भोपाल में कोरोना से हुई मौतों में 47 प्रतिशत गैस त्रासदी का झेल चुके थे दंश, पहले से कमजोर थे फेफड़े

Coronavirus in Bhopal भोपाल में कोरोना महामारी के कारण मरने वाले 47 प्रतिशत लोग ऐसे थे जो गैस त्रासदी का दंश झेल चुके थे। इनकी उम्र 40 के पार थी। इन्‍हें पहले से ही फेफड़ों से संबंधित रोग था और कोरोना महामारी भी फेफड़ों को ही प्रभावित करती है।

Babita KashyapThu, 02 Dec 2021 11:29 AM (IST)
भोपाल में 47 प्रतिशत वे मरीज थे जो गैस त्रासदी का दंश झेल चुके हैं।

 भोपाल, जेएनएन। कोरोना महामारी के कारण अब तक 1003 मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें से 467 यानि 47 प्रतिशत वे मरीज थे जो गैस त्रासदी का दंश झेल चुके हैं। 443 मरने वाले लोगों की उम्र 40 के पार थी, ये वे लोग थे जो गैस से सीधे तौर पर प्रभावित हुए थे। इस बारे में हमीदिया अस्पताल के छाती व श्वास रोग विशेषज्ञ डा. लोकेन्द्र दवे गैस पीड़ितों के फेफड़े कमजोर होने की बात सामने आ चुकी है। इन्‍हें फेफड़ों से संबंधित रोग हैं और कोरोना भी फेफड़ों को प्रभावित करता है। ऐसे में पूरी आशंका है कि गैस पीड़ितों के कोरोना की चपेट में आने के बाद से इन मरीजों की हालत ज्‍यादा बिगड़ी होगी।

भोपाल ग्रुप फार इन्फारेमशन एंड एक्शन ये वे संगठन है जो गैस पीड़ितों के लिए काम करता है। इस संगठन की संयोजक रचना ढींगरा ने जब कोरोना महामारी से मरने वाले मरीजों को लेकर पड़ताल की तो पता चला कि मृतकों में 316 पुरुष और 151 महिलाएं हैं ये वो लोग थे जिनके पास गैस पीड़ित होने का कार्ड भी था। बता दें कि भोपाल में पौने छह लाख लोग ऐसे हैं जो गैस त्रासदी का दंश झेल चुके हैं। इस शहर की कुल आबादी 28 लाख है जिसमें 17 फीसद लोग गैस पीड़ित हैं। लेकिन कोरोना महामारी से मरने वालों का आंकड़ा 47 प्रतिशत बताया गया है। इसका मतलब है कि गैस पीड़ितों का आंकड़ा भले ही कुछ भी रहा हो लेकिन उन पर इस महामारी का असर काफी अधिक रहा जो कि उनकी मौत की वजह बना।

सामने आयी ये लापरवाही

गैस पीड़ितों में से कुछ लोगों को पहले से ही कई बीमारियां हैं। इसलिए कोरोना से संक्रमित होने पर उनकी देखभाल के लिए खास व्‍यवस्‍था होनी चाहिए थी। लेकिन उन्‍हें इलाज के लिए गैस पीड़ितों के लिए बनाए गए सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया गया। अप्रैल और मई में जिस समय कोरोना महामारी अपने चरम पर थी उस समय कुछ गैस पीड़ितों को अस्‍पताल में बिस्तर तक नहीं मिल पाया था।

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