Maharashtra: दूसरी शादी करने पर महिला को थूककर चाटने की सजा व एक लाख रुपये जुर्माना

दूसरी शादी करने पर महिला को थूककर चाटने की सजा व एक लाख रुपये जुर्माना। फाइल फोटो

Maharashtra जाति पंचायत ने एक महिला को दूसरी शादी करने पर थूक कर चाटने व एक लाख रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई। महिला द्वारा हिम्मत कर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने पर पंचायत के 10 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है।

Sachin Kumar MishraFri, 14 May 2021 09:27 PM (IST)

मुंबई, राज्य ब्यूरो। महाराष्ट्र के अकोला जिले में एक जाति पंचायत ने एक महिला को दूसरी शादी करने पर थूक कर चाटने व एक लाख रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई। महिला द्वारा हिम्मत कर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने पर पंचायत के 10 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है। पंचायत के तानाशाही फरमान की शिकार बनी महिला का पहला विवाह 2011 में अकोला में हुआ था। पहले पति से 2015 में उसका तलाक हो जाने के चार साल बाद 2019 में उसने दूसरा विवाह जलगांव जिले में कर लिया। नाथ-जोगी संप्रदाय की उक्त महिला का दूसरा विवाह करना उसकी जाति पंचायत को रास नहीं आया। जाति पंचायत ने अकोला में उक्त महिला की बहन व उसके कुछ और रिश्तेदारों को बुलाकर फरमान सुनाया कि दूसरा विवाह करने वाली महिला को एक लाख रुपये जुर्माना अदा करने व पंचायत के सामने थूक कर चाटने के बाद ही उसकी जाति में वापस लिया जाएगा।

पंचायत ने यह फरमान पिछले माह नौ अप्रैल को सुनाया था। यह बात जब जलगांव में रह रही भुक्तभोगी महिला को पता चली, तो उसने हिम्मत जुटाकर जाति पंचायत के 10 लोगों के विरुद्ध जलगांव के ही चोपड़ा पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी। जलगांव के एसएसपी प्रवीण मुंडे के अनुसार, पुलिस ने महाराष्ट्र प्रोटेक्शन आफ पीपुल फ्राम सोशल बायकाट (प्रिवेंशन, प्राहिबिशन एवं रीड्रेशल) एक्ट की धारा पांच व छह के तहत मामला दर्ज किया है। जलगांव पुलिस ने जांच के लिए यह मामला अकोला के पिंजर पुलिस थाने को स्थानांतरित कर दिया है।  

गौरतलब है कि मार्च, 2021 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने दूसरी शादी की वैधता के सिलसिले में एक बड़ा फैसला दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि एक बेटी अपने पिता की दूसरी शादी की वैधता को अदालत में चुनौती दे सकती है। जस्टिस आरडी धनुका और जस्टिस वीजी बिष्ट की पीठ ने अपने फैसले में 66 वर्षीय महिला की याचिका स्वीकार कर ली जिसमें परिवार अदालत के एक आदेश को चुनौती दी गई है। दरअसल याचिकाकर्ता महिला ने अपने पिता (दिवंगत) की दूसरी शादी की वैधता को चुनौती देते हुए साल 2016 में परिवार अदालत में एक याचिका दाखिल की थी। महिला ने याचिका में दलील दी थी कि उसके पिता ने उसकी मां की साल 2003 में मृत्यु हो जाने के बाद दूसरी शादी कर ली थी लेकिन पिता की मृत्यु के बाद साल 2016 में उसे पता चला कि उसकी सौतेली मां ने अपनी पिछली शादी से तलाक नहीं लिया था।

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