WHO ने जारी किया बयान, कहा-कोरोना के टीके हलाल हैं, अपनी बारी आने पर जरूर लगवाएं

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तमाम तरह के अफवाहों का खंडन करते हुए कहा है कि कोरोना के टीके पूरी तरह से हलाल हैं। इस टीके को बनाने में किसी भी जाति और धर्म को ठेस पहुंचाने की कोशिश नहीं की गई है।

Pravin KumarSun, 25 Jul 2021 12:00 PM (IST)
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह जानकारी सोशल मीडिया ट्विटर और फेसबुक पर दी है।

नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। कोरोना वायरस को शिकस्त देने के लिए दुनियाभर में टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। भारत में टीकाकरण अभियान की शुरुआत 16 जनवरी को हुई है। उस समय से टीकाकरण अभियान अनवरत जारी है। इस बीच कोरोना महामारी की दूसरी लहर के चलते कोरोना टीकाकरण अभियान को तेज कर दिया गया है। इस क्रम में 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को भी टीका लगाया जा रहा है।

हालांकि, कोरोना टीका को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल हैं। कुछ लोगों का मानना है कि कोरोना वैक्सीन को बनाने में जानवरों के मांस और हड्डियों का इस्तेमाल किया गया है। इस बारे में उनका तर्क है कि टीके को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए जानवरों की हड्डी और स्किन यानी चमड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा हो सकता है कि कोरोना टीका भी जानवरों की हड्डी और चमड़ी से बनाई गई है। इसके लिए कोरोना वैक्सीन लगवाना उचित नहीं है।

खासकर इस्लाम धर्म के अनुयायी ऐसे टीकों को हराम मानते हैं। विश्व के कई मुस्लिम देशों में कोरोना टीका को लेकर बहस तेज हो गई है। इसकी शुरुआत इंडोनेशिया और मलेशिया से हुई। जहां, इस्लाम धर्म गुरुओं ने कोरोना टीका लेने पर हलाल सर्टिफिकेट देने की मांग की। आपको बता दें कि इस्लाम धर्म में सूअर और शराब से निर्मित चीजों को हराम माना जाता है। इसके लिए कोरोना टीका को लेकर बहस तेज हो गई। उनका मानना है कि जब तक टीका बनाने वाली कंपनी या सरकार पुष्टि नहीं करती है। तब तक कोरोना टीका लगवाना गुनाह है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तमाम तरह के अफवाहों का खंडन करते हुए कहा है कि कोरोना के टीके पूरी तरह से हलाल हैं। इस टीके को बनाने में किसी भी जाति और धर्म को ठेस पहुंचाने की कोशिश नहीं की गई है। दुनिया के किसी देश में कोरोना टीका बनाने में जानवरों की हड्डी और चमड़ी का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह जानकारी सोशल मीडिया ट्विटर और फेसबुक पर दी है। इस ट्वीट में लिखा है-कोरोना के टीके पूरी तरह से हलाल हैं। इसमें किसी भी जानवर के उत्पादों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। वहीं, The Medical Fiqh Symposium की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि शरिया कानून के तहत कोरोना टीकों की अनुमति है। आसान शब्दों में कहें तो इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग कोरोना टीका लगवा सकते हैं। अपनी बारी आने पर कोरोना वैक्सीन जरूर लगवाएं। साथ ही कोरोना से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां जरूर बरतें।

डिस्क्लेमर: स्टोरी के टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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