World Hepatitis Day: हेपेटाइटिस-सी से पीड़ित लोगों में जोखिम बढ़ा देता है शराब का सेवन

World Hepatitis Day हेपेटाइटिस-सी का अगर सही तरीके से इलाज न किया जाए तो यह लीवर सिरोसिस और कैंसर का कारण बन सकता है। हेपेटाइटिस-सी के दौरान शराब का सेवन प्रमुख तौर से लीवर कैंसर और सिरोसिस का कारण बनता है।

Ruhee ParvezWed, 28 Jul 2021 09:00 AM (IST)
हेपेटाइटिस-सी से पीड़ित लोगों में जोखिम बढ़ा देता है शराब का सेवन

नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। World Hepatitis Day: भारत में, हेपेटाइटिस-सी वायरस (HCV) के मामले ज़्यादा देखे जा रहे हैं। हेपेटाइटिस-सी को 'साइलेंट किलर' भी कहा जाता है, क्योंकि यह बिना किसी लक्षण के सालों तक चलता रहता है। इसके लक्षण तभी दिखते हैं, जब ये गंभीर स्थिति में आ जाता है। HCV का वैश्विक प्रसार 1.2 और 1.7 प्रतिशत के बीच है, जिसमें भारत में 0.5-1 प्रतिशत है।

हेपेटाइटिस-सी का अगर सही तरीके से इलाज न किया जाए, तो यह लीवर सिरोसिस और कैंसर का कारण बन सकता है। हेपेटाइटिस-सी के दौरान शराब का सेवन प्रमुख तौर से लीवर कैंसर और सिरोसिस का कारण बनता है। शोध में शराब का सेवन HCV संक्रमण वाले रोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक के रूप में दिखा गया है।

जो लोग दस साल से अधिक समय तक रोज़ाना 80 मिलीलीटर से ज़्यादा शराब पीते हैं, उनमें लिवर कैंसर होने की संभावना पांच गुना अधिक होती है। सिर्फ हेपेटाइटिस-सी में शराब का सेवन लीवर कैंसर के ख़तरे को दोगुना कर देता है। पंजाब हेपेटाइटिस-सी के उच्चतम प्रसार वाले राज्यों में से एक है, जहां शराब का उपयोग भी उच्चतम है। लॉकडाउन के बाद, राज्य में मामलों की संख्या हर महीने बढ़कर 800-900 हो गई है।

मोहाली के मैक्स अस्पताल में मेडिकल-ऑलकोलोजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. गौतम गोयल ने बताया, " हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा दुनिया भर में लीवर कैंसर का सामान्य रूप है। भारत में इसके मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यह आमतौर पर 40 से 70 के उम्र के बीच देखा जाता है और एडवांस्ड स्टेज पर इसका पता लगने पर व्यक्ति की जीवित रहने की दर 2 साल से भी कम हो जाती है। प्रारंभिक निदान और उपचार ही इस बीमारी से बचने का उपाय है।"

किन लोगों में बढ़ जाता है लीवर कैंसर का जोखिम?

मोहाली के फोरटिस कैंसर इंस्टीट्यूट के ऑनकोलोजी डायरेक्टर डॉ. राजीव बेदी ने कहा, " हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित लोगों में शराब का सेवन बेहद जोखिम भरा साबित होता है, क्योंकि यह उन प्रमुख कारकों में से एक है, जो हेपाटोसेलुलर कार्सिनोमा यानी लीवर कैंसर के ख़तरे को बढ़ाता है। जो लोग लंबे समय से लीवर से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित हैं, जैसे कि हेपेटाइटिस-बी या सी, तो इसकी वजह से भी लीवर कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। यह एक धीमी गति से बढ़ने वाली बीमारी है, जिसके प्रमुख लक्षण तब तक नहीं दिखते जब तक रोगी सिरोसिस या फिर लीवर कैंसर के चरण तक नहीं पहुंच जाता। ज़्यादातर मरीज़ों को आखिरी स्टेज में इसका पता चलता है, जब इलाज एक चुनौती बन जाता है।"

- जो लोग लंबे समय से लीवर से जुड़ी बीमारी से जूझ रहे हैं।

- जिन लोगों के लीवर को हेपेटाइटिस-बी या सी संक्रमण की वजह से क्षति पहुंची हो।

- जो लोग ज़्यादा शराब का सेवन करते हैं और जिनके लीवर में फैट ज़्यादा जमा होता है।

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