New Dengue Variant: डेंगू का नया वेरिएंट डी-2 माना जा रहा है खतरनाक, जानिए इसके लक्षण

Newer Dengue Variant एक्टपर्ट्स के मुताबिक डेंगू वायरस DENV 2 को सबसे घातक माना जा रहा है। इस वायरस से पीड़ित मरीज़ जल्द ही गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है इसलिए इस वायरस के लक्षणों को पहचानना और उसका तुरंत इलाज करना जरूरी है।

Shahina NoorWed, 27 Oct 2021 12:51 PM (IST)
डेंगू के नए स्ट्रेन D2 के कारण मरीज़ को आंतरिक और बाहरी ब्लीडिंग हो सकती है।

नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। पिछले दो सालों से कोरोनावायरस लोगों को परेशान कर रहा था, तो इस साल मच्छरों से होने वाली बीमारी डेंगू अपने नए-नए रूपों से लोगों पर अपना कहर ठहा रहा है। हर साल डेंगू, एन्सेफलाइटिस, मलेरिया, टाइफाइड और अन्य मच्छरों से होने वाली बीमारियों के हजारों मामले सामने आते हैं। डेंगू का प्रकोप इस साल स्थिति गंभीर कर रहा है। देश के 11 से ज्यादा राज्यों में डेंगू वायरस के एक नए स्ट्रेन के मामले सामने आ रहे हैं, जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। डेंगू का DENV 2 वायरस लोगों को ज्यादा परेशान कर रहा है।

ICMR के मुताबिक डेंगू के मरीजों में पाया जाने वाला डी-2 स्ट्रेन सबसे ज्यादा खतरनाक है। यह मरीजों के लिए काफी घातक हो सकता है। एक्टपर्ट्स के मुताबिक डेंगू वायरस DENV 2 को सबसे घातक माना जा रहा है। इस वायरस से पीड़ित मरीज़ जल्द ही गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है, इसलिए इस वायरस के लक्षणों को पहचानना और उसका तुरंत इलाज करना जरूरी है। आइए जानते हैं कि इस वायरस के लक्षण कौन-कौन से हैं और उसका उपचार कैसे किया जाए।

डेंगू वायरस के प्रकार:

डेंगू वायरस के कई प्रकारों DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4 में से DENV- 2 या स्ट्रेन D2 को सबसे गंभीर माना जाता है। इससे पीड़ित इनसान को आंतरिक रक्तस्राव भी हो सकता है।

डेंगू के नए स्ट्रेन DENV 2 के लक्षण

ब्लीडिंग होना:

डेंगू के नए स्ट्रेन D2 के कारण मरीज़ को आंतरिक और बाहरी ब्लीडिंग हो सकती है। डेंगू का बुखार बढ़ जाने के कारण स्थिति बिगड़ सकती है। इस स्थिति में डेंगू से पीड़ित मरीज के कान, नाक, मसूढ़े आदि से खून आने लगता है। 

प्लेटलेट्स तेज़ी से गिरना:

डेंगू की समस्या में प्लेटलेट्स गिरना आम लक्षण है, लेकिन डेंगू के नए स्ट्रेन के शिकार लोगों में प्लेटलेट्स बहुत तेजी से गिरने लगते हैं। अगर इलाज सही समय पर न मिला तो इम्यून सिस्टम खराब हो जाता है। बॉडी में वीकनेस बढ़ने से बॉडी के अंग काम करना बंद कर देते हैं।

शॉक सिंड्रोम:

यह डेंगू का दूसरा और तीसरा स्टेज माना जाता है। इसमें मरीज का तंत्रिका तंत्र खराब होने लगता है और वह लगभग सदमे की हालत में आ जाता है। इसी कारण इसे डेंगू शॉक सिंड्रोम कहते हैं। जब मरीज का बुखार कई दिन तक नहीं उतरता है तो इस स्टेज की शुरुआत होती है। इस नए स्ट्रेन के कारण होंठों का रंग नीला पड़ जाता है। स्किन पर लाल चकत्ते आने लगते हैं।

ब्लड प्रेशर का तेजी से बढ़ना:

डेंगू के नए स्ट्रेन डी-2 के कारण प्लेटलेट्स तेजी से गिरने लगते हैं साथ ही ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है।

तेज बुखार आना:

डेंगू के नए स्ट्रेन D2 के मरीज को बहुत तेज बुखार आता है। बुखार का तापमान 105 डिग्री तक पहुंच जाता है। अगर बुखार लगातार बढ़ रहा हैं तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। 

इस बीमारी से इस तरह करें बचाव:

डेंगू का स्ट्रेन कुछ भी हो, एहतियात मच्छर से है जो बीमारी को फैलाता है। अपने आस-पास घर में पानी नहीं जमा होने दें। फुल स्लीव कपड़े पहनें ताकि मच्छर हमला नहीं करें इस प्रकार का मच्छर आमतौर पर दिन में काटता है इसलिए दिन में अतिरिक्त देखभाल करने की जरूरत है। मच्छरों से बचाव के लिए क्रीम का उपयोग करें और सोने से पहले मच्छरदानी को अच्छी तरह से सेट कर लें। 

डिस्क्लेमर: स्टोरी के टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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