफ्तार किया। डीजीजीआइ को चार संस्थाओं के बारे में खुफिया सूचना मिली थी। ये संस्थाएं घोषित पतों पर मौजूद नहीं थीं और इन्होंने व्यवसाय के प्रमाण के रूप में जाली दस्तावेज अपलोड किए थे।

डीजीजीआइ के अधिकारी के मुताबिक, सभी चार संस्थाओं ने जाली दस्तावेजों का एक ही सेट अपलोड कर रखा था और एक ही पते पर जीएसटी पंजीकरण लिया था। इससे इन चारों संस्थाओं के फर्जी होने का पता चलता है। डीजीजीआइ के मुताबिक, इनके दस्तावेजों की जांच से पता चला है कि यह फर्जी संस्थाएं 53.95 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी लेन-देन में लिप्त थीं। इसके अलावा इन्होंने 10.79 करोड़ रुपये के आइटीसी का लाभ उठाया था। इस आइटीसी को अन्य संस्थाओं को दे दिया था। इन फर्जी संस्थाओं ने लोहे और स्टील के कारोबार में शामिल होने का दावा किया था।

गौरतलब है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार ने सहकारी बैंकिंग को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने सरकारी बैंकिंग में आ रही समस्याओं के बारे में अवगत कराया है। उनके मुताबिक, वर्तमान में इस क्षेत्र में कुछ विसंगतियों और कानूनी अक्षमता पर ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही, उन्होंने 97वें संवैधानिक संशोधन के बारे में भी चर्चा की। उनके मुताबिक, सरकारी बैंकिंग क्षेत्र राज्य का मामला है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र का कोई भी हस्तक्षेप असंवैधानिक होगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा ने सरकारी क्षेत्र के लिए कानून बनाए हैं। केंद्र को राज्य के कानून में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है।

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