World Environment Day 2021: पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल हैं इस तरह के घर

आने वाले समय में देश में ग्रीन होम प्रोजेक्ट्स के 28 से 55 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। लोगों के बीच इसकी स्वीकार्यता भी बढ़ रही है। तो पर्यावरण दिवस पर जानते हैं कि कैसे हम कर सकते हैं इसे सुरक्षित रखने में योगदान।

Priyanka SinghSat, 05 Jun 2021 07:00 AM (IST)
खूबसूरत और ईको फ्रेंडली होम की तस्वीर

वैश्विक महामारी ने पूरी दुनिया को सस्टेनेबल लिविंग के बारे में सोचने को विवश कर दिया है, जिससे प्रकृति और पर्यावरण सुरक्षित रहे। इसमें ग्रीन बिल्डिंग्स और ग्रीन होम्स की भूमिका और भी बढ़ जाती है। ऐसे घर न सिर्फ गैस उत्सर्जन को कम करते हैं, बल्कि लोगों के तन-मन को स्वस्थ रखने में भी कारगर होते हैं। इसलिए अब देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोग अपने लिए ऐसे घरों का निर्माण कर रहे हैं, जो पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल हो।

वर्ल्ड ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल के अनुसार, ग्रीन या इको फ्रेंडली बिल्डिंग्स की डिज़ाइन, कंस्ट्रक्शन और ऑपरेशन इस तरह से किए जाते हैं कि वह पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकते हैं। यही वजह है कि आने वाले समय में देश में ग्रीन होम प्रोजेक्ट्स के 28 से 55 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। लोगों के बीच इसकी स्वीकार्यता भी बढ़ रही है। तो कैसे कर सकते हैं इसमें एक्सपेरिमेंट, जानते हैं यहां...

मिट्टी से बनाएं आशियाना

प्रकृति से जुड़ाव के साथ टिकाऊ घर चाहते हैं तो ऐसा घर बनाएं जिसकी दीवारें मिट्टी की बनी हों। ऐसे घरों में बिजली के पंखों की आवश्यकता महसूस नहीं होती। रोशनी भी पर्याप्त रहती है। टीवी, कम्प्यूटर और अन्य उपकरण चलाने के लिए सोलर पैनल लगवा सकते हैं। रसोई भी बायोगैस से संचालित की जा सकती है।

बैंबू से घरों का निर्माण

बैंबू के घर न केवल 20 से 25 साल तक टिक सकते हैं, बल्कि इसके निर्माण एवं देखरेख पर न्यूनतम खर्च आता है। जैसे- 12*12 वर्गफीट के एक घर को बनाने में लगभग डेढ़ लाख रूपए का खर्च आता है। इतना ही नहीं, ऐसे घर कंक्रीट की तुलना में ठंडे (2 से 3 डिग्री कम तापमान) भी होते हैं।

वर्नाकुलर इंटीरियर

वर्नाकुलर लुक क्रिएट करने में मटीरियल की खास भूमिका निभाता है। घर के निर्माण के दौरान जहां लकड़ी, बेक्ड ब्रिक, रिसाइकल्ड स्टोन आदि ज्यादा इस्तेमाल होते हैं, वहीं सजावट के लिए जूट, रटन, बैंबू आदि पर जोर रहता है। इसलिए वर्नाकुलर स्टाइल के लिए इन चीज़ों से बने फर्नीचर और साज-सज्जा की अन्य चीज़ें इस्तेमाल कर सकते हैं। सजावट के लिए चौकी स्टूल्स, गोवा की पुर्तगाली कैबिनेट्स, कश्मीर के वॉलनेट वुड फर्नीचर को घर का हिस्सा बना सकते हैं। इसी तरह सजावट की चीज़ों में जूट के रग्स, कुशन कवर्स, टैराकोटा के लैंप्स, मिट्टी के शो पीसेज़ आदि इस्तेमाल हो सकते हैं।

Pic credit- freepik

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