Pollution & Lung Diseases: प्रदूषण की वजह से बढ़ रही हैं फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां, बरतें ये सावधानियां

प्रदूषण की वजह से बढ़ रही हैं फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां, बरतें ये सावधानियां

Pollution Lung Diseases एक ऑनलाइन स्टडी के अनुसार 93% मरीज़ों का मानना है कि कोविड के बाद वायु प्रदूषण में वृद्धि हुई है इससे कई सांस से सम्बंधित समस्याएं बढ़ रही हैं। उनमें से 39% मरीज़ इन्ही सांस से संबंधित समस्याओं से पीड़ित हैं।

Ruhee ParvezFri, 26 Feb 2021 07:45 PM (IST)

नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Pollution & Lung Diseases: पिछले कुछ समय में पार्टिकुलेट प्रदूषण में काफी इज़ाफा देखा गया है। 1998 से हर साल पार्टीकुलेट प्रदूषण 42% की औसत दर से बढ़ा है। अब प्रदूषण इस स्तर पर पहुंच गया है कि इसके लगातार बढ़ना एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रदूषण पुरानी फेफड़ों की बीमारी, हाइपरटेंशन, स्ट्रोक, डायबिटीज़ और हार्ट अटैक जैसी स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा देता है। इनमें से कई स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें ऐसी हैं, जो कोविड-19 के गंभीर संक्रमण के जोखिम को और बढ़ा देती हैं। 

एक ऑनलाइन स्टडी के अनुसार 93% मरीज़ों का मानना है कि कोविड के बाद वायु प्रदूषण में वृद्धि हुई है, इससे कई सांस से सम्बंधित समस्याएं बढ़ रही हैं। उनमें से 39% मरीज़ इन्ही सांस से संबंधित समस्याओं से पीड़ित हैं। साथ ही 53% लोग इस समय के दौरान लाइफस्टाइल से संबंधित समस्याओं जैसे डायबिटीज़, हाइपरटेंशन, मोटापे आदि से जूझ रहे हैं, इन बीमारियों से पीड़ित मरीज़ों को इन्फेक्शन से सावधान रहने की ज़रूरत है।

जिंदल नेचरक्योर के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. बबीना एनएम ने कहा, "दिल्ली, बेंगलुरु, गाजियाबाद, और अन्य शहरों में जहां वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है, वहां रह रहे लोगों को विशेष रूप से प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से गंभीर बीमारियों को लेकर सतर्क होने की आवश्यकता है। जो लोग कोविड से पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें अब और ज़्यादा सावधानी बरतने की ज़रूरत है।"

ऐसी सावधानियां बरतें

- जितना हो सके घर के अंदर ही रहें।

- सुबह-सुबह सैर करने बाहर न निकलें। हो सके तो घर के अंदर ही एक्सरसाइज़ करें। आप घर पर या फिर जिम में वर्कआउट कर सकते हैं।

- बिना मास्क पहने घर से बाहर न निकलें।

- अगर बाहर का तापमान कम है या फिर ठंडी हवाएं चल रही हैं, तो कोशिश करें कि बाहर न जाएं।

- कूड़े, घास, लकड़ी और प्लास्टिक को न जलाएं।

अमेरिका स्थित हेल्थ इफेक्ट इंस्टीटयूट द्वारा ग्लोबल एयर 2020 की रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉन्ग-टर्म एक्सपोजर और इनडोर प्रदूषकों के संपर्क में आने से दिल का दौरा, स्ट्रोक, डायबिटीज, क्रोनिक फेफड़े की बीमारी, फेफड़े के कैंसर और नवजात रोग से 1.67 मिलियन से अधिक लोगों की मौत 2019 में हुई। 

जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल, ग़ाज़ियाबाद केइंटरनल मेडिसिन, डॉ. दीपक वर्मा ने कहा, "वायु प्रदुषण और स्वास्थ्य, एक सिक्के के दो पहलू हैं। जैसे-जैसे प्रदुषण बढ़ता है वैसे-वैसे सेहत ख़राब होती है। पिछले 5 से 7 सालों में हमने ऐसे मरीज़ों में 5 से 7 प्रतिशत की वृद्धि देखी है। जिनमें क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज़ (COPD) होती है और 3 से 5% की वृद्धि उन मरीज़ों में देखी है, जिनमें प्रदुषण के कारण सांस से सम्बंधित समस्या होती है। इससे सांस से सम्बंधित बीमारियों जैसे इम्फीसेमा, ब्रोंकाइटिस और अस्थमा बढ़ सकता है और अधिक गंभीर तथा संभावित रूप से घातक बीमारिया भी इसकी वजह से हो सकती है, जैसे कि फेफड़े का डैमेज होना आदि।"

जिंदल नेचरक्योर के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ बबीना एनएम ने आगे कहा, 'COPD, अस्थमा और क्रोनिक ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोगों में प्रदूषण के बढ़े हुए लेवल से मोर्बिडिटी और मोर्टेलिटी रेट ज्यादा होता है। नेचुरल थेरेपी के हमारे ट्रेडिशनल जानकारी और गैर-इनवेसिव प्रोसीजर से नेचुरोपैथी से निश्चित रूप से विभिन्न बीमारियों का इलाज करने में फर्क पड़ रहा है और बीमारी को जड़ से उखाड़ फेंकने में मदद मिल रही है। हालांकि सामान्य प्रदूषण हर साल बढ़ रहा है और वायु प्रदूषण तो नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है।"

पारस हॉस्पिटल, गुरुग्राम के रेस्पिरेटरी मेडिसिन और चेस्ट इंस्टीटयूट के चीफ डॉ .अरुणेश कुमार ने कहा, 'पहले भी हम देख चुके हैं कि जो लोग पहले से  COPD, फेफड़े के कैंसर और अस्थमा से पीड़ित होते हैं, उनकी स्थिति प्रदूषण क कारण और गंभीर हो जाती है। यहां तक कि प्रदूषित वायु के संपर्क में लंबे समय तक आने से एक स्वस्थ व्यक्ति भी  COPD, फेफड़े के कैंसर और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों के चपेट में आ सकते हैं। हम पहले भी अपनी ओपीडी में सांस से सम्बंधित समस्याओं के बढ़ते मामले देख चुके हैं। अब 

वायु की गुणवत्ता ख़राब होने और कोविड-19 के कारण इन बीमारियों में बढ़ोत्तरी होने से हेल्थकेयर पर बोझ भी बढ़ेगा। जहां तक महामारी की बात है, तो हमें इसे रोकने के लिए कई मोर्चों पर काम करने की ज़रूरत है।"

खान-पान में भी करें बदलाव

एक संतुलित और स्वस्थ डाइट आपकी इम्यूनिटी को बढ़ाती है और हवा में पाए जाने वाले टॉक्सिन्स से शरीर को लड़ने के लिए मज़बूत बनाती है। अपने खाने में ऐसी चीज़ें शामिल करें जो पोषक तत्वों से भरपूर और एंटी-इंफ्लामेट्री हों, साथ ही डिटॉक्स में मदद करे और इम्यून पॉवर को बढ़ाए। खासकर, खाने में विटामिन-सी को ज़रूर शामिल करें। आमला, अमरूद, नींबू, संतरे आदि में विटामिन-सी की अच्छी मात्रा होती है। 

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