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International Nurse Day 2021: जिम्मेदारी के साथ ही कई तरह के चैलेंजेस भी हैं इस फील्ड में

वृद्ध महिला का ब्लड प्रेशर चेक करती नर्स

International Nurse Day 2021 नर्स बनने के लिए सिर्फ उससे जुड़ी पढ़ाई कर लेना ही काफी नहीं बल्कि अंदर से सेवाभाव की भावना भी होनी चाहिए। लेकिन इस प्रोफेशन में सिर्फ इतना ही कर लेना काफी नहीं कुछ और भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

Priyanka SinghWed, 12 May 2021 08:59 AM (IST)

हॉस्पिटल में ट्रीटमेंट के दौरान अगर वाकई कोई हमारी केयर करता है तो वो नर्स होती है। हमारे दर्द पर मरहम लगाते हुए हमारे चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करती है। हमें समझाती है, सिखाती है, कभी-कभी गुस्सा करके डांटती भी है, क्योंकि वो फैमिली मेंबर की तरह केयर करती है। आज इंटरनेशनल नर्स डे तो इस मौके पर हम जानेंगे कि उनकी फील्ड में किस तरह के चैलेंजेस का सामना उन्हें करना पड़ता है।

गलती की गुंजाइश नहीं

नर्सों को इस पेशे से जुड़ी खुशियों के साथ-साथ कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है, क्योंकि जरा सी लापरवाही होने से मरीज को भारी नुकसान हो सकता है। चाहे मरीज को दवा देनी है, उसका खून टेस्ट करने के लिए शरीर से खून निकालना हो, नसों द्वारा शरीर में दवाइयां चढ़ानी हो या सिर्फ मरीज को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना हो। इन सभी कामों में एक नर्स को बड़ी सावधानी बरतने की जरूरत पड़ती है। एक नर्स के लिए गलती की कोई गुंजाइश नहीं है और खासतौर पर उन देशों में जहां उसकी लापरवाही की वजह से मरीज उस पर मुकदमा दायर कर सकता है।

हिंसा भी झेलती है

नर्सों की एक और समस्या यह है कि कई बार उन्हें अपने काम में हिंसा का शिकार होना पड़ता है। साउथ अफ्रीका में हुई एक स्टडी के मुताबिक, नर्सों के साथ अस्पतालों में हिंसा और दुर्व्यवहार किए जाने का ज्यादा खतरा रहता है। अपने काम के दौरान हमले का इतना खतरा तो पुलिस अफसरों और जेल के पहरेदारों को भी नहीं होता जितना कि नर्सों को होता है। 72% नर्सों का कहना है कि वे अपने आपको सुरक्षित महसूस नहीं करती। ब्रिटेन की भी यही हालत है। 

मरीज की वकालत करती

एक नर्स को हर हाल में हिम्मत से काम लेना होता है क्योंकि वह मरीज का जो भी इलाज करती है या दवाइयां देती है, अगर उसकी वजह से मरीज को कोई नुकसान पहुंचता है तो कानूनी तौर पर नर्स को जिम्मेदार ठहराया जाता है। इसलिए अगर कभी डॉक्टर उसे कुछ ऐसा करने को कहे जो उसे लगता है कि उसकी प्रैक्टिस के दायरे से बाहर है या गलत है तो उसे डॉक्टर की बात मानने से साफ मना करने में संकोच महसूस नहीं करना चाहिए। 

काम ज्यादा, तनाव ज्यादा

तनाव की वजह से नर्सें थककर पस्त भी हो जाती हैं। इसकी एक वजह है अस्पताल में नर्सों की कमी। जिस नर्स को अपनी जिम्मेदारी का अहसास होता है अगर वह बहुत ज्यादा काम की वजह से अपने मरीज की पूरी-पूरी देखभाल नहीं कर पाती है तो उसका तनाव बढ़ता जाता है। और इस समस्या से जूझने के लिए अगर वह ब्रेक के दौरान भी कामकरती है, ऊपर से ओवरटाइम करती है तो उसकी कुंठा और भी बढ़ जाती है।

Pic credit- freepik

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