स्वदेशी, पंचायती राज्य व्यवस्था और स्वच्छता पर आज के संदर्भ में महात्मा गांधी के विचार कितने प्रासंगिक हैं?

स्वदेशी की अवधारणा महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी जिसे उन्होंने 1905 में भारत के स्वराज प्राप्त करने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया। महात्मा गांधी ने भारत में पंचायती राज के गठन पर जोर दिया था।

Shashank PandeySat, 02 Oct 2021 01:51 PM (IST)
स्वदेशी, पंचायती राज्य व्यवस्था पर गांधी के विचार।(फोटो: प्रतीकात्मक)

अप्रैल 2020 जब चीन ने विवादित LAC के पूर्वी लद्दाख और अन्य इलाकों में बड़ी संख्या में सैनिकों और हथियारों के साथ मोर्चाबंदी की तो भारत की तरफ से उसे जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा। भारतीय सेना चीन की विस्तारवादी सोच के खिलाफ चोट करने के लिए LAC की सीमा पर मुस्तैद खड़ी है। वहीं, देश के नागरिक भी चीनी उत्पादों के खिलाफ अभियान छेड़कर अपना विरोध दर्ज करवा रहे हैं।

पिछले साल जब यह विवाद सामने आया तब ज्यादातर भारतीयों के मन में कई सवाल उभर रहे थे कि हम चीन के उत्पादों पर इतना निर्भर क्यों है, क्या हम इसे अपने देश में नहीं बना सकते? क्या हमारा देश आत्मनिर्भर नहीं हो सकता? अनैतिक कार्य करने वाले किसी देश के खिलाफ आवाज उठानी हो तो उस देश के उत्पादों को इस्तेमाल करना बंद कर देना चाहिए। साथ ही स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि राष्ट्र मजबूत और आत्मनिर्भर हो सके। यह बात इस देश के नागरिकों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से सीखी है। आज 2 अक्टूबर है यानी गांधी जयंती, आइए जानते हैं आज के समय में महात्मा गांधी के विचार देश के लिए कितने जरूरी हैं।

स्वदेशी की अवधारणा महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी, जिसे उन्होंने 1905 में भारत के स्वराज प्राप्त करने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया। उनके इस आंदोलन में भारत में उत्पादित वस्तुओं का उपयोग करना और ब्रिटिश निर्मित उत्पादों को नष्ट करना शामिल था। इस आंदोलन में आयातित वस्तुओं को बेचने वाली दुकानों के बाहर धरना दिया जाता था और लोगों को विदेशी वस्तुओं के बजाय स्थानीय रूप से निर्मित या उत्पादित सामान खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। आज स्वदेशी भावना को हमारे राष्ट्रीय जीवन के हर क्षेत्र में एकीकृत किया जा सकता है। इसके लिए सही नीतियों के साथ मजबूत इरादों की जरूरत है। महात्मा गांधी ने हस्तशिल्प व कुटीर उद्योग को हमेशा बढ़ावा दिया है। उनके ग्राम स्वराज का सपना था कि गांव के कुटीर, लघु और कृषि उद्योग तेजी से आगे बढ़े। अगर देश का हर नागरिक सोचे कि जो वह स्वदेशी उत्पाद इस्तेमाल कर रहा है, उससे न केवल देश की कंपनी का फायदा होगा, बल्कि देश में ज्यादा से ज्यादा रोजगार उत्पन्न होंगे, तो देश तेजी से आत्मनिर्भर की ओर बढ़ेगा।

स्वदेशी की अवधारणा ने औपनिवेशिक शोषण का विरोध करने के लिए भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन जैसा कि महात्मा गांधी ने जोर दिया था कि हमें इस अवधारणा को औपनिवेशिक शासन की समाप्ति के बाद भी जिंदा रखना है। आज भी यह आंदोलन दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कई अहिंसक संघर्षों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

स्वदेशी की अवधारणा पर दो सवाल, जिसके बारे में आपको भी अपने विचार स्वदेशी ऐप KOO पर साझा करना चाहिए ।

1. जमीनी स्तर पर ऐसा हमें क्या करना चाहिए, जिससे वस्तुओं पर हमारी निर्भरता कम हो और हम अपने देश में उत्पादन को बढ़ा सकें?

2. आजादी के इतने सालों बाद भी महात्मा गांधी की स्वदेशी अवधारणा को सही से लागू करने में कहां चूक हुई?

पंचायती राज्य व्यवस्था

महात्मा गांधी ने भारत में पंचायती राज के गठन व उसे सशक्त करने की अवधारणा पर जोर दिया था, ताकि जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत किया जा सके। आज के समय में गांधी की पंचायती राज्य व्यवस्था का महत्व बढ़ गया है। जिस तरह शहरों में पलायन बढ़ रहा है और रोजगार कम हो रहे हैं, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों और स्थानीय शासन को सुदृढ़ करना बहुत जरूरी है। इस व्यवस्था का लाभ यह है कि इससे गांव के लोगों की सत्ता में सीधे भागीदारी होगी। वह अपने क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी नीतियों पर स्वयं निर्णय ले पाएंगे। यह व्यवस्था सत्ता के विकेंद्रीकरण में मदद करती है और केंद्र सरकार के बोझ को कम करती है।

पंचायती राज्य व्यवस्था पर दो सवाल, जिसके बारे में आपको भी अपने विचार स्वदेशी ऐप KOO पर साझा करना चाहिए ।

1. पंचायती राज्य व्यवस्था को मजबूत करने में देश का युवा वर्ग कैसे योगदान दे सकता है?

2. शहरों में पलायन को रोकने के लिए महात्मा गांधी की पंचायती राज्य व्यवस्था कैसे काम आ सकती है?

कोरोना महामारी ने हमें महसूस करा दिया कि व्यक्तिगत स्वच्छता हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है। इसलिए आज के संदर्भ में हर किसी को महात्मा गांधी के स्वच्छता संबंधी विचारों को आत्मसात करना चाहिए। उनके जीवन में स्वच्छता इतना महत्वपूर्ण था कि वह इसे राजनीतिक स्वतंत्रता से भी ऊपर मानते थे। वह मानते थे कि स्वच्छ रहकर ही हम खुद को स्वस्थ रख सकते हैं और स्वस्थ राष्ट्र ही तेजी से प्रगति कर सकता है। वह अपने विचारों में ग्रामीण समाज को ऊपर रखते थे और स्वच्छता के मामले में वह कहते थे कि साफ-सफाई से ही भारत के गांवों को आदर्श बनाया जा सकता है। उनका मानना था कि स्वच्छता को अपने आचरण में इस तरह से अपना लेना चाहिए कि वह आदत बन जाए।

पंचायती राज्य व्यवस्था पर दो सवाल, जिसके बारे में आपको भी अपने विचार स्वदेशी ऐप KOO पर साझा करना चाहिए ।

1. स्वच्छता को लोगों के प्राथमिक कार्यों में कैसे शामिल किया जाए?

2. किसी राष्ट्र के लिए स्वच्छता क्यों है जरूरी?

स्वदेशी, पंचायती राज्य व्यवस्था और स्वच्छता के अलावा महात्मा गांधी के और भी कई ऐसे विचार हैं, जो आज के संदर्भ में प्रासंगिक है। इसमें पर्यावरण एवं सतत विकास, महिलाओं का सम्मान, सत्य और अंहिसा आदि शामिल है। रोजाना आप इन मुद्दों के बारे में पढ़ते और सुनते हैं। आपका इस संबंध में क्या विचार है? KOO APP पर #DainikJagran को टैग करके अपने विचार हमारे साथ साझा जरूर करें। सभी ताजा खबरों और अपडेट के लिए Dainik Jagran को KOO पर फॉलो करना न भूलें।

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लेखक-  शक्ति सिंह

(डिस्क्लेमर: यह ब्रांड स्टोरी है।)

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