Jagran Dialogues: कोरोना के मामले कम हुए हैं, पर वायरस अभी गया नहीं है; त्योहारों में भी करते रहें Covid Appropriate Behaviour का पालन

Jagran Dialogues के लेटेस्ट एपिसोड में जागरण न्यू मीडिया के Executive Editor Pratyush Ranjan ने गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए कोरोना से बचना क्यों है जरूरी और क्या करें उपाय? इसी मुद्दे पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) गोरखपुर के कार्यकारी निदेशक Dr. Surekha Kishore से बातचीत की।

Pravin KumarMon, 27 Sep 2021 06:59 PM (IST)
Jagran Dialogues का आयोजन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर किया जा रहा है।

दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Jagran Dialogues: कोरोना संक्रमितों की संख्या में जैसे-जैसे बढ़ोत्तरी हुई। उससे यह भी पता चला कि जो लोग कोरोना से लड़कर बाहर आ गए। उनमें श्वसन तंत्र के अलावा, और भी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं। जो लोग पहले से किसी न किसी बीमारी से लड़ रहे थे। उनमें भी अलग तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं शुरू हो गई। इससे यह स्पष्ट हो गया कि कोरोना वायरस से श्वसन तंत्र समेत शरीर के सभी अंग प्रभावित होते हैं। हालांकि, कोरोना टीकाकरण अभियान की रफ्तार तेज होने और संक्रमण दर में कमी आने से आम जनजीवन एक बार फिर से धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। इसके बावजूद लोगों के मन में कई तरह के सवाल हैं। खासकर गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति कोरोना से ठीक होने के बाद सुरक्षित रहने और सामान्य व्यक्ति संक्रमण से बचाव के लिए क्या उपाय करें, यह बड़ा सवाल है।

Jagran Dialogues के लेटेस्ट एपिसोड में जागरण न्यू मीडिया के Executive Editor Pratyush Ranjan ने "गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए कोरोना से बचना क्यों है जरूरी और क्या करें उपाय? "इसी मुद्दे पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), गोरखपुर के कार्यकारी निदेशक Dr. Surekha Kishore से बातचीत की। डॉ. सुरेखा किशोर इंडियन मेडिकल साइंस का जाना माना चेहरा है। Jagran Dialogues की Covid-19 से जुड़ी सीरीज का आयोजन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर किया जा रहा है। आइए, इस वर्चुअल प्रश्नावली और बातचीत के बारे में विस्तार से जानते हैं-

1. सवाल:- त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। इन दिनों बाजार में काफी चहल पहल रहती है। हमने ऐसा देखा है कि लोग टीका लेने और कोरोना मामले घटने के बाद मास्क नहीं पहन रहे हैं। त्योहारों के सीजन में बाजार में भीड़ बढ़ रही है और आगे भी बढ़ेगी। ऐसे में Covid Appropriate Behaviour का पालन करना कितना जरूरी है-

जबाव:- डॉक्टर सुरेखा ने आभार प्रकट करते हुए कहा कि आपने बहुत अच्छा सवाल किया है। इस बारे में जानकारी देना चाहूंगी कि कोरोना महामारी के मामले भले ही कम हुए हैं, लेकिन बीमारी समाप्त नहीं हुई है। ये बीमारी अभी भी चल रही है। इसके लिए देश और दुनिया के वैज्ञानिक जानते हैं कि ऐसा हो सकता है कि तीसरी लहर आए और पहले की तरह रूप धारण कर ले। जैसा कि हम सब जानते हैं कि कोरोना का स्ट्रेन बदल रहा है और जब भी यह बीमारी अपना स्ट्रेन बदलती है, तो महामारी का रूप धारण कर लेती है। उस समय में संक्रमितों की संख्या में बड़ी तेजी से इजाफा होने लगता है। फ़िलहाल कोरोना के मामले कम हैं। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि बीमारी ख़त्म हो गई है। वहीं, हमारा देश त्योहारों का देश है। आने वाले समय में कई त्यौहार हैं। इस दौरान लोगों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। साथ ही लोगों को भी सतर्क और जागरुक रहने की जरूरत है। इसके लिए जब कभी घर से बाहर निकलें, तो मास्क हमेशा लगाकर रखें। मास्क का इस्तेमाल बिलकुल न छोड़ें। शारीरिक दूरी का पालन करें। साथ ही अपने हाथों को नियमित अंतराल पर सैनिटाइज करें। इसके अलावा, जब कभी समय और सुविधा मिले, तो अपने हाथों को साबुन और साफ पानी से जरूर धो लें। एक चीज का अवश्य ध्यान रखें कि त्योहारों में भीड़ इकठ्ठा न करें। घर पर ही त्योहारों को मनाएं। जितना हो सके, घर से बाहर कम से कम जाएं और बाहर स्पिटिंग (थूकना) बिल्कुल न करें। इन नियमों का पालन करने से हम सब सुरक्षित रह सकते हैं।

2. सवाल:- Covid-19 से ठीक हुए लोगों में किस तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं ज्यादा देखी गयी है और ऐसी समस्याएं क्यों देखे जा रही हैं ?

जबाव:- इस सवाल के जबाव में डॉक्टर ने कहा-कोरोना से ठीक होने वाले संक्रमितों में कुछ साइड इफेक्ट्स हो रहे हैं। ये बीमारी ठीक होने के बाद भी होती हैं। ये बीमारियां और जटिलताएं कोरोना होने के कुछ सप्ताह बाद आती है और ठीक होने के बाद महसूस होती है। कोरोना से रिकवरी के बाद संक्रमितों को थकान बहुत महसूस होती है। सांस लेने में भी कठिनाई होती है, हल्की खांसी हो सकती है, जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों का दर्द, सिरदर्द, सीने में दर्द, दिल की धड़कनें बढ़ सकती है। साथ ही संक्रमितों को खड़े होने पर कमजोरी की वजह से चक्कर भी आते हैं और स्वाद या गंध में कमी आती है। इसके अलावा, हमने नींद, मनोभ्रम और तनाव या अवसाद की समस्या भी नोटिस की है। यह सामान्य बात है। इसमें ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। चूंकि बीमारी की वजह से कमजोरी होने या पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ितों में कोरोना रिकवरी के बाद होने वाले लक्षण देखे गए हैं। इसके लिए डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

3. सवाल:- तीसरा सवाल इसी से मिलता जुलता है- Covid-19 से ठीक होने के बाद लोगों में सांस संबंधी परेशानियां, लगातार थकान, कमजोरी, चिंता और तनाव, सीने में दर्द, हृदय संबंधी रोगों का खतरा, पार्किंसंस और अल्जाइमर रोग की समस्या, स्ट्रोक, अनिद्रा, स्मरण शक्ति कमजोर होना, बहुत जल्द थक जाना, ब्रेन फॉग यानी मनोभ्रम, सुखी खासी, सांस फूलना और सिर में दर्द देखे गए?  इतनी सारी बीमारियां क्यों और जिनको ये परेशानियां हुई हैं, उन्हें अभी किस तरह से अपने आपको सुरक्षित करना चाहिए?

जवाब:- इस सवाल पर जबाव देते हुए डॉक्टर ने कहा कि श्वसन तंत्र के जरिए कोरोना वायरस शरीर में प्रवेश करता है और शरीर के सभी अंगों को प्रभावित करता है। जब यह बीमारी किसी मरीज में गंभीर रूप अख्तियार कर लेती है, तो शरीर के सभी अंगों को नुकसान पहुंचाती है। इसी वजह से ये सभी लक्षण फेफड़े, किंडनी, त्वचा आदि पर दिखाई पड़ते हैं। यह एक प्रकार से ऑटोइम्यून स्थिति होती है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। इससे हेल्दी ऊतक भी प्रभावित होती है। इस वजह से ऊतकों में सूजन हो सकती है या किसी प्रकार की हानि हो सकती है। इसी तरह के लक्षण कोरोना में पाए जाते हैं, जो अन्य ऑटोइम्यून बीमारी में होते हैं।

4. सवाल:- चूंकि सवाल काफी हैं, तो हम थोड़ा विशेष गहराई में जाते हैं और कुछ सामान्य समस्याओं की बात करते हैं, जो कई लोगों में या तो आ गई है या पहले से थी और बढ़ गई है।

-मधुमेह

-ह्रदय संबंधी बीमारी

-उच्च और निम्न रक्तचाप

-हाइपरटेंशन

-ब्लैक फंगस

-किडनी की समस्या

ऐसे मरीज क्या करें, जिन्होंने Covid-19 को तो हरा दिया पर अब इनसे लड़ रहे हैं?

जवाब:- डॉक्टर सुरेखा ने कहा-कोरोना की जटिलताओं और समस्याओं पर शोध अभी भी जारी है। देश और दुनिया के वैज्ञानिक इस पर काम कर रहे हैं। कोरोना वायरस की जटिलताओं को रोकने का सबसे सरल तरीका है। आप खुद को कोरोना की बीमारी होने से बचाएं और दूसरों को भी कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए प्रोत्साहित करें। साथ ही पीएम मोदी के प्रयासों को सफल बनाएं और कोरोना वैक्सीन जरूर लगवाएं। इसके लिए दोनों डोज लें। इससे कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं। इसके लिए दोनों चीजें जरूर करें।

5. सवाल:- किसी भी तरह की समस्याओं पे कैसे नजर रखें, कौन से वो बदलाव जो शरीर में देखें जाएं, तो उनके ऊपर तुरंत ध्यान देना जरूरी है?

जवाब:- इस सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान संक्रमितों की संख्या में बड़ी तेजी से इजाफा हो रहा था। इस दौरान लोग कोरोना के लक्षणों से सावधान थे। साथ ही आवश्यक सावधानियां भी बरत रहे थे। वहीं, अब कोरोना के मरीजों की संख्या कम है, तो लोग कोरोना के बदलते स्ट्रेन से अनजान हैं। हालांकि, वर्तमान समय में भी अलर्ट रहने की जरूरत है। कोरोना संक्रमित मरीजों में कई नई बीमारियों भी देखने को मिली हैं। इनमें ब्लैक फंगस, येलो और व्हाईट फंगस आदि शामिल हैं। साथ ही डायबिटीज और हाइपरटेंशन की जटिलताएं भी बढ़ जाती हैं। इसके अलावा, हमारे वैज्ञानिकों ने जो शोध किए हैं। उनमें यह पाया गया है कि कोरोना के अधिकतर मरीजों में थकान की समस्या रहती है। सांस लेने में तकलीफ होती है, सीने में दर्द होती है, नींद में परेशानी आती है, एकाग्रता का अभाव भी हो सकता है। स्वाद और गंध समझने की क्षमता कम हो जाती है। इन समस्यायों के लिए डॉक्टर से सलाह लेकर उपचार करवा सकते हैं।

6 सवाल:- कुछ लोगों को ब्लड क्लॉटिंग की भी समस्या हुई थी, ऐसा क्यों और ऐसे लोग क्या करें?

जवाब:- डॉक्टर सुरेखा ने कहा- वायरस पूरे शरीर को प्रभावित करता है। संक्रमित व्यक्ति की इम्युनिटी बहुत कमजोर हो जाती है। इस स्थिति में (अगर संक्रमित अन्य बीमारी से पीड़ित है) बीमारी गंभीर रूप धारण कर लेती है। कुछ मामलों में मरीज ठीक हो जाते हैं और फिर बीमार पड़ते हैं। इस वजह से वे दोबारा हॉस्पिटल आते हैं। इस बारे में मैंने आपको पहले भी बताया है कि जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। इससे Multiorgan failure हो जाते हैं या Multiorgan effect होते हैं। इसके चलते भी मरीज के ठीक होने के बाद भी बीमार पड़ जाते हैं। साथ ही ब्लैक फंगस के मामले भी बढ़ें। ब्लैक फंगस बीमारी इम्युनिटी बहुत कमजोर होने की वजह से होती है। कोरोना संक्रमितों और डायबिटीज के मरीजों की इम्युनिटी बहुत कमजोर हो जाती है। साथ ही Steroids लेने वाले की भी इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। कई दवाइयां में भी steroids की मात्रा होती है। ऐसे लोगों की भी इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। ऐसे मामले में पाया गया है कि ब्लैक फंगस बड़ी तेजी से प्रभावित करता है। इसके अलावा, साफ-सफाई का ध्यान न रखने के चलते भी ब्लैक फंगस समेत कई अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

 

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