April Fool Day 2021: अलग-अलग देशों में इस दिन की है अलग इंपॉर्टेंस, जानें इनके बारे में

अप्रैल फूड डे की फनी और कलरफुल पिक्चर

एनसाइक्लोपीडिया ऑफ रिलीजन व एनसाइक्लोपीडिया ऑफ ब्रिटानिका के अनुसार एक अप्रैल को मूर्ख दिवस मनाने का सीधा संबंध वसंत आगमन से है जब प्रकृति इंसान को अपने अनियमित मौसम से मूर्ख बनाती है। इसके अलावा अलग-अलग देशों में इस दिन की अलग इंपॉर्टेंस है।

Priyanka SinghThu, 01 Apr 2021 09:03 AM (IST)

मूर्ख दिवस मनाने की परंपरा कब, कैसे और कहां से प्रचलित हुई, इस बारे में दावे के साथ तो कुछ नहीं कहा जा सकता, पर माना यही जाता है कि इस परंपरा की शुरुआत फ्रांस में 16वीं सदी के उत्तरार्द्ध में हुई थी। माना जाता है कि एक अप्रैल 1564 को फ्रांस के राजा ने मनोरंजक बातों के जरिए एक-दूसरे के बीच मैत्री और प्रेम भाव की स्थापना के लिए एक सभा का आयोजन कराया था। उसके बाद फैसला लिया गया कि अब से हर साल इसी दिन ऐसी ही सभा का आयोजन होगा, जिसमें सर्वाधिक मूर्खतापूर्ण हरकतें करने वाले व्यक्ति को मास्टर ऑफ फूल की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। इस सभा में शिरकत करने वाले व्यक्ति अनोखी और विचित्र वेशभूषाएं धारण करके अपनी अजीबो-गरीब हरकतों से उपस्थित जनसमूह का मनोरंजन किया करते थे। और सबसे ज्यादा मूर्खतापूर्ण हरकत करने वाले व्यक्ति को 'मूर्खों का अध्यक्ष' चुना जाता था, जिसे 'विशप ऑफ फूल्स' की उपाधि से नवाजा जाता था।

फ्रांस

फ्रांस में 'मूर्ख दिवस' को 'पाइसन डे एपरिल' के रूप में भी मनाया जाता है, जिसका अर्थ है अप्रैल मछली। प्रचलित परंपरा के अनुसार बच्चे इस दिन अपने दोस्तों की पीठ पर कागज की बनी मछली चिपका देते हैं और जब उसे इस बात का पता चलता है तो बाकी बच्चे उसे 'पाइसन डे एपरिल' कहकर चिढ़ाते हैं।

यूनान

यूनान में मूर्ख दिवस की शुरुआत कैसे हुई, इस संबंध में कई किस्से प्रचलित हैं। ऐसे ही एक किस्से में कहा जाता है कि यूनान में एक व्यक्ति को खुद की बुद्धि और चतुराई पर बहुत घमंड था। वह बुद्धिदमान और चतुराई के मामले में अपने बराबर दुनिया में किसी को कुछ नहीं समझता था। एक बार उसके कुछ दोस्तों ने उसे सबक सिखाने का निश्चय किया और उससे कहा कि मध्य रात्रि के समय पहाड़ की चोटी पर आज देवता अवतरित होंगे, उन्हें वहां मनचाहा वरदान देंगे। अपने दोस्तों की बात पर विश्वास करके वह अगले दिन सुबह होने तक पहाड़ की चोटी पर देवता के प्रकट होने का इतंजार करता रहा और जब निराश होकर वापस लौटा तो दोस्तों ने उसका खूब मजाक उड़ाया। जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन पहली अप्रैल थी। माना जाता है कि तभी से यूनान में एक अप्रैल को लोगों को मूर्ख बनाने की परंपरा शुरू हुई।

दूसरी घटना

कहा जाता है कि इसी दिन यूनानी देवी सीरीज की बेटी प्रोसेरपीना को जंगली नर्गिसी फूल तोड़ते समय पाताल के देवता प्लूटो ने अपनी कैद में कर लिया था, जिसे बाद प्रोसेरपीना की चीखें पर्वतों के बीच गूंजने लगी और सीरीज उसकी चीखों को सुनकर उसके पीछे भागी लेकिन चीखों की आवाज विपरीत दिशा से आती महसूस होने के कारण वह गलत दिशा में ही भागती चली गई, जिस कारण वह अपनी बेटी को खोजने में विफल रही। चीखों की आवाज की दिशा की सही पहचान न करके गलत दिशा में ही बेटी की खोज करते रहने के कारण इस खोज को मूर्खों की खोज कहा गया और तभी से यूनान में मूर्ख दिवस मनाने की परंपरा शुरु हो गई।

इटली

कुछ लोग अप्रैल फूल मनाने की परंपरा की शुरुआत इटली से हुई मानते हैं। प्राचीन समय से ही इटली में एक अप्रैल को एक मनोरंजन उत्सव मनाया जाता है, जिसमें स्त्री-पुरुष सभी जमकर शराब पीते हैं और नाच-गाकर खूब हुड़दंग मचाते हैं। रात के समय दावतों का आयोजन भी किया जाता है।

Pic credit- freepik  

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